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स्रोत: PATH
श्रेणी: Medical and Health Care
सीरम इंस्टीट्यूट
27/09/2017 5:53:36:820PM

 संपादक- यह विज्ञप्ति आपको NewsVoir के साथ संपन्न हुई व्यवस्था के तहत प्रेषित की जा रही है। पीटीआई पर इसका कोई संपादकीय उत्तरदायित्व नहीं है।


 

सीरम इंस्टीट्यूट के टीके ने दिखाया गंभीर रोटावाइरस गैस्ट्रोएंट्राइटिस के विरुद्ध उल्लेखनीय प्रभाव


भारत सरकार ने युनिर्वसल प्रतिरक्षण योजना में इस टीके के उपयोग का आदेश दिया है

पुणे, भारत, (27 सितम्बर 2017) - सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्रा. लि. के रोटावाइरस टीके बीआरवी-पीवी (जिसे रोटासिल®

के नाम से जाना जाता है) के भारत में हुए चरण 3 प्रभाव अध्ययन के नतीजे वैक्सीन पत्रिका में प्रकाशित हुए. अध्ययन ने

दिखाया कि यह टीका सुरक्षित, सुसहय है और गंभीर रोटावाइरस गैस्ट्रोएंट्राइटिस के विरुद्ध उल्लेखनीय प्रभाव प्रदान करता है.

२०१३ में, अनुमानित ४७,१०० रोटावाइरस मौतें भारत में हुयी थीं, जो पूरी दुनिया में हुयी कुल रोटावाइरस मौतों का २२ प्रतिशत

हैं.

 

रोटासिल® ने गंभीर रोटावाइरस अतिसार को तिहाई से अधिक घटा दिया-दो वर्ष के दौरान ३९.५ प्रतिशत. उल्लेखनीय रूप से रोटावाइरस अतिसार के सबसे गंभीर और संभावित जीवन-घातक मामलों, जिनसे निर्जलीकरण, अस्पताल में भर्ती और मृत्यु का अधिकतम जोखिम रहता है, के विरुद्ध इस टीके का प्रभाव करीब ५५ प्रतिशत था. भारत में रोटासिल द्वारा दर्शाए गए नतीजे, बांग्लादेश और कुछ अफ्रीकन देशों में रोटाटेक® और रोटारिक्स® के प्रदर्शन से सामान्यतः तुलनीय रहे हैं.

 

सीरम इंस्टीट्यूट के एक्ज़ेक्युटिव डायरेक्टर, डॉ. राजीव धेरे, जिनके नेतृत्व में ये टीका विकसित किया गया, ने कहा, ‘‘हम इन नतीजों से बहुत खुश हैं, जो संकेत देते हैं कि रोटासिल भारत में और संभवतः पूरी दुनिया में, हर वर्ष लाखों बच्चों का जीवन

बचा सकता है.’‘

 

अंतर्राष्ट्रीय संस्था पाथ ने सीरम इंस्टीट्यूट के साथ साझीदारी में चरण ३ प्रभाव अध्ययन में इस टीके का मूल्यांकन किया. पूरे भारत में छह अध्ययन स्थलों पर ७,५०० शिशुओं का इस परीक्षण में नामांकन किया गया. रोटासिल एक मौखिक टीका है जिसे भारत की युनिर्वसल प्रतिरक्षण योजना के तहत होने वाले नियमित टीकाकरण के दौरान ही ६,१० और १४ हफ्तों की उम्र पर, तीन-खुराक क्रम में दिया जाएगा.

 

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया ने अपनी प्रतिभागी विशेषज्ञ समिति के ज़रिए चरण ३ अध्ययन और प्रभाव नतीजों की समीक्षा की और उसके बाद सीरम इंस्टीट्यूट के उत्पादन स्थलों का निरीक्षण करके जनवरी २०१७ में रोटासिल को लाइसेंस प्रदान

किया.

 

भारत सरकार ने युनिर्वसल प्रतिरक्षण योजना, जो २ करोड़ ६० लाख बच्चों को लाभांवित करती है, में उपयोग के लिए रोटासिल की ३८ लाख खुराकों की मांग की हैं. सीरम इंस्टीट्यूट ने टीके की खुराको का उत्पादन कर लिया है और उनके वितरण के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहा है. इस वर्ष के आगामी दिनों में रोटासिल भारत के निजी बाज़ार में बिक्री के लिए भी उपलब्ध होगा. विश्वव्यापी खरीद के लिए इस टीके को उपलब्ध कराने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट,

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) से पूर्व-योग्यता हेतु प्रयत्न कर रहा है. डब्लूएचओ पूर्व-योग्यता हेतु आवश्यक अतिरिक्त

आंकड़े इकट्ठा करने के लिए पाथ और सीरम इंस्टीट्यूट की साझीदारी में, भारत में एक अलग चरण ३ अध्ययन आयोजित किया गया; उस अध्ययन के नतीजे प्रकाशन के लिए इस वर्ष जमा किए जाएंगे.

