18 Dec 2017, 19:42 HRS IST
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  • बलबीर सिंह सीनियर के पदक, ओलंपिक ब्लेजर लापता
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  • .                                                    मोना पार्थसारथी

    चंडीगढ , 16 सितंबर : भाषा : दुनिया के महानतम ओलंपियनों में शुमार बलबीर सिंह सीनियर ने 27 बरस पहले अपने पदक और 1956 मेलबर्न ओलंपिक का ब्लेजर भारतीय खेल प्राधिकरण को संग्रहालय में रखने के लिये सौंपे थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और अब किसी को नहीं पता कि उनकी ये नायाब धरोहरें कहां हैं।तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक : 1948 लंदन, 1952 हेलसिंकी और 1956 मेलबर्न: विजेता बलबीर ने 1985 में अपने 24 पदक, मेलबर्न ओलंपिक खेलों का कप्तान का ब्लेजर और कुछ दुर्लभ तस्वीरें साइ के तत्कालीन सचिव ए एस तलवार को सौंपी थी।उस समय उन्हें जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में साइ के खेल संग्रहालय में रखने का वादा किया गया था लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बलबीर ने पीटीआई-भाषा को बताया ,‘‘ मैने ओलंपिक स्वर्ण को छोड़कर अपने सारे पदक साइ को सौंप दिये थे जिसमें तोक्यो एशियाई खेल 1958 का रजत पदक भी शामिल था।इसके अलावा मेलबर्न ओलंपिक का ब्लेजर और भारत के पहले गर्वनर जनरल सी राजगोपालाचारी, पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के साथ कुछ नायाब तस्वीरें भी थी।’’ उन्होंने कहा कि दो साल पहले अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा चुने गए 100 साल के महानतम 16 ओलंपियनों में वह अकेले भारतीय थे और उनकी धरोहरें नुमाइश के लिये मांगी गई लेकिन जब उन्होंने साइ से इस बारे में संपर्क किया तो उसने पल्ला झाड़ लिया।हाकी के महानतम सेंटर फारवर्ड में से एक बलबीर ने कहा ,‘‘ मेरे पास ओलंपिक स्वर्ण के अलावा कोई पदक थे ही नहीं।जब पूछा गया तो साइ ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।मैने सिर्फ ओलंपिक पदक भेज दिये जिनकी लंदन ओलंपिक के दौरान वहां नुमाइश की गई।’’बलबीर की बेटी सुशबीर भूमिया ने कहा ,‘‘ हमने तत्कालीन खेलमंत्री अजय माकन को पत्र लिखा जिन्होंने मामला साइ को सौंपा । साइ को बार बार ईमेल करने पर हमें 18 जुलाई 2012 को साइ के तत्कालीन सचिव गोपाल कृष्णा का पत्र मिला कि उन्होंने एनआईएस पटियाला और दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में तलाश कराया है लेकिन ब्लेजर दोनों जगहों पर नहीं है।’’  इस बारे में पूछने पर साइ के पटियाला केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक : अकेडेमिक्स : एस एस रॉय ने कहा ,‘‘ मुझे इसकी जानकारी नहीं है क्योकि मुझे आये कम समय ही हुआ है लेकिन मैं इसकी तलाश कराउंगा।’’ सुशबीर ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दखल की मांग की है।उन्होंने कहा ,‘‘ हमने पिछले दो साल में इस मामले में किसी से संपर्क नहीं किया और ना ही मीडिया को बताया क्योकि हमें लगा कि अब यह दीवार के आगे सिर फोड़ने जैसा है। वह : बलबीर : हमेशा चुपचाप सब कुछ सहन करते रहे लेकिन हमें पता है कि वह ब्लेजर और पदक उनके लिये कितने अहम हैं।’’ उन्होंने कहा ,‘‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर अपील करना चाहती हूं कि इस मामले में दखल देकर मेरे पिता के साथ इंसाफ करें।’’ सुशबीर ने कहा ,‘‘ मेरे पिता से कम उपलब्धियों वाले खिलाड़ियों को बड़े बड़े सम्मान दिये गए लेकिन उन्हें सिर्फ पद्मश्री मिला और वह भी 1957 में।यदि आप उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिये कुछ दे नहीं सकते तो कम से कम उनकी ऐतिहासिक धरोहरें संभालकर तो रखें।देश की खेल विरासत की कद्र करना तो सीखें ताकि अगली पीढियां प्रेरित हो सकें।’’ बलबीर ने इंचियोन एशियाड के लिये भारतीय टीम को शुभकामना देते हुए कहा ,‘‘ मैं दुआ करता हूं कि यह टीम स्वर्ण पदक जीतकर लौटे।ये धरोहरें ही खिलाड़ी के ताउम्र साथ रहती हैं।’’संपादकीय सहयोग-अतनु दास





     

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