27 Jun 2019, 03:53 HRS IST
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  • अच्छी फिल्मों की राह में फिल्म उद्योग ही बाधा: साई कबीर
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  • ‘‘मेरी फिल्म को देशी कहने वालों को मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि पूरे फिल्म उद्योग के लिए कहानी सिर्फ शहरी भूभाग में ही अगर है तो मेरी कोई रचि शहरी जीवन के उहापोह में कविता ढूंढने की नहीं है।मेरी आधुनिक भारत के उन लोगों में भी कोई दिलचस्पी नहीं है जिसके हाथ में 24 घंटे गूगल होता है और उन्हें खुद भारत के राष्ट्रपति का नाम नहीं मालूम होता।’’ ग्वालियर में पैदा हुए और पढ़े लिखे साई कबीर ने कहा, ‘‘मेरे माता पिता दोनों डॉक्टर हैं और मैंने एयरफोर्स कालेज में पढ़ाई करने के बाद इंजीनियरिंग :इलेक्ट्रानिक्स: की पढ़ाई की लेकिन इसे पूरा किये बगैर नाटकों में शामिल हो गया और कुछ दिनों में उसे भी छोड़ दिया और 21 साल की उम्र में कुंदन शाह और सईद मिर्जा जैसे निर्देशकों के साथ सहायक बन गया। कुंदन शाह, अजीज मिर्जा और सईद मिर्जा के साथ उन्होंने लगभग 8 साल बतौर सहायक काम किया और इस दौरान स्क्रीन प्ले और कहानी भी लिखीं।उन्होंने कहा कि इस फिल्म के बाद वह तिग्मांशु धूलिया के साथ ही एक प्रेम कहानी पर फिल्म ‘डिवाइन लवर्स’ बनाने की प्रक्रिया शुर करेंगे।संपादकीय सहयोग-अतनु दास




     

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