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  • सिंधू को हराकर साइना ने जीता स्वर्ण, श्रीकांत को मिला रजत

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 12:27 HRS IST



.... पूनम मेहरा ....

गोल्ड कोस्ट, 15 अप्रैल (भाषा) साइना नेहवाल ने अपने आक्रामक खेल के सामने पी वी सिंधू की सारी कोशिशों को नाकाम करके आज यहां 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के आखिरी दिन महिला एकल का स्वर्ण पदक जीता लेकिन किदाम्बी श्रीकांत को पुरूष एकल तथा सात्विक रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरूष युगल में रजत पदक से संतोष करना पड़ा।



आज के मैच से पहले सिंधू पर 3-1 का रिकार्ड रखने वाली साइना ने फिर से अपनी हमवतन प्रतिद्वंद्वी पर अपना दबदबा साबित किया तथा एक घंटे तक चले मैच में 21-18, 23-21 से जीत दर्ज की।



इस जीत से साइना का वर्तमान राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार अभियान का भी अंत हुआ। उन्होंने भारत को इससे पहले टीम चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभायी थी। सिंधू की चोट के कारण उन्हें टीम स्पर्धा में प्रत्येक एकल मैच खेलना पड़ा था। इससे पहले साइना ने 2010 दिल्ली खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था।



पुरूष एकल में हालांकि विश्व के नंबर एक खिलाड़ी श्रीकांत मलेशियाई दिग्गज ली चोंग वेई से 19-21, 21-14, 21-14 से हार गये। ली का यह राष्ट्रमंडल खेलों के एकल में तीसरा स्वर्ण है। उनके नाम पर मिश्रित टीम के दो स्वर्ण पदक भी दर्ज हैं।



सात्विक और चिराग की जोड़ी भी पुरूष युगल में दूसरे स्थान पर रही। पहली बार इन खेलों में भाग ले रही यह भारतीय जोड़ी फाइनल में मार्कस एलिस और क्रिस लैंगरिज की रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता इंग्लिश जोड़ी से 13-21, 16-21 से हार गयी।



ओवरऑल भारत ने बैडमिंटन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उसने दो स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक सहित छह पदक जीते। ग्लास्गो और दिल्ली में भारतीय शटलर ने चार - चार पदक जीते थे।



दिन का मुख्य आकर्षण साइना और सिंधू का मैच रहा जिसमें विश्व की पूर्व नंबर एक खिलाड़ी ने अपना शानदार प्रदर्शन किया और खिताब जीता।



साइना को सिंधू के कुछ करारे स्मैश का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ सिंधू को भी साइना के नेट के शानदार खेल और आक्रामकता से जूझना पड़ा।



लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता ने पहले गेम में 9-4 की बढ़त बनायी। इसके बाद भी उन्होंने अंतर बनाये रखा और नेट के साथ साथ बेसलाइन पर भी अपनी पकड़ बना दी। दोनों खिलाड़ियों की अलग अलग शैली के कारण मैच रोमांचक बन गया था।



पहले गेम में एक क्षण ऐसा भी आया जब सिंधू को एक स्मैश को वापस करने के लिये घुटनों के बल झुकना पड़ा जबकि इसमें खास ताकत नहीं थी लेकिन साइना ने उसे बेहतरीन तरीके से बायें छोर पर खेला था।



साइना ने मैच के बाद कहा, ‘‘यह बराबरी का मुकाबला था यह मेरे लिये वास्तव में कड़ा था क्योंकि मैं पिछले 10-12 दिन से खेल रही थी। वह लंबे कद की है, उसके पांव लंबे हैं और मेरे से बेहतर कोर्ट को कवर करती है। मुझे इधर से उधर दौड़ना पड़ा।’’



दूसरी तरफ सिंधू ने इस हार को सामान्य तौर पर लिया।



उन्होंने कहा, ‘‘सब कुछ सही है इसलिए कोई बहाना नहीं है। मैंने अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किये। मेरे लिये यह अच्छा सप्ताह रहा। आज मेरा दिन नहीं था।’’



इसके बाद श्रीकांत कोर्ट पर उतरे जिन्होंने मिश्रित टीम चैंपियनशिप में ली को हराया था लेकिन विश्व का पूर्व नंबर एक खिलाड़ी आज यहां से जीत दर्ज करके बदला चुकता करने में सफल रहा।



भारतीय खिलाड़ी से लगभग दस साल बड़े ली ने अपना सर्वश्रेष्ठ आखिर गेम के लिये बचाया था। उन्होंने अपने शानदार रिफलेक्स का बेजोड़ नमूना पेश किया।



श्रीकांत ने बाद में कहा, ‘‘मैंने अच्छी शुरूआत की लेकिन मैंने रक्षण में काफी गलतियां की। मैंने उसे शुरू में बढ़त लेने दी। मुझे इससे बचना चाहिए था। ’’



उन्होंने कहा, ‘‘दूसरे और तीसरे गेम में उसने वास्तव में अच्छा खेल दिखाया। पहला गेम वास्तव में करीबी था। तीसरे गेम में मुझे उसे बढ़त हासिल नहीं करने देनी चाहिए थी। उसने बेहतर प्रदर्शन किया।’’



सात्विक और चिराग की कहानी भी इसी तरह की रही जिन्होंने पुरूष युगल में भारत को इन खेलों का पहला पदक दिया।

चिराग ने कहा, ‘‘हम बहुत निराश हैं। हमने जो रणनीति अपनायी थी, हम चाहते थे कि उसका परिणाम स्कोर बोर्ड पर भी दिखे लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाये जो कि थोड़ा निराशाजनक है। ’’

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