09 Aug 2020, 19:43 HRS IST
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  • मनमोहन ने गुरुदास गुप्ता को श्रद्धांजलि दी

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 21:35 HRS IST

नयी दिल्ली, 18 नवंबर (भाषा) पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भाकपा नेता गुरुदास गुप्ता को सोमवार को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ट्रेड यूनियन नेता ने विरोधियों के साथ अपने संबंधों को खुला रखा और टकराव के बजाए हमेशा सहमति बनाने पर जोर दिया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की ओर से वाम नेता की याद में आयोजित सभा में सिंह ने कहा कि दासगुप्ता प्रतिबद्ध राष्ट्रवादी थे, जो संविधान और उसके गणतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित थे।

वाम दलों में दासगुप्ता संभवत: सिंह के सबसे मुखर आलोचक थे। उनका पिछले महीने कोलकाता में निधन हो गया था।

वह 2 जी पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य थे और पहले वाम नेता थे जिन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर ‘कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही’ बरतने का आरोप लगाया था और पी सी चाको की अगुवाई वाली समिति की रिपोर्ट पर लंबा असहमति नोट दिया था। चाको नीत समिति ने सरकार के अनुकूल रिपोर्ट दी थी।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह दासगुप्ता से लंबे अरसे से परिचित थे। हम अलग-अलग विचारधाराओं से संबंधित थे लेकिन फिर भी दिवंगत वाम नेता ने उन्हें प्रतिबद्ध राष्ट्रवादी तथा संविधान और उसके गणतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित व्यक्ति के तौर पर प्रभावित किया है।

सिंह ने कहा कि अपनी असाधारण भाषण कला के जरिए दासगुप्ता गरीब और श्रमिक वर्ग के सामने पेश आ रही समस्याओं को बेहतर ढंग से रख पाते थे। जब वह बोलते थे तो विपक्ष और सत्ता पक्ष के लोग बहुत ध्यान से उन्हें सुनते थे।

पूर्व प्रधानमंत्री ने दासगुप्ता को देश में ट्रेड यूनियन आंदोलन का ‘अगुआ’ बताया।

दासगुप्ता तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे और दो और बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

लोकतांत्रिक जनता दल के प्रमुख शरद यादव ने उन्हें ‘धीर गंभीर लेकिन जोशीला वक्ता’ बताते हुए कहा कि वह आम लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दे पर ‘बेचैन’ हो जाते थे।

यादव ने कहा, ‘‘ वह एक गंभीर व्यक्ति थे जिनकी आज के समय में काफी कमी खलेगी।’’

सिंह ने कहा, ‘‘ अपनी पार्टी के सहयोगियों के विपरीत दासगुप्ता ने विरोधियों के साथ अपने संबंधों को खुला रखा और संसद में समन्वय के लिए किसी भी विपक्षी नेता से मिलने से हिचकते नहीं थे।’’

दासगुप्ता का 31 अक्टूबर को निधन हो गया था।

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