22 Sep 2018, 18:39 HRS IST
  • जन सहयोग से चार साल में पिछले 60 वर्ष से ज्यादा सफाई हुई
    जन सहयोग से चार साल में पिछले 60 वर्ष से ज्यादा सफाई हुई
    शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होने से बच्चों में आत्मविश्वास की कमी
    शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होने से बच्चों में आत्मविश्वास की कमी
    ‘बड़ी आंधी’ महसूस कर सरकार के खिलाफ झूठ फैलाने, दुष्प्रचार करने में जुटा विपक्ष : मोदी
    ‘बड़ी आंधी’ महसूस कर सरकार के खिलाफ झूठ फैलाने, दुष्प्रचार करने में जुटा विपक्ष : मोदी
    2019 में जीत के बाद 50 साल तक पार्टी को कोई हराने वाला नहीं होगा :शाह
    2019 में जीत के बाद 50 साल तक पार्टी को कोई हराने वाला नहीं होगा :शाह
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम राष्ट्रीय
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
add
add
  • चार में से दूसरे यार दूधनाथ सिंह का निधन

  • विज्ञापन
  • [ - ] फ़ॉन्ट का आकार [ + ]
पीटीआई-भाषा संवाददाता 15:26 HRS IST

दूधनाथ सिंह नहीं रहे नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) हिन्दी कहानी जगत ‘‘चार यार’’ के नाम से मशहूर लेखकों में शामिल वरिष्ठ साहित्यकार दूधनाथ सिंह का आज निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे।

पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि दूधनाथ सिंह पिछले कुछ समय से बीमार थे। वह प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त थे। उनका निधन आज मध्य रात्रि के करीब इलाहबाद के एक निजी अस्पताल में हुआ। उनका अंतिम संस्कार आज इलाहाबाद में हुआ था। उनके पुत्र अनिमेश ठाकुर ने उन्हें मुखाग्नि दी। सिंह का जन्म 17 अक्टूबर 1936 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सोबंथा में हुआ। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, संस्मरण, कविता, आलोचना, संपादन आदि विधाओं में अपना रचनाकर्म किया।

हिन्दी कहानी में दूधनाथ सिंह ‘चार यार’ में शामिल थे। इसके अन्य तीन कहानीकार रवीन्द्र कालिया, ज्ञानरंजन और काशीनाथ सिंह हैं। कालिया का भी निधन हो चुका है।

दूधनाथ सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए किया और यहीं वह हिंदी के अध्यापक नियुक्त हुए। 1994 में सेवानिवृत्ति के बाद से लेखन और संगठन में निरंतर सक्रिय रहे। उनका अंतिम उपन्यास ‘आखिरी कलाम’ काफी चर्चित रहा। उनके अन्य उपन्यास ‘निष्कासन’ एवं ‘नमो अंधकारम्’ हैं।

उनके कहानी संग्रहों में ‘सपाट चेहरे वाला आदमी’, ‘सुखांत’, ‘प्रेमकथा का अंत न कोई’, ‘माई का शोकगीत’, ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’, ‘तू फू’, ‘जलमुर्गिर्यों का शिकार’ शामिल हैं। ‘अगली शताब्दी के नाम’, ‘एक और भी आदमी है’, ‘युवा खुशबू’, ‘सुरंग से लौटते हुए (लंबी कविता)’, ‘तुम्हारे लिए’, ‘एक अनाम कवि की कविताएँ’ उनके कविता संग्रह हैं। उन्होंने ‘यमगाथा’ नाम से एक नाटक लिखा था।

उन्होंने ‘निराला : आत्महंता आस्था’, ‘महादेवी’, ‘मुक्तिबोध : साहित्य में नई प्रवृत्तियाँ’ आदि आलोचना ग्रन्थ भी लिखे। सिंह को उत्तर प्रदेश के शीर्ष सम्मान भारत भारती से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें भारतेंदु सम्मान, शरद जोशी स्मृति सम्मान, कथाक्रम सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

  • अपनी टिप्पणी पोस्ट करे ।