20 Oct 2017, 14:5 HRS IST
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  • जीवन शक्ति की उपासना करती एक दीर्घा
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    शरद अग्रवाल:

    नयी दिल्ली, 18 फरवरी :भाषा: भारत के सांस्कृतिक वातावरण में जीवन का मूल आधार आदिशक्ति और शिव को माना जाता है।विजय काले के रूपकात्मक :फिगरेटिव: शैली में ढले चित्र जीवन के इन्हीं दो स्वरूपों की उपासना करते प्रतीत होते हैं।भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा यहां आयोजित कला प्रदर्शनी में इस शक्ति और शिव के कई स्वरूपों को दर्शाया गया है।अपने पिता से प्रेरणा पाकर कलाकार बने काले ने ‘भाषा’ को बताया, ‘‘मैंने पुरूष और नारी को प्रतिबिंबित करने के लिए शक्ति और शिव के रूप को अपनी कलाकृतियों का हिस्सा बनाया क्योंकि सब कुछ इन्हीं दोनों में विद्यमान है।’’ उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुए निर्भया कांड ने उन्हें झकझोरा इसलिए उन्होंने अपनी शक्ति की श्रृंखला का विस्तार किया और मां काली स्वरूप का वर्णन करते हुए उनके द्वारा रक्तबीज का वध करने की घटना को इनका मुख्य विषय बनाया।जीवन का मूल शक्ति और शिव के चित्रों की श्रृंखला के साथ उन्होंने कृष्ण और हनुमान के चित्रों को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया है लेकिन उनकी उत्पत्ति को उन्होंने शिव से ही दर्शाया है।जहां कृष्ण के प्रभाव में शिव का अक्स है तो हनुमान का चित्र उनके शिवावतार होने का प्रमाण देता प्रतीत होता है।यह पूछे जाने पर कि भारत में आजीविका के रूप में कलाकार बनना कितना मुश्किल है, काले ने कहा, ‘‘हर व्यक्ति का अपना दृष्टिकोण होता है।यदि कोई कलाकार अपनी प्रतिभा को ठीक प्रकार से लोगों के सामने रखे तो मुझे नहीं लगता कि उसे आजीविका के संबंध में सोचना पड़ेगा।’’इस सवाल के जवाब में उनकी साथी कलाकार शशि भारती ने कहा, ‘‘भारतीय समाज में कला के प्रति एक उदासीनता है जिसकी वजह से लोग कला दीर्घाओं तक नहीं आते और यह आम जनता तक नहीं पहुंच पाती और इस तरह नयी पीढ़ी में रचनात्मकता का संचार ही नहीं हो पाता।’’ काले ने कहा कि वर्तमान में दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरू में ही कलाकृतियों के खरीददार मिलते हैं जिनमें फिलहाल मुख्यत: कॉरपोरेट्स तथा बड़े घराने ही हैं और कला का विकास आम आदमी की पहुंच से दूर ही बना हुआ है।प्रदर्शनी में लगे चित्रों में जहां शक्ति मां स्वरूप में है तो वहीं वह काली की तरह संहार भी कर रही हैं।शिव के भी कई रूप यहां प्रदर्शित होते हैं जिसमें वह कहीं पर ध्यानमुद्रा में हैं तो कहीं उनके अक्स में कृष्ण स्वरूप विद्यमान है।इसके अलावा शिव का वृषभ व डमरू अधिकतर चित्रों में विशेष रूप में उनसे जुड़ा हुआ है।संपादकीय सहयोग-अतनु दास


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