06 Jul 2022, 15:18 HRS IST
  • किताब'मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी'चर्चा कार्यक्रम में जयशंकर
    किताब'मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी'चर्चा कार्यक्रम में जयशंकर
    राष्ट्रपति पद की राजग की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू पटना पहुंची
    राष्ट्रपति पद की राजग की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू पटना पहुंची
    महाराष्ट्र में भारी बारिश की चेतावनी जारी
    महाराष्ट्र में भारी बारिश की चेतावनी जारी
    अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस का जश्न
    अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस का जश्न
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम राष्ट्रीय
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
add
add

दोषी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया
  • Photograph Photograph  (1)
  • राजीव गांधी हत्याकांड मामला: उच्चतम न्यायालय ने दोषी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया

  • [ - ] फ़ॉन्ट का आकार [ + ]
पीटीआई-भाषा संवाददाता 11:53 HRS IST

नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राजीव गांधी हत्याकांड मामले में दोषी ए.जी. पेरारिवलन को रिहा करने का बुधवार को आदेश दिया जो उम्रकैद की सजा के तहत 30 साल से अधिक समय से जेल में बंद है।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘ राज्य मंत्रिमंडल ने प्रासंगिक विचार-विमर्श के आधार पर अपना फैसला किया था। अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए, दोषी को रिहा किया जाना उचित होगा।’’

संविधान का अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को विशेषाधिकार देता है, जिसके तहत संबंधित मामले में कोई अन्य कानून लागू ना होने तक उसका फैसला सर्वोपरि माना जाता है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे ए. जी. पेरारिवलन को न्यायालय ने यह देखते हुए नौ मार्च को जमानत दे दी थी कि सजा काटने और पैरोल के दौरान उसके आचरण को लेकर किसी तरह की शिकायत नहीं मिली।

शीर्ष अदालत 47 वर्षीय पेरारिवलन की उस याचिका पर सुनाई कर रही थी, जिसमें उसने ‘मल्टी डिसिप्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी’ (एमडीएमए) की जांच पूरी होने तक उम्रकैद की सजा निलंबित करने का अनुरोध किया था।

तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदुर में 21 मई, 1991 को एक चुनावी रैली के दौरान एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था जिसमें राजीव गांधी मारे गए थे। महिला की पहचान धनु के तौर पर हुई थी।

न्यायालय ने मई 1999 के अपने आदेश में चारों दोषियों पेरारिवलन, मुरुगन, संथन और नलिनी को मौत की सजा बरकरार रखी थी।

शीर्ष अदालत ने 18 फरवरी 2014 को पेरारिवलन, संथन और मुरुगन की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा उनकी दया याचिकाओं के निपटारे में 11 साल की देरी के आधार पर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का निर्णय किया था।

  • अपनी टिप्पणी पोस्ट करे ।