21 Nov 2018, 01:22 HRS IST
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  • दिवाली के पटाखों से हवा में घुला जहर

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 22:10 HRS IST



नयी दिल्ली, लखनऊ, आठ नवंबर (भाषा) दीपावली पर उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करके पटाखे चलाए जाने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार की सुबह राजधानी दिल्ली की हवा बेहद जहरीली हो गयी ।

दीवाली के बाद पहली सुबह में देश के कई भागों में जहरीली धुंध छाई रही और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तथा एनसीआर में प्रदूषण ‘‘गंभीर ’’ स्तर को पार कर ‘‘बेहद गंभीर और ‘‘आपात ’’स्तर तक पहुंच गया।

कानून और इसके क्रियान्वयन को लेकर भारी अंतर के बीच, आकाश में धुएं के बादल छाए रहे और विशेषकर दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में इस साल की हवा की सबसे खराब गुणवत्ता दर्ज की गई।।

अधिकारियों ने कहा कि पटाखों, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने और मौसम की स्थानीय स्थितियों के जहरीले मिश्रण के कारण राष्ट्रीय राजधानी और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर ‘‘अत्यंत गंभीर और आपातकालीन’’ (सीवियर प्लस एमरजेंसी) श्रेणी में प्रवेश कर गया जो अनुमति की सीमा से दस गुना अधिक है।

उच्चतम न्यायालय ने देशभर में ‘‘पर्यावरण अनुकूल’’ पटाखों की बिक्री और निर्माण की अनुमति दी थी और आतिशबाजी के लिए दो घंटे का समय तय किया था।

हालांकि आदेश का उल्लंघन करते हुए लोगों ने रात आठ से दस बजे तक की समयसीमा के दो घंटे बाद मध्यरात्रि तक तथा गुरुवार को सुबह पटाखे चलाए।

केंद्र द्वारा संचालित सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक, पटाखों से पैदा हुए धुएं सहित अन्य कारणों से दिल्ली में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 642 तक पहुंचा जो ‘‘अत्यंत गंभीर और आपातकालीन’’ श्रेणी में आता है। समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक अनुमति योग्य सीमा से 11 गुना अधिक दर्ज किया गया।

दिवाली के बाद दिल्ली का प्रदूषण स्तर पिछले साल की तुलना में करीब दो गुना रहा। बृहस्पतिवार को एक्यूआई 642 के आंकड़े पर दर्ज किया गया जबकि वर्ष 2017 में (दिवाली के अगले दिन) एक्यूआई 367 पर जबकि 2016 में 425 पर दर्ज किया गया था।

वायु गुणवत्ता के इस श्रेणी में पहुंचने का मतलब यह है कि इस जहरीली हवा में ज्यादा देर तक रहने से स्वस्थ लोगों को भी सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। यह हवा बीमार व्यक्तियों को तो गंभीर रूप से प्रभावित करेगी ही।

शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’ माना जाता है, 51 और 100 के बीच इसे ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’ माना जाता है, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘काफी खराब’ और 401 और 500 के बीच इसे ‘अत्यंत गंभीर’ माना जाता है।

शीर्ष अदालत के निर्देश का उल्लंघन मुंबई, कोलकाता, जयपुर, चंडीगढ़ तथा अन्य शहरों में भी हुआ।

‘सफर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता अगले दो दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में रहने का अनुमान है क्योंकि पटाखों से निकले धुएं ने प्रदूषकों के छितराने की प्रक्रिया धीमी कर दी है।

दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने गुरुवार को रात 11 बजे से 11 नवंबर को रात 11 बजे तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकार ने कहा कि वह स्थिति पर गौर कर रहा है और अगर प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तो आपातकालीन उपाय किये जाएंगे। इन उपायों में निजी वाहनों के लिए ‘सम-विषम’ योजना शामिल है।

शोध समूह ‘अर्बन एमीशन्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में दिवाली पर उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बावजूद करीब 50 लाख किलोग्राम पटाखे जलाए जाने का अनुमान है। पिछले साल भी लगभग इतने ही पटाखे चले थे। इतने पटाखे पीएम 2.5 के द्रव्यमान के डेढ लाख किलोग्राम बराबर हैं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और राज्य के अन्य शहरों में मध्यरात्रि के बाद भी पटाखे चलते रहे जिससे एक्यूआई आंकड़ा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा।

बड़ी मात्रा में पटाखे चलाए जाने के कारण लखनऊ और इसके आस पास के जिलों में धुएं की मोटी चादर छायी रही।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के कई भागों में भी स्थिति लगभग ऐसी ही रही और एक्यूआई ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा।

दिवाली में मध्यरात्रि तक कोलकाता में पटाखे चलाने पर 93 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।

राजस्थान राज्य की स्थिति भी लगभग ऐसी ही रही। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, जयपुर में पीएम 2.5 और पीएम 10 मानक क्रमश: 330 और 205 रहे।

मुंबई में भी इस साल दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण का स्तर बहुत ऊंचा रहा।

उधर, तमिलनाडु में पुलिस ने दो घंटे की समयसीमा से बाहर पटाखे चलाने के करीब 2190 मामले दर्ज किये।

पुलिस ने कहा कि हालांकि किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई क्योंकि अपराध जमानती प्रकृति का है।

एनजीओ ‘आवाज फाउंडेशन’ की सुमैरा अब्दुलाली ने कहा, ‘‘कुछ जगहों पर ध्वनि का स्तर 114.1 डेसीबल रहा जबकि आवासीय इलाकों में ध्वनि की अनुमति सीमा 55 डेसीबल होती है।’’

पर्यावरण संबंधी मामलों के वकील और विशेषज्ञ एम सी मेहता ने कहा कि दिल्ली में पटाखे चलना शीर्ष अदालत के निर्देशों की नाकामी नहीं बल्कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नाकामी है।

ट्विटर पर मास्क पहने लोगों द्वारा पटाखे चलाने की तस्वीरें साझा की गईं और शीर्ष अदालत के निर्देश की ‘‘सामूहिक अवमानना’’ की निंदा की गई।

एक कारपोरेट वकील आदित्य पेरिवाल ने कहा, ‘‘दिल्ली में अब कोई किसान पराली नहीं जला रहा है। उन्हें जिम्मेदार मत ठहराइए। दिल्लीवालों, आपको जो मिला आप उसके हकदार हैं। प्रदूषण का स्तर तीन घंटे में 120 से 999 पहुंच गया। अदालत की खुलेआम अवमानना। लेकिन यह आश्चर्यचकित करने वाला नहीं, आखिरकार यह दिल्ली है।’’

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