20 Oct 2017, 14:2 HRS IST
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  • प्रतिरोधक क्षमता नहीं बढ़ी तो जारवा समुदाय पर संकट के बादल: आयोग:

    अनुराग पाण्डेय :

    नयी दिल्ली, 20 मई :भाषा: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने आगाह किया है कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर मौजूद जारवा जनजाति समुदाय की प्रतिरोधक क्षमता तत्काल बढाने की जरूरत है क्योंकि यह समुदाय अस्तित्व के संकट की ओर बढ़ रहा है।
    आयोग ने कहा कि जारवा समुदाय के इलाके में प्रशासन का दखल बहुत सीमित है, उनके क्षेत्रों में घुसने की लगातार कोशिश की जा रही है ताकि उन पर भोजन और स्वास्थ्यकर दवाओं जैसी बुनियादी जरूरतें पहुंचे और उन्हें मुख्यधारा में शामिल किया जा सके।
    आयोग के अध्यक्ष डाक्टर रामेश्वर उरांव ने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘पहले जारवा समुदाय के क्षेत्र में घुसने पर ये लोग तुरंत तीर चला देते थे और किसी को अपने पास नहीं आने देते थे। लेकिन अब अंडमान प्रशासन धीरे धीरे उनके इलाकों में जा रहा है ताकि उन्हें मूलभूत सुविधाएं दी जाएं और मुख्यधारा से जोड़ा जाए। लेकिन योजनाओं को लागू करना असली चुनौती है।’’ उरांव ने कहा कि इन आदिवासियों की त्वचा बहुत संवेदनशील है और बाहरी लोगों के अधिक संपर्क में आने से उन्हें खसरा जैसे रोग हो जाते हैं क्योंकि उनकी रोगों से लडने की प्रतिरोधक क्षमता हमारे मुकाबले बहुत कम है। प्रतिरोधक क्षमता और प्रजनन शक्ति बढाने के लिए उपाय किये जा रहे हैं।जारवा जाति के लोग नब्बे के दशक के अंत में पहली बार बाहरी दुनिया की संपर्क में आए। 1997 के आसपास इस जनजाति के कुछ लोग जंगल से बाहर आकर आसपास मौजूद बस्तियों में जाने लगे। लेकिन, महीने भर के भीतर ही उनमें खसरा फैल गया। 2006 में भी वहां खसरा फैला। हालांकि किसी की मृत्यु की जानकारी नहीं मिली। सरकार ने पिछले दिनों कहा था कि अंडमान द्वीप समूह में रहने वाले जारवा आदिवासियों की आबादी 2001 की जनगणना के मुताबिक 240 थी जो 2011 में बढकर 383 हो गयी।
    जनजातीय मामलों के मंत्री ने कहा था कि बीते दस सालों में जारवा की आबादी 40 फीसदी बढी है।
    बहरहाल, आयोग के अध्यक्ष उरांव ने चिंता जताते हुए कहा कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर मौजूद जनजातियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जारवा समुदाय की संख्या लगभग 383 और एक अन्य जनजाति समुदाय ग्रेट अंडमानी की जनसंख्या केवल 97 रह गई है। हालांकि ये आंकड़े पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि यह अनुमान के आधार की गिनती है। उरांव ने कहा कि जिन टापुओं पर ग्रेट अंडमानी समुदाय रहता है, उन तक प्रशासन की पहुंच हो गई है। कुछ माह पूर्व आयोग के दौरे के समय आयेाग के सदस्यांे ने इस समुदाय के लोगों से मुलाकात भी की थी। उन्होंने कहा कि पहले ग्रेट अंडमानी समुदाय के लोग 35-40 वर्ष की उम्र से ज्यादा नहीं जी पाते थे लेकिन अब उनकी मृत्यु की अनुमानित उम्र बढकर 60 वर्ष हो गई है। इसे एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है।
    उन्होंने कहा कि इन जनजातियों तक पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्यकर दवाएं सहित अन्य जरूरी वस्तुएं पहुंचान की जरूरत है क्योंकि वे भी इसी देश के नागरिक हैं और उन्हें खुदके भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
    गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व लंदन के अखबार ‘आब्जर्वर’ ने जारवा समुदाय की अर्धनग्न महिलाओं की नृत्य करते हुए दिखाने वाले वीडियो फुटेज जारी किये थे जिसके बाद खासा विवाद पैदा हो गया था।

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