22 Sep 2018, 18:47 HRS IST
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ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंस का 76 वर्ष की उम्र में निधन - फाइल फोटो पीटीआई
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  • ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में निधन

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 12:7 HRS IST

:स्टीवन हाकिंग के नाम में सुधार :

लंदन, 14 मार्च( भाषा) ब्रह्मांड की जटिल गुत्थियों को सुलझाने, ब्लैक होल और सिंगुलैरीटी तथा सापेक्षता के सिद्धांत के क्षेत्र में अपने अनुसंधान से महान योगदान देने वाले भौतिकीविद और ब्रह्मांड विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग का आज कैम्ब्रिज स्थित उनके आवास पर आज निधन हो गया। वह76 वर्ष के थे।

ब्रिटिश वैज्ञानिक हॉकिंग के बच्चों लुसी, रॉबर्ट और टिम ने एक बयान में कहा, ‘‘ हमें बहुत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे पिता का आज निधन हो गया।’’

बयान के मुताबिक, ‘‘ वह एक महान वैज्ञानिक और अद्भुत व्यक्ति थे जिनके कार्य और विरासत आने वाले लंबे समय तक जीवित रहेंगे। उनकी बुद्धिमतता और हास्य के साथ उनके साहस और दृढ़- प्रतिज्ञा ने पूरी दुनिया में लोगों को प्रेरित किया है।’’

उसमें कहा गया है, ‘‘ उन्होंने एक बार कहा था, अगर आपके प्रियजन ना हों तो ब्रह्मांड वैसा नहीं रहेगा जैसा है। हम उन्हें हमेशा याद करेंगे।’’

हॉकिंग का जन्म इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में आठ जनवरी, 1942 को हुआ। ठीक इसी दिन महान खगोलज्ञ गैलिलियो गैलीली की330 वीं पुण्यतिथि थी।

हॉकिंग को स्नायु संबंधी बीमारी( एम्योट्रॉपिक लेटरल स्लेरोसिसस) थी, जिसमें व्यक्ति कुछ ही वर्ष जीवित रह पाता है। उन्हें यह बीमारी21 वर्ष की आयु में1963 में हुई और शुरूआत में डॉक्टरों ने कहा कि वह कुछ ही वर्ष जीवित रह सकेंगे।

जुझारू हॉकिंग अपनी बीमारी का पता लगने के बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने चले गये और अल्बर्ट आइंस्टिन के बाद वह दुनिया के सबसे महान भौतिकीविद बने।

इस बीमारी के कारणहॉकिंग का शरीर लकवाग्रस्त हो गया था और उनका शरीर पूरी तरह से व्हीलचेयर पर सिमट कर रह गया था, लेकिन उनका दिमाग ब्रह्मांड की गुत्थियां सुलझाने में व्यस्त रहता।

यह महान वैज्ञानिक अपनी बीमारी के कारण सिर्फ एक हाथ की कुछ उंगलियां ही हिला सकते थे, बाकी का पूरा शरीर हिल नहीं पाता था। वह अपने रोजमर्रा के कार्यों नहाने, खाने, कपड़े पहनने और यहां तक कि बोलने के लिए भी लोगों और तकनीक पर निर्भर थे।

इन तमाम कठिनाई के बावजूद अपनी जिजिविशा और बोलने के अनोखे अंदाज ने हॉकिंग को दुनिया में प्रेरणा का स्रोत बना दिया।

हॉकिंग ने1970 में रॉजर पेनरोज के साथ मिलकर पूरे ब्रह्मांड पर ब्लैक होल के गणित को लागू किया और दिखाया कि कैसे हमारे निकट अतीत में एक सिंगुलैरिटी मौजूद थी। ब्रह्मांड के निर्माण का बिग- बैंग सिद्धांत यही है।

हॉकिंग को असली प्रसिद्धी उनकी पुस्तक‘ ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ से मिली। पुस्तक का पहला संस्करण1988 में प्रकाशित हुअ और लगातार237 सप्ताह तक संडे टाइम्स का बेस्ट सेलर रहने के कारण इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस में शामिल किया गया। इस पुस्तक की एक करोड़ प्रति बिकी हैं और40 अलग- अलग भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है।

हॉकिंग को अल्बर्ट आइंस्टिन पुरस्कार, वुल्फ पुरस्कार, कोप्ले मेडल और फंडामेंटल फिजिक्स पुरस्कार से नवाजा गया। हालांकि इस महान वैज्ञानिक को नोबेल सम्मान प्राप्त नहीं हुआ।

ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वर्ष2009 में हॉकिंग को अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान‘ प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम’ से नवाजा।

दुनिया के सबसे प्रसिद्ध भौतिकीविद और ब्रह्मांड विज्ञानी पर2014 में‘‘ थ्योरी ऑफ एवरीथिंग’’ नामक फिल्म भी बन चुकी है।

हॉकिंग ने एक बार कहा था, ‘‘ मैं दुनिया को दिखाना चाहता हूं कि शारीरिक विकलांगता लोगों को तब तक अक्षम नहीं बना सकती, जब तक वह खुद को ऐसा ना मान लें।’’

हॉकिंग की वेबसाइट के अनुसार उनके परिवार में तीन बच्चे और तीन नाती- पोते हैं।

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