29 Jun 2017, 21:15 HRS IST
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  • पहली बार सीप की ‘टीरिया पैंग्विन’ प्रजाति में वृत्ताकार मोती
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  •                                                                               राजेश अभय:

    नयी दिल्ली, 11 अप्रैल : भाषा : दुनिया में मोती उत्पादन के क्षेत्र में भारत का नाम नयी उंचाई तक ले जाने वाले भारतीय वैज्ञानिक डाक्टर अजय सोनकर ने एक नया मुकाम हासिल किया है और इस बार उन्होंने सीपों की एक विशेष प्रजाति ‘टीरिया पैंग्विन’ में वृत्ताकार मोती बनाने में सफलता हासिल है जिसे अब तक असंभव माना जा रहा था।
    डा. सोनकर ने पीटीआई.भाषा को बताया, ‘‘लंबी मेहनत के बाद मुझे इस काम में सफलता मिली है और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘एक्वाकल्चर सोसायटी’ की होने वाली बैठक में या उनकी पत्रिका में अपने खोज की घोषणा करूंगा।’’ उल्लेखनीय है कि कुछ देशों के वैज्ञानिकों ने सीपों की इस प्रजाति में अब तक जो मोती बनाये हैं वह अर्ध वृत्ताकार होते हैं और इसे सीप के बाह्य कवच एवं आंतरिक झिल्ली के बीच प्रत्यारोपित कर बनाया जाता है। इस प्रकार के मोती को ‘मावे पर्ल’ बोला जाता है और इसे बनाने के लिए सर्जरी नहीं करनी पड़ती बल्कि इसे ‘शेल’ :सीप का बाह्य ढांचा और ‘मेन्टल’ :आंतरिक झिल्ली: के बीच अर्धवृत्ताकार न्यूक्लियस को चिपका कर मोती बनने के लिए छोड़ दिया जाता है। ऐसे मोतियों के निकालने के लिए सीप को मारना पड़ता है क्योकि वह सीप के कवच :शेल: से जुड़ा होता है।उन्होंने कहा, ‘‘सीपों की तमाम प्रजातियों में तो सर्जरी संभव है लेकिन विशाल आकार होने के बावजूद ‘टीरिया पैंग्विन’ प्रजाति की शारीरिक संरचना जटिल होने और इस प्रजाति के अत्यधिक संवेदनशील होने की वजह से इसमें सर्जरी के बाद घाव भरने में लगभग महीने भर का समय लगता है। इस दौरान पानी को स्वच्छ रखना जरूरी होता है और उसमें कोई बाह्य तत्व को नहीं रखा जा सकता जो घाव ठीक होने के लिहाज से जरूरी है। ऐसे में मुश्किल यह है कि सीप भोजन के अभाव में न मरे क्योंकि भोजन तो वह पानी से ही ले सकती है।’’ डा सोनकर ने कहा, ‘‘बगैर घाव ठीक हुए पानी में स्वस्थ होने के लिए छोड़ना भी खतरे से खाली नहीं क्योंकि या तो बाहरी अथवा सीप के अंदर ही शरण लिये लघु जीव ‘परभक्षी’ बन उसकी मौत का कारण बन सकते हैं। ऐसे में तमाम वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति में मोती बनाना लगभग असंभव मान लिया था। लेकिन यही मेरे लिए चुनौती थी कि कैसे इस प्रजाति में छोटे से छोटे हिस्से में सर्जरी की जाये और किस तरह से घाव को कम से कम समय में ठीक किया जाये ताकि सीप को भोजन की कमी के कारण मरने से बचाया जा सके। ै उन्होंने कहा, ‘‘शोध के जरिये हमने ‘हीलिंग एजेंट’ :जख्म ठीक करने की दवा :की सही मात्रा को विकसित करने में तथा प्रतिकूल परिस्थितियों से सीप को बचाने का तरीका ढूढने में सफलता पाई है और अब इस असंभव माने जाने वाले काम को आसानी से अंजाम दिया जा सकेगा।’’ ‘टीरिया पैंग्विन’ सीप की प्रजाति अपने आकार प्रकार के कारण दुनिया के तमाम वैज्ञानिकों के आकषर्ण का केन्द्र रही है क्योंकि इसमें सर्वोत्तम मोती बनाया जा सकता है। मोती में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व उसके संघनित :क्रिस्टलाइजेशन: होने की प्रक्रिया होती है। उक्त प्रजाति में ‘एरागोनाइट क्रिस्टलाइजेशन’ :कैल्शियम के साथ मोती के चमकदार तत्व के परस्पर संघनित होने की प्रक्रिया: बेहतरीन ढंग से होती है और ऐसे मोती काफी महंगे होते हैं क्योंकि ‘एरागोनाइट क्रिस्टलाइजेशन’ से बने मोती सदियों अपनी चमक नहीं खोते। चीन के मीठे पानी के मोती...

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