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  • सामाजिक सेवा, कृषि क्षेत्र में कृत्रिम मेधा के इस्तेमाल की संभावनाएं देखने को कहा नीति आयोग ने

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 20:20 HRS IST

नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) नीति आयोग ने केंद्रीय मंत्रालयों तथा राज्य सरकारों को उन मुख्य परियोजनाओं की पहचान करने को कहा है जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कृषि जैसे क्षेत्रों की समस्याओं का हल निकालने के लिये कृत्रिम मेधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

नीति आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार, कृत्रिम मेधा में वर्ष 2030 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 15,700 अरब डॉलर का योगदान देने की क्षमता है। यह अभी की तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के दौर में सबसे बड़ा वाणिज्यिक अवसर है।

आयोग के अनुसार, कृत्रिम मेधा को अपनाने से 2035 तक देश की जीडीपी में 957 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान मिल सकता है तथा यह 2035 तक जीडीपी वृद्धि को 1.30 प्रतिशत तेज कर सकता है।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने राज्यों एवं केंद्रीय मंत्रालयों को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘मैं आपसे उन मुख्य परियोजनाओं की पहचान करने का अनुरोध करता हूं जिनमें कृत्रिम मेधा के अपनाने से स्वास्थ्य क्षेत्र को प्रभावित कर रही समस्याओं को दूर किया जा सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नीति आयोग के पास एक टीम है जो कृत्रिम मेधा कार्यक्रम पर काम करती है। मैं आवश्यक मदद मुहैया कराने में मदद की पेशकश करता हूं।’’



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