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  • खदान मजदूर: चमत्कार में विश्वास करना होगा: केन्द्र ने न्यायालय से कहा

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 18:57 HRS IST



नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) केन्द्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि उसे चमत्कार में विश्वास करना होगा और देखना होगा यदि करीब एक महीने से मेघालय में एक गैरकानूनी कोयला खदान में फंसे 15 मजदूर जीवित बाहर निकल आयें।

केन्द्र ने कहा कि सरकार इन मजदूरों की जिंदगी बचाने के भरसक प्रयास कर रही है और इस काम में भारतीय नौसेना के अलावा भारतीय वायु सेना के विमानों और हेलीकाप्टरों की भी मदद ली जा रही है।

न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘‘हमें चमत्कार में विश्वास करना होगा।’’ पीठ ने टिप्पणी की कि यह स्पष्ट नहीं है कि ये मजदूर अभी भी जीवित हैं।

पीठ ने मेहता से कहा, ‘‘इस बारे में कोई विवाद नहीं है कि आप प्रयास कर रहे हैं। क्या वे (मजदूर) आज भी जीवित हैं, हमे मालूम नहीं है। हो सकता है कि कोई जीवित हो। आपको उन्हें बाहर निकालना है। आपको अपने प्रयास जारी रखने होंगे।’’

शीर्ष अदालत ने इस खदान में पिछले साल 13 दिसंबर से फंसे 15 मजदूरों को बचाने के लिये दायर आदित्य एन प्रसाद की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं

केन्द्र और मेघालय सरकार ने इन मजदूरों को बचाने के लिये अब तक किये गये प्रयासों से न्यायालय को अवगत कराया।

पीठ ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि क्या मेघालय में इस तरह की गैरकानूनी खनन गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी है।

राज्य सरकार के वकील ने बताया कि इस गैरकानूनी खदान का संचालन करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है।

उन्होने कहा कि नौसेना ने रिमोट चालित वाहनों को राहत कार्य में तैनात किया है परंतु पास की नदियों से हो रहा रिसाव बचाव अभियान में बाधा पैदा कर रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि प्राधिकारियों के प्रयासों से वह संतुष्ट हैं परंतु बचाव कार्य के बारे जुटी एजेन्सियों के बीत तारतम्य का अभाव है।

उन्होंने कहा कि खदान का कोई नक्शा नहीं है क्योंकि यह गैरकानूनी है परंतु भारत में ऐसे उपकरण उपलब्ध हैं जो गहरे पानी में जाकर घटनास्थल की वस्तुस्थिति का पता लगा सकते हैं।



ग्रोवर ने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भूगर्भीय अनुसंधान संस्थान, रूड़की स्थित राष्ट्रीय हाइड्रोलिक संस्था तथा कुछ अन्य निजी संस्थाओं के पास इस तरह की सुविधायें होने का जिक्र किया।

इस पर, तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने इन संस्थाओं से मदद के लिये संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि ग्रोवर के सुझावों पर भी गौरा किया जायेगा और हर संभव कदम उठाये जायेंगे।

पीठ ने इसके बाद याचिका पर सुनवाई 18 जनवरी के लिये स्थगित कर दी।

इससे पहले, मेघालय सरकार ने न्यायालय को सूचित किया कि पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में एक गैरकानूनी कोयला खदान में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिये नौसेना ने पांच रिमोट चालित वाहनों को काम में लगाया है। राज्य सरकार के अनुसार इस गैरकानूनी खदान से अभी तक एक करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला गया है।

इससे पहले, केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल ने न्यायालय को बताया था कि बचाव और राहत कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के 71 सदस्यों के साथ ही राज्य आपदा मोचन बल के 20, नौसेना के 16 कार्मिक और ओडिशा अग्निशमन तथा कोल इंडिया लि सहित अन्य लोग लगातार बचाव कार्य में लगे हुये हैं।

राज्य सरकार का कहना था कि पास ही बहने वाली एक नदी का पानी इस खदान में घुस रहा है और यह कम से कम 20 दूसरी खदानों से परस्पर जुड़ी हुयी है।

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