16 Oct 2019, 08:5 HRS IST
  • मामल्लापुरम: भारत और चीन के बीच वार्ता का दृश्य
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    नयी दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग के 14वें वार्षिक सम्मेलन में बोलते गृह मंत्री अमित शाह
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    मामल्लापुरम:चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के स्वागत में प्रस्तुति देते कलाकार
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    मामल्लापुरम में सुबह का सैर करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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  • मोदी-शी की दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता को लेकर उत्साहित है चीन

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 20:28 HRS IST

बीजिंग, नौ अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता से पहले चीन ने बुधवार को अत्यंत सकारात्मक अंदाज में कहा कि यह मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को दिशा प्रदान करेगी तथा क्षेत्रीय मामलों में साझा भूमिका तय करेगी ताकि ‘ड्रैगन और हाथी’ मिलकर काम कर सकें।

चेन्नई के निकट मामल्लपुरम में 11-12 अक्टूबर को होने वाली शिखर वार्ता के लिए शी की यात्रा की घोषणा करते हुए उप विदेश मंत्री लुओ झाओहुई ने कहा कि दोनों नेता वैश्विक तथा क्षेत्रीय विषयों पर विस्तार से विमर्श करेंगे।

हाल ही में भारत में चीन के राजदूत रह चुके लुओ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में राष्ट्रपति चिनफिंग के साथ बातचीत की जानकारी देते हुए मीडिया ब्रीफिंग की।

यह मोदी और चिनफिंग की दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता है। पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता चीन के वुहान में अप्रैल 2018 में हुई थी। उसके कुछ महीने पहले ही डोकलाम में दोनों देशों की सेनाओं के बीच 73 दिनों तक गतिरोध रहा था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर मुद्दे का समाधान पाकिस्तान और भारत के बीच होना चाहिए। चीन ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में अपने हालिया विचारों में महत्वपूर्ण तरीके से बदलाव किया है।

चिनफिंग-मोदी की शिखर वार्ता को चीन द्वारा दिये जा रहे महत्व को रेखांकित करते हुए लुओ ने कहा, ‘‘वुहान शिखर वार्ता के दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल मजबूती से दिखा। दोनों नेताओं की निजी प्रतिबद्धता के बिना इस तरह की अनौपचारिक बैठक संभव नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए उनका चेन्नई में गहन बातचीत के लिए साथ में बैठने और वैश्विक तथा क्षेत्रीय मामलों पर बातचीत करने से द्विपक्षीय संबंधों तथा दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को मदद मिलेगी ताकि ड्रैगन और हाथी मिलकर काम कर सकें।’’

लुओ ने कहा कि उनकी मुलाकात के क्षेत्रीय तथा वैश्विक विकास एवं स्थिरता पर दूरगामी सकारात्मक प्रभाव होंगे।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के अधिकारियों ने करीबी तालमेल के साथ शिखर वार्ता के लिए अत्यधिक तैयारियां की हैं।

लुओ ने कहा, ‘‘ठोस आधार तैयार कर लिया गया है। दोनों पक्षों के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रपति शी की भारत यात्रा पूरी तरह सफल होगी और द्विपक्षीय संबंधों की आगे प्रगति की दिशा तय करेगी। इससे दोनों पक्षों के बीच सहयोग के आदान-प्रदान में नयी प्रगति होगी तथा सकारात्मक परिणाम निकलेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह मुलाकात पूरी दुनिया को चीन और भारत का यह सुसंगत संदेश एक बार फिर भेजेगी तथा अनिश्चितता से भरी दुनिया में स्थिरता एवं सकारात्मक ऊर्जा भरेगी।’’

लुओ ने कहा कि मामल्लपुरम में वे अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के सुधार, क्षेत्रीय मामलों में साझा जिम्मेदारी तथा भूमिका पर अपने साझा नजरिये पर आम-सहमति पर पहुंचेंगे।

लुओ ने अरुणाचल प्रदेश में भारत के हिम विजय सैन्य अभ्यास को लेकर चीन की चिंताओं को भी खारिज कर दिया।

क्या चीन इस बात से चिंतित है कि यह अभ्यास शिखर वार्ता को प्रभावित करेगा, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘हमें इतनी सी भी चिंता नहीं है क्योंकि यह सच नहीं है।’’

हालांकि, उन्होंने अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान तथा अफ्रीका के लिए साझा रणनीति विकसित करने के लिहाज से भारत-चीन प्लस फॉर्मूला में चीन के हित को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘वुहान की बातचीत में हुई सहमतियों में से एक चीन-भारत प्लस सहयोग को बढ़ाना है क्योंकि चीन और भारत पड़ोसी हैं जो एक दूसरे से दूरी नहीं बना सकते।’’

लुओ ने कहा, ‘‘दोनों बड़े देश हैं और अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर उनका सहयोग क्षेत्र तथा दुनिया में स्थिरता एवं विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।’’

अफगानिस्तान के राजनयिकों को प्रशिक्षित करने के भारत और चीन के पहले के एक समझौते का जिक्र करते हुए लुओ ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि चीन-भारत प्लस सहयोग न केवल अफगानिस्तान तक सीमित है। हमें उम्मीद है कि चीन-भारत प्लस सहयोग का विस्तार नेपाल तक होगा। हमें उम्मीद है कि सहयोग का विस्तार भूटान तक होगा।’’

चीन की बेल्ट और रोड इनीशियेटिव (बीआरआई) पर भारत की आपत्ति पर सीधी प्रतिक्रिया नहीं देते हुए उन्होंने कहा कि चीन ने बीआरआई को आगे बढ़ाया है जो चीन द्वारा दुनिया को मुहैया कराई जा रही प्रमुख सार्वजनिक सुविधा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि दोनों देश बांग्लादेश, चीन, भारत और म्यामां (बीसीआईएम) समेत संपर्क सहयोग को और बढ़ा सकते हैं।’’

लुओ ने कहा कि यह एक अनौपचारिक बातचीत है, इसलिए दोनों नेताओं को बिना किसी निर्धारित विषय के विचारों के मुक्त आदान-प्रदान के लिए सहज माहौल मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह चीनी और भारतीय नेताओं के बीच विचार विनिमय का नया तरीका है। यह बहुत प्रभावी साबित हुआ है।’’

हालांकि, दोनों पक्षों के बीच किसी तरह के करार की योजना के सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

लुओ ने कहा कि पिछले साल में द्विपक्षीय रिश्तों में नयी प्रगति हुई है जो वुहान वार्ता के महत्व को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘सीमा क्षेत्रों में शांति बनी हुई है और यह साबित हो गया है कि आपसी लाभकारी सहयोग दोनों पक्षों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।’’

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