06 Aug 2020, 18:13 HRS IST
  • राम मंदिर राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक: मोदी
    राम मंदिर राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक: मोदी
    देश में एक दिन में कोविड-19 के 54,735 नए मामले, कुल मामले 17 लाख के पार
    देश में एक दिन में कोविड-19 के 54,735 नए मामले, कुल मामले 17 लाख के पार
    कोरोना वायरस का खतरा टला नहीं है, बहुत ही ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत : मोदी
    कोरोना वायरस का खतरा टला नहीं है, बहुत ही ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत : मोदी
    भारत में कोविड-19 के मामले 13 लाख के पार, मृतकों की संख्या 31,358 हुई
    भारत में कोविड-19 के मामले 13 लाख के पार, मृतकों की संख्या 31,358 हुई
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम मुलाकात
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
    • मुलाकात
    • रेटिंग   Rating Rating Rating Rating Rating
  •  
  • चीनी व्यक्ति को है उर्दू से प्यार
  • [ - ] आकार [ + ]
  • .

    असीम कमाल :



    नयी दिल्ली, सात अप्रैल ::भाषा:;उम्र के 75 वसंत देख चुके चीनी कवि झांग शिग्जुआन के लिए उर्दू में शेर लिखना एक जुनून है और पिछले पांच दशकों में उर्दू के प्रति उनका यह प्रेम कई गुना बढ़ गया है। झांग ने यहां शुक्रवार को 17वें सालाना जश्न-ए-बहार मुशायरे में कुछ शेर सुनाए, तो वहां मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए।झांग ने जो पंक्तियां सुनाईं, उनमें से एक इस प्रकार थी, ‘‘टूट जाता है कलम, हर्फ मगर रहता है, पांव चलते हैं मगर नक्श ठहर जाता है’’।
    झांग ने पीटीआई भाषा को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘वर्ष 1963 की बात है। मैं स्नातक तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। तब मुझे सरकार की ओर से उर्दू पढ़ने के लिए कहा गया क्योंकि चीन भारत और पाकिस्तान के साथ करीबी संबंध विकसित करना चाहता था। शुरूआत में मुझे बुरा लगा क्योंकि मेरा जुनून पत्रकारिता में था लेकिन जब मैंने इस भाषा को पढ़ना शुरू किया तो मुझे इससे प्यार हो गया।’’ झांग ने अपना उपनाम इंतेखाब आलम रखा है, जो कि उनके चीनी नाम का उर्दू अनुवाद है। झांग ने कहा कि उन्होंने चार साल तक सात छात्रों के समूह के साथ इस भाषा का अध्ययन किया।इसी समूह में एक लड़की भी थी, जिससे बाद में झांग ने शादी कर ली। इस समूह ने उर्दू का अध्ययन बीजिंग ब्रॉडकास्टिंग इंस्टीट्यूट में किया था, जिसे अब कम्यूनिकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना के नाम से पहचाना जाता है। झांग बाद में चाइना पिक्टोरियल नाम मासिक पत्रिका के उर्दू संस्करण के संपादक बन गए।सालाना जश्न-ए-बहार मुशायरा में चार बार शिरकत कर चुके झांग ने कहा, ‘‘जब भाषा पर मेरी पूरी पकड़ हो गई, तो मैंने उर्दू में शेर लिखने शुरू कर दिए। जो चीज पहले एक अनिवार्यता की तरह शुरू हुई थी, बाद में वह एक जुनून बन गई और फिर मुझे उर्दू से प्यार हो गया।’’ उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो को फांसी पर चढ़ाए जाने से दुखी होकर वर्ष 1979 में अपनी पहली ‘नज़्म’ :उर्दू कविता: लिखी थी।जब उनसे पूछा गया कि क्या उर्दू अंग्रेजी या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषा की तरह एक संपर्क भाषा बन सकती है, तो उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा समय में, आर्थिक लाभ के लिए कार्यकारी भाषा के रूप में उर्दू पिछड़ी हुई है।इसलिए इस भाषा का इस्तेमाल और पोषण प्रेम के साथ करना जरूरी है। भाषा के लिए प्यार ही इसे दुनिया के विभिन्न कोनों तक प्रसारित करने में मदद कर सकता है।’’

    संपादकीय सहयोग-अतनु दास

रेट दें
Submit
  • इस मुलाकात पर अपनी राय दें
  • अन्य मुलाकात
  •     
add