16 Oct 2019, 08:25 HRS IST
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  • न्यायालय का उन्नाव बलात्कार पीड़ित और परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्रगति रिपोर्ट मंगाने से इंकार

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 16:28 HRS IST

नयी दिल्ली, 13 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव बलात्कार पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ लंबित 20 मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार को प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने से मंगलवार को इंकार कर दिया।

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने कहा कि वे मामले का दायरा बढ़ाने और राज्य में उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं।

इस मामले में पेश एक अधिवक्ता ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि चार मामलों में, जिन्हें दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया है, विशेष अदालत दैनिक आधार पर सुनवाई कर रही है।

पीठ ने कहा कि वह उन्नाव मामले में अब 19 अगस्त को सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत ने बलात्कार पीड़ित से संबंधित चार आपराधिक मामले उप्र की अदालत से दिल्ली स्थानांतरित कर दिये थे। इनमें 2017 का बलात्कार कांड, पीड़ित के पिता के खिलाफ शस्त्र कानून के तहत फर्जी मामला, उनकी पुलिस हिरासत में मौत और महिला से सामूहिक बलात्कार का मामला शामिल है। न्यायालय ने इन मामलों की सुनवाई रोजाना करके इसे 45 दिन में पूरा करने का निर्देश अदालत को दिया है।

तीस हजारी जिला अदालत में जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा की अदालत में इस मामले के मुकदमे की सुनवाई रोजाना हो रही है।

इस महिला के साथ 2017 में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने कथित रूप से उस समय बलात्कार किया था जब वह नाबालिग थी। इस महिला की कार को रायबरेली के निकट एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इस टक्कर में वह और उसका वकील बुरी तरह जख्मी हो गये थे जबकि परिवार के दो सदस्यों की इस हादसे में मौत हो गयी थी।

जिला अदालत ने सेंगर और अन्य के खिलाफ बलात्कार के आरोपों के साथ ही पीड़ित के पिता को सशस्त्र कानून के तहत फर्जी मामले में फंसाने और पुलिस हिरासत में उनसे मारपीट करने और हत्या करने के मामले में भी आरोप निर्धारित किये हैं।

शीर्ष अदालत के आदेश के बाद बलात्कार पीड़ित को लखनऊ से दिल्ली स्थित एम्स में स्थानांतरित किया गया है जहां उसका इलाज चल रहा है।

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