16 Jul 2018, 02:17 HRS IST
  • राजधानी दिल्ली मेें भयंकर गर्मी के बाद बारिश का आनंद लेते बच्चे
    राजधानी दिल्ली मेें भयंकर गर्मी के बाद बारिश का आनंद लेते बच्चे
    अहमदाबाद : जगन्नाथ रथ यात्री रंगारंग तैयारी
    अहमदाबाद : जगन्नाथ रथ यात्री रंगारंग तैयारी
    महिलाओं की 400 मीटर दौड की विश्व चैम्पियन भारत की हिमा दास
    महिलाओं की 400 मीटर दौड की विश्व चैम्पियन भारत की हिमा दास
    फोनेक्सि में लगी आग को बुझाने में दमकल कर्मी जी जान से कोशिश करते
    फोनेक्सि में लगी आग को बुझाने में दमकल कर्मी जी जान से कोशिश करते
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम अर्थ
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
add
add
  • दहेज-विरोधी कानून को नरम करने वाले फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है शीर्ष अदालत

  • विज्ञापन
  • [ - ] फ़ॉन्ट का आकार [ + ]
पीटीआई-भाषा संवाददाता 19:23 HRS IST

(दिल्ली-62 के तीसरे पैरे में नाम में आवश्यक संशोधन के साथ) नयी दिल्ली, 13 अक्तूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आज संकेत दिया कि वह अपने करीब दो महीने पुराने उस फैसले पर पुनर्विचार करेगी जिसमें दहेज-विरोधी कानून की सख्ती को कम किया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि इससे महिलाओं के अधिकार प्रभावित होते दिखाई दे रहे हैं।

दो न्यायाधीशों की पीठ ने 27 जुलाई को निर्देश दिया था कि आरोपों का सत्यापन किये बिना ‘‘सामान्य रूप से कोई गिरफ्तारी’’ नहीं होनी चाहिए क्योंकि बेगुनाहों के मानवाधिकार उल्लंघनों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह इस फैसले से सहमति नहीं रखती जिसमें आईपीसी की धारा 498ए (विवाहित महिला के साथ क्रूरता से संबंधित) की सख्ती को दरअसल कमजोर किया गया था।

इस पीठ में न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ भी हैं, जिसने नोटिस जारी किया और 29 अक्तूबर तक केंद्र का जवाब मांगा है।

पीठ ने कहा, ‘‘फैसले में आईपीसी की धारा 498ए के तहत गिरफ्तारी के लिए कुछ दिशानिर्देश तय किये गये थे जो विधायिका के अधिकार क्षेत्र की एक कवायद लगती है। हम इस विचार से सहमत नहीं हैं क्योंकि इससे महिलाओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।’’ पीठ एनजीओ ‘न्यायाधार’ की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की कुछ महिला अधिवक्ताओं ने यह संगठन बनाया था। इस याचिका में धारा 498 ए को धारदार बनाने की मांग की गयी थी और दावा किया गया था कि ऐसा नहीं होने पर पीड़ित महिलाओं का यह सहायक औजार कुंद हो गया है।

  • अपनी टिप्पणी पोस्ट करे ।
  • इस खण्ड में