29 Jun 2017, 21:19 HRS IST
  • चेन्नई: अपोलो अस्पताल ने किया एयर एंबुलेंस का उद्घाटन
    चेन्नई: अपोलो अस्पताल ने किया एयर एंबुलेंस का उद्घाटन
    दिल्ली: उपराष्ट्रप​ति चुनाव घोषणा के अवसर पर संवाददाता सम्मेलन
    दिल्ली: उपराष्ट्रप​ति चुनाव घोषणा के अवसर पर संवाददाता सम्मेलन
    जम्मू: अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए साधु जयकारे लगाते हुए
    जम्मू: अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए साधु जयकारे लगाते हुए
    वॉशिंगटन: मीडीया के सामने साझा वक्तव्य जारी करते मोदी—ट्रंप
    वॉशिंगटन: मीडीया के सामने साझा वक्तव्य जारी करते मोदी—ट्रंप
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम मुलाकात
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
    • मुलाकात
    • रेटिंग   Rating Rating Rating Rating Rating
  •  
  • लगातार घट रही है अंडमान निकोबार में जनजातियों की संख्या
  • [ - ] आकार [ + ]
  • नयी दिल्ली, 15 जनवरी :भाषा: अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में अलग अलग टापुओं पर जंगलों में समूह बना कर रहने वाली जनजातियों का अन्य समुदायों और प्रशासन से बहुत सीमित संपर्क है और इसी वजह से भोजन और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के अभाव में इन समुदायों की आबादी लगातार घट रही है।
    अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने ‘भाषा’ को बताया कि अंडमान निकोबार द्वीपसमूह पर रहने वाले आदिवासियों के लिए खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना असली चुनौती है क्योंकि उनका प्रशासन से संपर्क बहुत ही सीमित है।
    उन्होंने कहा कि ये आदिवासी अपने क्षेत्रों में अधिकारियों को घुसने की इजाजत नहीं देते और कोई अगर घुसना चाहे तो उस पर तीर चला देते हैं।
    उरांव ने पिछले महीने एक सप्ताह अंडमान निकोबार द्वीपसमूह पर अलग अलग टापुओं पर जा कर हालात का जायजा लिया था। इस दौरान उनके साथ आयोग के दो अन्य सदस्य, स्थानीय प्रशासन के अधिकारी और जारवा समुदाय की बोली से परिचित दुभाषिया शामिल थे।
    उरांव ने कहा ‘‘जिन जारवा आदिवासियों की चर्चा इन दिनों मीडिया में हो रही है, ताजा जनगणना के अनुसार, उनकी संख्या लगभग 381 है जबकि इनसे सटे एक अन्य टापू पर रहने वाले ग्रेट अंडमानी जनजाति के लोगों की आबादी लगभग 97 रह गई है। इनकी संख्या लगातार घट रही है क्योंकि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से उन तक नहीं पहुंच पा रही हैं। किसी आदिवासी के बीमार होने पर उसकी इलाज के अभाव में मौत हो जाती है।’’ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष उरांव ने कहा ‘‘इन आदिवासियों की त्वचा बहुत संवेदनशील है और बाहरी लोगों के अधिक संपर्क में आने पर उन्हें रोग हो जाते हैं क्योंकि उनकी रोगों से मुकाबले के लिए प्रतिरोधक क्षमता हमारे मुकाबले बहुत कम होती है। इन बातों को ध्यान में रख कर कानून ने और अदालत ने इन समुदायों के संरक्षण के लिए कड़े दिशानिर्देश दिए हैं।’’ गौरतलब है कि नग्न नृत्य करते हुए इन आदिवासियों के विडियो के कारण पिछले दिनों जारवा जाति चर्चा में आई थी।
    उरांव ने कहा कि पिछले महीने अंडमान के दौरे पर उनका स्थानीय प्रशासन की मदद से जारवा समुदाय के दो लड़कों और दो लड़कियों से संपर्क हुआ था। उनसे मिल कर यह स्पष्ट हुआ कि पहले निर्वस्त्र रहने वाले इस समुदाय ने अब थोड़े बहुत कपड़े पहनने या पत्ते लपेटने शुरू कर दिए हैं।
    हाल ही में सामने आए वीडियो फुटेज के बारे में उरांव ने कहा कि पोर्ट ब्लेयर से शुरू होने वाले अंडमान ट्रंक मार्ग से गुजरते समय पहले पर्यटक बीच में ही उतर कर जारवा समुदाय से मिलने या उन तक पहुंचने का प्रयास करते थे। लेकिन अब इस मार्ग पर बीच में उतरने पर रोक लगा दी गई है।
    उरांव ने कहा ‘‘यह वीडियो फुटेज कितना पुराना या नया है, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता और हमने अंडमान निकोबार द्वीपसमूह सरकार से इस पूरे मामले में दस दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है।’’ लंदन स्थित अखबार ऑब्जर्वर ने हाल ही में अर्धनग्न जारवा आदिवासी महिलाओं को नृत्य करते हुए दिखाने वाले वीडियो फुटेज जारी किए थे जिससे खासा विवाद पैदा हो गया है। इस प्रकरण के बाद केंद्र सरकार ने भी मामले की जांच के आदेश दिए हैं और पुलिस भी वीडियो फिल्माने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है।
    आदिवासी मामलों के मंत्री वी किशोर चंद्र देव कहा है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के जारवा आदिवासी समुदाय को ‘दयनीय स्थिति’ में छोड़ने के बजाय उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के लिए कदम उठाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को विकास के लाभ मिलने चाहिए लेकिन जारवा समुदाय सहित अन्य समूहों के साथ विचार विमर्श करने की जरूरत है ताकि उन्हें मुख्यधारा में लाया जा सके।-भाषा वेब

रेट दें
Submit
  • इस मुलाकात पर अपनी राय दें
  • अन्य मुलाकात
  •     
add