17 Aug 2017, 07:12 HRS IST
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  • निजामुद्दीन औलिया की दरगाह बने हुए 800 साल
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    उमेश सिंह :

    नयी दिल्ली, 17 दिसंबर :भाषा: हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह को बने 800 साल पूरे होने के मौके पर दरगाह प्रबंधन की पूरे साल सूफी संगीत एवं कव्वाली के कार्यक्रम जारी रखने की तैयारी है।
    दरगाह का प्रबंधन करने वाले सैयद अफसर अली निजामी ने बताया ‘‘दरगाह सिर्फ एक मजार नहीं है।यह शांति, संस्कृति और हमारी विरासत की जगह है। यहां अक्सर हमारे देश की कुछ जानी पहचानी हस्तियां भी शिरकत करती हैं।’’ दरगाह पर यूं तो हर शाम कुछ न कुछ संगीत कार्यक्रम होते रहते हैं, लेकिन इस साल हम दरगाह के 800 साल पूरा होने पर सिर्फ सूफी संगीत के कार्यक्रम करेंगे। सूफी कव्वालों का निजामी घराना पिछली सात सदियों से इस दरगाह में सूफी संगीत और अपनी कव्वाली की अलख जगाये हुये हैं।उनसे पहले उनके बुजुर्ग भी इसी दरगाह में सूफीयाना संगीत और कव्वाली प्रस्तुत किया करते थे। उस्ताद चांद निजामी, फरीदी निजामी और सोहराब अफ्रीदी निजामी बंधुओं के सूफी संगीत के प्रचार प्रसार के लिए दरगाह में पूरे साल इस प्रकार के कार्यक्रम करने की योजना है।
    उन्होंने कहा कि देश के तमाम नामचीन सूफी गायक और कव्वालों ने यहां अपनी प्रस्तुति देने की हामी भरी है।
    दुनिया के तमात सूफी संतों में हजरत निजामुद्दीन औलिया की जगह सबसे अलग और उंची है। सूफी समुदाय के बीच दिल्ली स्थित उनकी दरगाह को बेहद पवित्र और धार्मिक स्थान का दर्जा हासिल है।
    निजामी ने बताया कि दरगाह के 800 साल पूरे होने के मौके पर हम पूरे साल सूफी संगीत के कार्यक्रम आयोजित करेंगे।इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक भाईचारे के लिए बेहद जरूरी हैं।दिल्ली में सन् 1325 में हजरत निजामुद्दीन के इंतकाल के बाद उनकी दरगाह बनायी गयी। इसका हालिया नक्शा 1562 में तैयार किया गया।संपादकीय सहयोग-अतनु दास


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