‘‘भारत के लिए ये बहुत अच्छी खबर है,‘‘ये कहना है डॉ. डेविड कास्लो, वाइस प्रेसिडेंट एसेन्शियल मेडिसिन्स एवं ग्लोबल हेड सेंटर फॉर वैक्सीन इनोवेशन ऐंड एक्सेस, पाथ. ‘‘इस रोटावाइरस टीके के नतीजे और इसकी सफल लाइसेंस प्राप्ति, भारत और

पूरे विश्व में वाजिब कीमत में रोटावाइरस टीके की आपूर्ति में सुधार के सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्य की ओर एक रोमांचक और प्रोत्साहक मील का पत्थर है.‘‘

 

नाइजर में एक अलग चरण ३ अध्ययन में मेडिसिन्स सैन्स फ्रटियर्स और एपिसेंटर भी रोटासिल के प्रभाव और सुरक्षा का मूल्यांकन कर रहे हैं. यह अध्ययन अब भी जारी है परंतु प्राथमिक विश्लेषण (एक वर्ष के आंकड़ों) नतीजों ने ये भी दिखाया कि गंभीर रोटावाइरस अतिसार की रोकथाम में ये टीका अति प्रभावी है और इसकी सुरक्षा प्रोफाइल भी अति उत्तम है. नाइजर अध्ययन में, गंभीर और अति गंभीर रोटावाइरस अतिसार के विरुद्ध इस टीके का प्रभाव क्रमशः ६६.७ प्रतिशत और ७८.८

प्रतिशत था. ये नतीजे मार्च २०१७ में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुए थे.

नाइजर अध्ययन में प्रयुक्त रोटासिल को २५°से. से कम तापमान पर टीकाकरण के लिए इसका भंडारण एवं परिवहन किया गया. इस तरह ये अन्य टीकों पर प्रारूपी रूप से लागू होने वाली चुनौतीपूर्ण और महंगी कोल्ड-चेन आवश्यकताओं पर निर्भर नहीं

था. भारतीय अध्ययन में प्रयुक्त रोटासिल टीकों के उसी समूह से लिया गया है जिनका उपयोग नाइजर अध्ययन में किया गया था.

मीडिया के लिए अतिरिक्त संसाधन:

· भारत में रोटावाइरस रोग भार पर फैक्ट शीट (तथ्य पत्र)

· रोटावाइरस टीकों की प्रभावोत्पादकता और असर पर फैक्ट शीट

· विशेषज्ञों के उद्धरण और मीडिया वक्तव्य

ये सब ऑनलाइन उपलब्ध हैं: https://www.defeatdd.org/rotasiil.

 

मीडिया संपर्क:

 

सीरम इंस्टीट्यूट के लिएः

डॉ. प्रसाद कुलकर्णी, +९१-९८९०६७९४१५ drpsk@seruminstitute.com

पाथ के लिएः

सुष्मिता मालवीय, पाथ भारत, +९१-९७१७२४३१३१, smalaviya@path.org

एलिसन क्लिफर्ड, पाथ वॉशिंगटन डीसी, +१-२०२- ६६९-७२३८, aclifford@path.org

 

टीके/अध्ययन के बारे में:

बोवाइन-ह्युमन रीअसॉर्टेंट रोटावाइरस, टीका यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ द्वारा विकसित किया गया था और आगे अधिक विकास के लिए एक यूएस कंपनी को और उभरते देशों के कई उत्पादकों को लाइसेंस प्रदान किया गया. सीरम इंस्टीट्यूट

इन लाइसेंस धारकों में एक था और उसने एक पेंटावेलेंट (पाँच-स्ट्रेन) टीका उत्पाद (बीआरवी-पीवी) विकसित किया. बीआरवी-पीवी (रोटासिल) में सबसे सामान्य रोटावाइरस सेरोटाइप्स (जी१, जी२, जी३, जी४, और जी९) के विरुद्ध बोवाइन-ह्युमन रीअसॉर्टेंट

रोटावाइरसेज़ मौजूद हैं.

चरण ३ प्रभाव परीक्षण में ७,५०० शिशुओं को भारत के छह स्थलों में भर्ती किया गया: सेवाग्राम वर्धा (मध्यभारत) में महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़; जम्मू (उत्तर पश्चिम भारत) में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज; पुणे (पश्चिम भारत) में

केईएम हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर; कोलकाता (पूर्वी भारत) में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉलरा ऐंड ऐंटेरिक डिज़ीज़ेज़; मणिपाल (दक्षिण भारत) में कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज और नई दिल्ली (उत्तर भारत) में सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट जो सोसायटी

फॉर एप्लाइड स्टडीज़ में स्थित है. इस अध्ययन में शामिल अन्य संगठन हैं क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर और डायग्नो सर्च लाइफ़ साइंसेज़ तथा एंट्रोवाइरस रिसर्च सेंटर, मुम्बई. टीके के प्रभाव और सुरक्षा के मूल्यांकन हेतु आध्ययन दल ने बच्चों

पर दो वर्ष तक अनुवर्ती निगरानी रखी.

