21 Sep 2018, 03:20 HRS IST
  • जन सहयोग से चार साल में पिछले 60 वर्ष से ज्यादा सफाई हुई
    जन सहयोग से चार साल में पिछले 60 वर्ष से ज्यादा सफाई हुई
    शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होने से बच्चों में आत्मविश्वास की कमी
    शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होने से बच्चों में आत्मविश्वास की कमी
    ‘बड़ी आंधी’ महसूस कर सरकार के खिलाफ झूठ फैलाने, दुष्प्रचार करने में जुटा विपक्ष : मोदी
    ‘बड़ी आंधी’ महसूस कर सरकार के खिलाफ झूठ फैलाने, दुष्प्रचार करने में जुटा विपक्ष : मोदी
    2019 में जीत के बाद 50 साल तक पार्टी को कोई हराने वाला नहीं होगा :शाह
    2019 में जीत के बाद 50 साल तक पार्टी को कोई हराने वाला नहीं होगा :शाह
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम राष्ट्रीय
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
add
add
  • न्यायालय ने अपने फैसले में किया सुधार, दहेज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी से संरक्षण खत्म किया

  • विज्ञापन
  • [ - ] फ़ॉन्ट का आकार [ + ]
पीटीआई-भाषा संवाददाता 22:32 HRS IST

नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अपने एक पुराने आदेश में संशोधन करते हुए दहेज उत्पीड़न के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी से संरक्षण खत्म कर दिया। शीर्ष अदालत ने अपने उस पुराने आदेश में पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले विवाहित महिलाओं की शिकायत की जांच के लिए एक समिति का गठन करने को कहा था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हर जिले में परिवार कल्याण समितियां गठित करने और उन्हें शक्ति प्रदान करने का निर्देश ‘‘कानूनी ढांचे के अनुरूप नहीं’’ था।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि अदालतों के पास अग्रिम जमानत नाम से प्रसिद्ध गिरफ्तारी पूर्व जमानत देने और यहां तक कि कानूनी संतुलन बनाने के लिए आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह से निरस्त करने की पर्याप्त शक्ति है क्योंकि कोई भी अदालत दोनों लिंगों के बीच टकराव के बारे में नहीं सोच सकती।

पीठ ने अपने उस पिछले फैसले के निर्देश में भी संशोधन किया जिसमें यह निर्देश दिया गया कि अगर किसी वैवाहिक विवाद के पक्षों के बीच समझौता होता है तो निचली अदालत के न्यायाधीश आपराधिक मामले को बंद कर सकते हैं।

अदालत ने पिछले साल जुलाई में हर जिले में उस परिवार कल्याण समितियों के गठन का निर्देश दिया था जो पुलिस या मजिस्ट्रेट द्वारा प्राप्त दहेज उत्पीड़न के आरोपेां का सत्यापन करेगी। अदालत ने तब कहा था कि समिति की रिपोर्ट आने पर ही किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी होगी।

पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर वैधानिक प्रावधान और फैसले पहले मौजूद हैं और इसलिए परिवार कल्याण समितियों के गठन और उन्हें शक्ति देने के निर्देश ‘‘गलत’’ हैं और यह ‘‘वैधानिक ढांचे के अनुरूप नहीं’’ है।

पिछले साल जुलाई में दो न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि भादंसं की धारा 498 ए और इससे जुड़े अन्य अपराधों के तहत शिकायतों की जांच क्षेत्र के एक विशेष जांच अधिकारी द्वारा हो सकती है।

  • अपनी टिप्पणी पोस्ट करे ।