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  • सीजेआई ने 30 दिन में कॉलेजियम की छह बैठकें की

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 21:58 HRS IST



नयी दिल्ली, नौ नवम्बर (भाषा) प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने एक महीने से कुछ अधिक समय पहले पद संभालने के बाद से कॉलेजियम की छह महत्वपूर्ण बैठकें की हैं ताकि उच्च न्यायालय में 29 और उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों के चार खाली पदों को भरा जा सके।



कॉलेजियम ने इसके साथ ही उसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति बम्बई और कलकत्ता उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश के तौर पर करने के लिए प्रक्रिया ज्ञापन के प्रावधान का इस्तेमाल करने से भी परहेज नहीं किया।



सीजेआई गोगोई नीत कॉलेजियम में न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस ए बोबडे ने 30 अक्टूबर को मध्य प्रदेश, पटना, गुजरात और त्रिपुरा उच्च न्यायालयों के चार मुख्य न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत करने की सिफारिश की और सरकार ने उनके नामों को 48 घंटे के भीतर मंजूरी प्रदान कर दी। इससे एक तरह का इतिहास बन गया।



न्यायमूर्ति गोगोई ने गत तीन अक्टूबर को न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की जगह सीजेआई बने थे और उनका कार्यकाल 17 नवम्बर 2019 तक होगा।



कॉलेजियम ने गत नौ अक्टूबर को प्रक्रिया ज्ञापन के विरले ही इस्तेमाल होने वाले प्रावधान का इस्तेमाल किया जो किसी न्यायाधीश को उसके अपने ही उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के तौर पर प्रोन्नत करने का प्रावधान करता है, यदि उसकी सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम का समय बचा है।



उच्च न्यायालय के लिए तीन न्यायाधीशों के कॉलेजियम (सीजेआई, न्यायमूर्ति लोकुर और न्यायमूर्ति जोसेफ) ने न्यायमूर्ति डी के गुप्ता और न्यायमूर्ति एन एच पाटिल को क्रमश: कलकत्ता उच्च न्यायालय और बम्बई उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।



न्यायमूर्ति गुप्ता दिसम्बर 2018 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं जबकि न्यायमूर्ति पाटिल अप्रैल 2019 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।



पहली कॉलेजियम बैठक की अध्यक्षता सीजेआई द्वारा नौ अक्टूबर को की गई थी जिसमें सात न्यायिक अधिकारियों को कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त करने की सिफारिश करने का निर्णय किया गया, पांच न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को केरल उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनाने की सिफारिश करने, मद्रास उच्च न्यायालय के तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।



उसी दिन पांच न्यायाधीशों...विजय कुमार बिष्ट, डी के गुप्ता, ए एस बोपन्ना, रमेश रंगनाथन और एन एच पाटिल के नामों को कॉलेजियम द्वारा सिक्किम, कलकत्ता, गौहाटी, उत्तराखंड और बम्बई उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के तौर पर हरी झंडी दी गई।



सीजेआई गोगोई के नेतृत्व में कॉलेजियम की दूसरी बैठक 24 अक्टूबर को हुर्ई जिसमें उसने गौहाटी उच्च न्यायालय के सात अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश बनाया और तीन न्यायिक अधिकारियों को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के लिए न्यायाधीश के तौर पर प्रोन्नत किया।



उसी दिन कॉलेजियम ने एक न्यायिक अधिकारी सुवरा घोष के नाम को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तौर हरी झंडी दी जबकि एक अन्य अधिकारी रवींद्रनाथ सामंत की प्रोन्नति का प्रस्ताव टाल दिया।



उक्त कॉलेजियम में न्यायमूर्ति लोकुर और न्यायमूर्ति जोसेफ भी थे। कॉलेजियम ने उसी दिन ललित बत्रा और अरूण कुमार त्यागी (दोनों न्यायिक अधिकारी) को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर सिफारिश की। हालांकि, उसने न्यायिक अधिकारियों नीना चौधरी और बिधू भूषण पाठक के नामों को हरी झंडी नहीं दी और प्रस्ताव क्रमश: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को वापस भेज दिये।



29 अक्टूबर को अपनी तीसरी बैठक में सीजेआई, न्यायमूर्ति लोकुर, न्यायमूर्ति जोसेफ, न्यायमूर्ति सीकरी और न्यायमूर्ति बोबडे वाले कॉलेजियम ने 11 न्यायाधीशों का स्थानांतरण एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में किया।

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