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  • कार्यकाल से जुड़े नियम में ढिलाई के लिए उच्चतम न्यायालय की स्वीकृति लेगा बीसीसीआई

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 18:16 HRS IST

मुंबई, एक दिसंबर (भाषा) सौरव गांगुली की अगुवाई वाले बीसीसीआई ने रविवार को उसके पदाधिकारियों के कार्यकाल को सीमित करने वाले प्रशासनिक सुधारों में ढिलाई देने के लिए उच्चतम न्यायालय की स्वीकृति लेने का फैसला किया और साथ ही आईसीसी की मुख्य कार्यकारियों की समिति की बैठक में भाग लेने के लिये सचिव जय शाह को अपना प्रतिनिधि बनाया।

पूर्व भारतीय कप्तान गांगुली के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकाल की सीमा से जुड़े नियम में ढिलाई के लिए उच्चतम न्यायालय की स्वीकृति और शाह को आईसीसी बैठक के लिए नियुक्त करने का फैसला यहां बीसीसीआई की 88वीं वार्षिक आम बैठक में किया गया।



गांगुली ने एजीएम के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘आखिर में फैसला अदालत ही करेगी। ’’





मौजूदा संविधान के अनुसार अगर किसी पदाधिकारी ने बीसीसीआई या राज्य संघ में मिलाकर तीन साल के दो कार्यकाल पूरे कर लिए हैं तो उसे तीन साल का अनिवार्य ब्रेक लेना होगा।



गांगुली ने 23 अक्टूबर को बीसीसीआई अध्यक्ष का पद संभाला था और उन्हें अगले साल पद छोड़ना होगा लेकिन छूट दिए जाने के बाद वह 2024 तक पद पर बने रह सकते हैं।



मौजूदा पदाधिकारी चाहते हैं कि अनिवार्य ब्रेक किसी व्यक्ति के बोर्ड और राज्य संघ में छह साल के दो कार्यकाल अलग-अलग पूरा करने पर शुरू हो।



इस कदम को अगर स्वीकृति मिलती है तो सचिव जय शाह के कार्यकाल को बढ़ाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। शाह के मौजूदा कार्यकाल में भी एक साल से कम समय बचा है।



इसके अलावा शाह को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की मुख्य कार्यकारियों की समिति की भविष्य की बैठकों में हिस्सा लेने के लिए भारत का प्रतिनिधि चुना गया।



उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) जब बोर्ड का प्रशासनिक कामकाज देख रही थी तब बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी इन बैठकों में बीसीसीआई के प्रतिनिधि थे।



लेकिन अब पूर्ण बोर्ड के पदभार संभालने के बाद यह जिम्मेदारी एक बार फिर सचिव को सौंप दी गई है।



गांगुली ने कहा, ‘‘आईसीसी सीईसी में बोर्ड का प्रतिनिधि सचिव होगा, यह आईसीसी का नियम है। ’’



बीसीसीआई ने हालांकि आईसीसी के बोर्ड की बैठक के लिए अभी अपने प्रतिनिधि पर फैसला नहीं किया है।



इसके अलावा बोर्ड ने क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) की नियुक्ति को टालने का फैसला किया।



गांगुली ने कहा, ‘‘हम सीएसी गठित करेंगे और हम (लोकपाल) न्यायमूर्ति डी के जैन से मिलेंगे। मुझे और वीवीएस (लक्ष्मण) को इसमें शामिल नहीं पाया गया था। हमें इस पर स्पष्टता की जरूरत है कि हितों का टकराव क्या है और क्या नहीं।’’



उन्होंने कहा, ‘‘यह नियम सभी को रोकता है, इसलिए हम सीएसी का गठन नहीं कर सकते। टकराव (का नियम) केवल हमारे (पदाधिकारियों के) लिये होना चाहिए। ’’



नए संविधान में हितों के टकराव से जुड़े नियम के कारण सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और गांगुली ने सीएसी से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद कपिल देव, शांता रंगास्वामी और अंशुमन गायकवाड़ ने पुरुष टीम के मुख्य कोच की निुयक्ति की थी।



पुरुष टीम के मुख्य कोच के रूप में रवि शास्त्री का कार्यकाल बढ़ाया गया था।



गांगुली ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि सचिन और लक्ष्मण वापसी करना चाहेंगे। ’’



सीएसी हितों के टकराव के कथित मामले के कारण विवाद में घिर गई थी जिसके बाद इसके तीन शुरुआती सदस्यों तेंदुलकर, गांगुली और लक्ष्मण ने इस्तीफा दे दिया था।



रंगास्वामी और गायकवाड़ अब भारतीय क्रिकेटर्स संघ के प्रतिनिधि के रूप में शीर्ष परिषद का हिस्सा हैं। चयन समिति की नियुक्ति सीएसी का विशेषाधिकार है।



बोर्ड साथ ही चाहता है कि भविष्य में संवैधानिक संशोधनों से जुड़े फैसलों से अदालत को दूर रखा जाए और प्रस्ताव दिया है कि अंतिम फैसला करने के लिए एजीएम में तीन-चौथाई बहुमत पर्याप्त होगा।



अधिकारियों का मानना है कि प्रत्येक संशोधन के लिए उच्चतम न्यायालय की स्वीकृति लेना व्यावहारिक नहीं है लेकिन मौजूदा संविधान के तहत ऐसा करना जरूरी है।

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