13 Nov 2018, 06:13 HRS IST
  • पटना: छठ पर्व के दौरान गंगा नदी किनारे पूजा करते श्रद्धालुगण
    पटना: छठ पर्व के दौरान गंगा नदी किनारे पूजा करते श्रद्धालुगण
    पटना: महापर्व छठ के ‘खरना पूजा’ के दौरान गंगा नदी में डूबकी लगाने के बाद सूर्य की पूजा करतीं महिलाएं
    पटना: महापर्व छठ के ‘खरना पूजा’ के दौरान गंगा नदी में डूबकी लगाने के बाद सूर्य की पूजा करतीं महिलाएं
    छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : मतदान करने जाते लोग
    छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : मतदान करने जाते लोग
    शक्तियों का अत्यधिक केंद्रीकरण भारत की प्रमुख समस्याओं में से एक- रघुराम राजन
    शक्तियों का अत्यधिक केंद्रीकरण भारत की प्रमुख समस्याओं में से एक- रघुराम राजन
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम राष्ट्रीय
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
add
add
  • कुष्ठ रोगियों पर सदियों से लगा ठप्पा खत्म करने की दिशा में न्यायालय के निर्देश

  • विज्ञापन
  • [ - ] फ़ॉन्ट का आकार [ + ]
पीटीआई-भाषा संवाददाता 19:19 HRS IST



नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) सदियों से कुष्ठ रोगियों पर लगा ठप्पा दूर करने के इरादे से उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि इस वर्ग के लोगों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र देने के लिये अलग से नियम बनाने पर विचार करे ताकि ये भी आरक्षण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

शीर्ष अदालत ने कहा कि समाज में कुष्ठ रोगियों की स्वीकार्यता उन पर इस बीमारी को लेकर लगा ठप्पा दूर करने में बड़ी मदद करेगी । न्यायालय ने केन्द्र और राज्य सरकारों को इसके लिये बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने एक जनहित याचिका पर अपने फैसले में कहा कि कुष्ठ रोग प्रभावित व्यक्तियों के लिये अंत्योदय अन्न योजना और इसी तरह की दूसरी योजनाओं के तहत लाभ सुनिश्चित करने हेतु उन्हें गरीबी की रेखा से नीचे के कार्ड देने पर विशेष ध्यान दिया जाये ताकि वे भोजन का अपना अधिकार प्राप्त कर सकें।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकारों को कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिये सामुदायिक आधार पर पुनर्वास योजना तैयार करनी चाहिए जो ऐसे व्यक्तियों और उनके परिवारों की सभी बुनियादी सुविधाओं और जरूरतों को पूरा करे। इस योजना का लक्ष्य कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के साथ लगा ठप्पा खत्म करने का होना चाहिए।

पीठ ने केन्द्र सरकार को दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित कानून के तहत प्रदत्त अधिकारों के इस्तेमाल के लिये कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों को प्रमाण पत्र जारी करने हेतु उनकी दिव्यांगता का आकलन करने के बारे में अलग से नियम बनाने पर विचार करना चाहिए।

यही नहीं, न्यायालय ने कहा कि जागरूकता अभियान में यह बताना चाहिए कि कुष्ठरोग से प्रभावित व्यक्ति को किसी विनिर्दिष्ट क्लीनिक, अस्पताल या स्वास्थ्य केन्द्र में भेजने की आवश्यकता नहीं है और उन्हें परिवार के सदस्यों या समुदाय से अलग थलग नहीं करना चाहिए।

जागरूकता अभियान में जनता को यह भी बताना चाहिए कि इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति सामान्य वैवाहिक जीवन जी सकता है और सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ ही सामान्य लोगों की तरह काम पर या स्कूल जा सकता है।

इसी तरह, पीठ ने केन्द्र और राज्यों से कहा है कि कुष्ठ रोग के बारे में सही जानकारी देने के लिये कुष्ठ शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की संभावना पर विचार करना चाहिए।

पीठ ने कहा कि निजी और सरकारी अस्पतालों के मेडिकल स्टाफ को संवेदनशील बनाया जाये ताकि कुष्ठ रोगियों को किसी प्रकार के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े।

इसी तरह, न्यायालय ने केन्द्र और राज्य सरकारों को नियम तैयार करने का निर्देश दिया है ताकि कुष्ठरोग से प्रभावित परिवारों के बच्चों के साथ निजी और सरकारी स्कूलों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं हो।

शीर्ष अदालत ने पांच जुलाई को केन्द्र सरकार को देश से कुष्ठ रोग का उन्मूलन सुनिश्चित करने के लिये व्यापक कार्य योजना पेश करने का निर्देश देते कहा था कि साध्य बीमारी को लोगों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

न्यायालय ने अधिवक्ता पंकज सिन्हा की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिये। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुष्ठ रोग के उन्मूलन की दिशा में सरकार पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।

सिन्हा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि हर साल देश में करीब सवा लाख लोग कुष्ठ रोग से प्रभावित होते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि 1981 से ही देश में इस बीमारी का मेडिकल इलाज उपलब्ध होने के बावजूद सरकार अभी भी इसे समूल खत्म करने में असफल रहीं है।

केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा था कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है और सरकार इस पर कोई विरोधात्मक दृष्टिकोण नहीं अपना रही है।

  • अपनी टिप्पणी पोस्ट करे ।