 

अध्ययन साझीदारों के बारे में:

 

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया प्रा.लि. (एसआईआईपीएल) मीज़ल्स और डीटीपी (डिप्थीरिया, टिटनेस और पर्टूसिस) टीकों का दुनिया का सबसे बड़ा निर्माता है. एसआईआईपीएल की स्थापना १९६६ में हुयी और उसका लक्ष्य था जीवनरक्षक

इम्यूनोबायोलॉजिकल्स का उत्पादन, जिनकी भारत में कमी थी और जिनका ऊँची कीमतों पर आयात किया जाता था.

 

एसआईआईएल, अधिक वाजिब कीमतों पर, बड़ी मात्रा में जीवनरक्षक बायोलॉजिकल्स बनाने में सफल हुआ जिसके परिणामस्वरूप हमारा देश टिटनस एंटी टॉक्सिन और एंटी स्नेक सीरम, फिर डीटीपी टीके और बाद में एमएमआर (मीज़ल्स, मम्प्स और रुबेला) टीकों की आपूर्ति करने में आत्म-निर्भर हो गया. एसआईआईपीएल के उत्पाद नए टीकों की कीमत कम करने में सहायक रहे हैं, जैसे कि हेपेटाइटिस बी टीका, रेबीज़ का टीका और डीटीपी कॉम्बिनेशन टीका. इससे न स़िर्फ भारतीय बल्कि १४० से अधिक देशों के वंचित बच्चों को जन्म से लेकर आगे तक सुरक्षा मिलती है. अधिक जानकारी के लिए विज़िट करें:

http://www.seruminstitute.com.

पाथ विश्वव्यापी स्वास्थ्य प्रवर्तन में सबसे आगे है. यह अंतर्राष्ट्रीय लाभ रहित संगठन जीवन बचाता है और स्वास्थ्य सुधारता है, खासकर बच्चों और महिलाओं का. पाथ पाँच मंचों पर प्रवर्तन की गति बढ़ाता है - टीके, औषधियां, निदान, उपकरण और

प्रणाली तथा सेवा प्रवर्तन - जो इसकी उद्यमी सूझबूझ, वैज्ञानिक तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञता और समान स्वास्थ्य की इसकी लगन को उपयोग में लाते हैं. पूरी दुनिया में साझीदारों को साथ लेकर पाथ प्रवर्तन का नया आयाम देता है और मुख्यत

अफ्रीका और एशियाई देशों के साथ मिलकर उनकी सबसे बड़ी स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करता है. इनके साथ ऐसे मापयोग्य नतीजे देता है जो बुरे स्वास्थ्य के चक्र को तोड़ते हैं. अधिक जानकारी के लिए विज़िट करें:

http://www.path.org.

 

पत्रिका में लेख के बारे में:

http://dx.doi.org/10.1016/j.vaccine.2017.09.014. “A Randomized Phase III Clinical Trial to Assess the Efficacy of a Bovine-Human Reassortant Pentavalent Rotavirus Vaccine in Indian Infants” by Prasad S Kulkarni, Sajjad Desai, Tushar Tewari, Anand Kawade, Nidhi Goyal, BishanSwarupGarg, Dinesh Kumar, Suman Kanungo, Veena Kamat, Gagandeep Kang, Sudhir Babji, Sanjay Juvekar, Byomkesh Manna, Shanta Dutta, Rama Angurana, Deepika Dewan, Abhijeet Dharmadhikari, Jagdish K. Zade, Rajeev M. Dhere, Alan Fix, Maureen Power, Vidyasagar Upreti, Varsha Parulekar, Iksung Cho,Temsunaro R. Chandola, Vikash K. Kedia, Abhishek Raut, Ashish Bavdekar, SII BRV-PV author group, Jorge Flores. DOI:

ये एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित वैक्सीन पत्रिका में छपा है. इस लेख की प्रतियां, निवेदन करने पर, प्रत्यय-पत्र धारक पत्रकारों के लिए उपलब्ध है. कृपया newsroom@elsevier.com या +३१ २० ४८५ २४९२ पर Elsevier’s Newsroom से संपर्क करें.

 

वैक्सीन के बारे में:

टीकों और टीकाकरण में रुचि रखने वालों के लिए वैक्सीन सर्वश्रेष्ठ पत्रिका है. ये एडवर्ड जेनर सोसायटी और जापानी सोसायटी फॉर वैक्सीनोलॉजी की आधिकारिक पत्रिका है और एल्जेविसर द्वारा प्रकाशित की जाती है. अधिक जानकारी के लिए विज़िट

करें: www.elsevier.com/locate/vaccine.

 
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