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  • पी-नोट के जरिये मई में निवेश घटकर 86,706 करोड़ रुपये पर

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 15:39 HRS IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) भारतीय पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट (पी-नोट्स) के जरिये निवेश मई, 2022 में मासिक आधार पर घटकर 86,706 करोड़ रुपये रह गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक आने वाली एक-दो तिमाहियों में अपने बिकवाली के रुख को बदलते हुए देश के शेयरों में वापस लिवाली करेंगे।

पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की तरफ से पी-नोट उन विदेशी निवेशकों को जारी किए जाते हैं, जो भारतीय शेयर बाजार में बिना पंजीकरण के निवेश करना चाहते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें पूरी जांच-परख की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू बाजारों में पी-नोट के जरिये निवेश का मूल्य मई, 2022 के अंत मे 86,706 करोड़ रुपये रह गया, जो अप्रैल में 90,580 करोड़ रुपये था।

वहीं, मार्च 2022 में यह 87,979 करोड़ रुपये जबकि फरवरी और जनवरी में क्रमश: 89,143 और 87,989 करोड़ रुपये था।

आंकड़ों के अनुसार, मई में 86,706 करोड़ रुपये के कुल पी-नोट निवेश में से 77,402 करोड़ रुपये का निवेश शेयरों में किया गया जबकि 9,209 करोड़ रुपये बांड एवं 101 करोड़ रुपये ‘हाइब्रिड’ प्रतिभूतियों में लगाए गए थे।

वहीं, अप्रैल के अंत में 81,571 करोड़ रुपये का निवेश शेयरों और 8,889 करोड़ रुपये निवेश बांड में किये गये थे।

पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा कंपनी ग्रीन पोर्टफोलियो के संस्थापक दिवाम शर्मा ने कहा, ‘‘शेयर बाजार वर्तमान समय में मूल्य के हिसाब से आकर्षक हो गया है। आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति आने वाले महीनों में कम होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बाजार अक्सर आर्थिक वृद्धि चक्र से आगे चलते है और हमारा मानना है कि आने वाली एक-दो तिमाही में विदेशी निवेशक घरेलू बाजारों में वापस लिवाली का रुख अपनाएंगे।’’

पी-नोट की तुलना में एफपीआई के अंतर्गत परिसंपत्ति मई के अंत में पांच प्रतिशत घटकर 48.23 लाख करोड़ रुपये रही। अप्रैल अंत में यह 50.74 लाख करोड़ रुपये थी।

इस बीच, मई के दौरान विदेशी निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजारों से 40,000 करोड़ रुपये तथा बांड बाजारों से 5,505 करोड़ रुपये निकाले हैं।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के कारण विदेशी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। यह लगातार आठवां महीना है जब एफपीआई ने भारतीयों बाजारों से शुद्ध रूप से निकासी की है।

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