21 Oct 2017, 08:18 HRS IST
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  • संसदीय धर्म का पालन करें सदस्य : मीरा कुमार
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  • नरेश कौशिक :                                             नयी दिल्ली, 26 जुलाई : भाषा : संसद के पिछले कई सत्रों से लगातार कार्रवाई बाधित होने और कुछ विधेयक बिना चर्चा के पारित होने से बेहद खिन्न लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि सदन को चलाना किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है और संसद बाधित होने के लिए सभी जिम्मेदार हैं।

     पांच अगस्त से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पूर्व मीरा कुमार ने ‘‘भाषा’’ के साथ बातचीत में कहा, ‘‘ 545 सदस्यों का सदन है।सदन को सभी लोगों के सहयोग से ही चलाया जा सकता है।दो सदस्य भी कार्यवाही में बाधा डालते हैं तो सदन को स्थगित करना पड़ता है।

    सदन चलाना मेरी भी जिम्मेदारी है।सदस्यों की भी जिम्मेदारी है।’’ गौरतलब है कि 13वीं और 14वीं लोकसभा में कार्य निष्पादन की दर क्रमश: 91 और 87 फीसदी थी जो वर्तमान 15वीं लोकसभा में घटकर 72 फीसदी पर आ गयी है।

    उच्चतम न्यायालय द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का एक प्रावधान निरस्त करने के हालिया ऐतिहासिक फैसले पर प्रतिक्रिया जताते हुए अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ मैं न्यायालय की भावना का स्वागत करती हूं ।’’ हंगामे के कारण बजट सत्र के दूसरे चरण का पूरा समय व्यर्थ चला गया और एक दिन भी प्रश्नकाल नहीं हो सका।

    इस दौरान केवल संवैधानिक रूप से आवश्यक वित्तीय कामकाज ही निपटाए जा सके।संसद की कार्यवाही के सुचारू संचालन और उसमें भी प्रश्नकाल की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ कार्यवाही का सुचारू संचालन सदस्यों का संसदीय और लोकतांत्रिक धर्म है , जिसका उन्हें पालन करना चाहिए।यह उनकी जिम्मेदारी भी है और जवाबदेही भी।’’

    संसद की कार्यवाही बाधित होने से सरकारी खजाने पर बोझ पड़ने और जनता की गाढ़ी कमाई पर पानी फिरने की बात से सहमति जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ ये सदन बना है कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि यहां आकर जनता की बात रखें। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करें।लेकिन बार बार सदन बाधित होने से वह उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता जिस उद्देश्य के लिए जनता ने अपने प्रतिनिधियों को यहां चुनकर भेजा है।’’

    सदन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चाओं के दौरान गंभीरता के अभाव पर खेद जाहिर करते हुए अध्यक्ष ने कहा,‘‘ चुनाव लड़ना और जीत कर आना आसान काम नहीं है। इतनी कड़ी परीक्षा से गुजरे हैं तो सदन बंद कराने के लिए तो चुनाव नहीं लड़ा है।’’

     संसद के बजट सत्र में दोनों सदनों की 32 बैठकें होनी निर्धारित थीं लेकिन कोल ब्लाक आवंटन, 2 जी मामले , भारत-चीन सीमा विवाद , पश्चिम बंगाल के चिट फंड घोटाले , रेलवे में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर विभिन्न दलों के हंगामे के कारण सत्र को दो दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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