29 Jun 2017, 21:17 HRS IST
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  • भाजपा के करीबी कुछ संगठन जीएम सरसों के खिलाफ
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    नयी दिल्ली, 29 मई :भाषा: केंद्र में सत्तारढ भारतीय जनता पार्टी :भाजपा: के नजदीकी कई संगठनों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि खाद्य फसलों, खासकर सरसों की खेती में आनुवांशिक अभियांत्रिकी के जरिये तैयार खाद्य फसलों के बीजों :जीएम खाद्य फसलों: की खेती की अनुमति न दी जाये। जीएम खाद्य फसलों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर नुकसान की आशंका जताते हुए उनका कहना है कि भारतीय बीज एवं अन्न बाजार पर बहुराष्ट्रीय जेनेटिक इंजीनियरिंग एवं बायोटेक्नोलॉजी कंपनी की गिद्धदृष्टि लगी है।
    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच :एसजेएम:, भारतीय किसान संघ और भाजपा के भारतीय किसान मोर्चा के नेताओं का दावा है कि जीएम सरसों की खेती को अनुमति देने की सिफारिश में जल्दबाजी दिखायी गयी है जबकि खेती से कोई खास फायदा नहीं होने वाला है। उल्टे इनसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ने तथा जैव विविधता के लिए खतरा हो सकता है।एसजेएम और भारतीय किसान संघ ने जीएम सरसों के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखे हैं।एसजेएम के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हम जीएम सरसों के खिलाफ हैं। इससे हमारी जैव विविधता प्रभावित होगी। यह पर्यावरण और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाला है क्योंकि इनसे कैंसर जैसे मर्ज पैदा हो सकते हैं। इससे मधुमक्खीपालन तथा फसलों का परागण और उत्पादन प्रभावित होगा। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘फ्रांस के वैज्ञानिक एरेक सेरेलिन ने चूहों को जीएम फसल खिलाया और देखा गया कि उनकी तीसरी पीढ़ी में भारी मात्रा में कैंसर का प्रकोप हुआ। ’’स्वदेशी जागरण मंच के महाजन ने कहा कि कई प्रभावशाली बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत के विशाल बीज बाजार पर कब्जा करने की कोशिश में है। उन्होंने कहा, ‘‘सरसों की वर्तमान देसी और संकर किस्में प्रति हेक्टेयर 2,800 से 2,900 किलो की उपज देती है जबकि जीएम किस्म प्रति हेक्टेयर 2,600 से 2,700 किलो प्रति हेक्टेयर की उपज देने का दावा करती है, इस प्रकार हमारी पुरानी किस्में उत्पादकता के मामले में जीएम किस्म से आगे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 23 मई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि जीईएसी द्वारा मंजूर जीएम सरसों की किस्म में जो दो गुण :ट्रेट: हैं वह बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘बायर’ द्वारा पेटेन्ट कराये जा चुके हैं।’’ भारतीय किसान संघ के संगठन महामंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा, ‘‘हम जीएम प्रौद्योगिकी के खिलाफ नहीं है। पर जो भी जो भी प्रौद्योगिकी आये उसे भारतीय परिस्थितियों में सारे मानकों पर परखा जाना चाहिये क्योंकि वैज्ञानिक सिर्फ शोध की दृष्टि से किसी चीज को देखता है जबकि किसान के हित में सामाजिक आर्थिक दृष्टि से भी देखा जाना चाहिये। ’’ भारतीय किसान मोर्चा के अध्यक्ष एवं सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त ने कहा, ‘‘जीएम सरसों के संदर्भ में जो भी बात हो रही है, हमारी पहली शर्त यह है कि भारत के किसानों का बीज सुरक्षित रहना चाहिये। कोई भी कृषि वातावरण के अनुकूल होनी चाहिये। वातावरण को खराब करके पैदावार बढ़ाना पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से सही नहीं है। अगर जीएम फसल पैदावार पर दूरगामी असर डालता हो तो भी इसका उपयोग नहीं करना चाहिये। ’’ उल्लेखनीय है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से संबद्ध आनुवांशिक अभियांत्रिकी आकलन समिति :जीईएसी: ने हाल में सरकार से दिल्ली...

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