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स्रोत: Public Interest Registry AsiaNet 72021
श्रेणी: High Technology
सर्वे ने एनजीओ के बीच टेक्नोलाॅजी तथा सोशल मीडिया के इस्तेमाल में वैश्विक रिवाज का खुलासा किया
13/02/2018 3:12:39:430PM

पीडब्ल्यूआर

पीआर नंबर 72021

पब्लिक इंटरेस्ट एक रेस्टान

सर्वे ने एनजीओ के बीच टेक्नोलाॅजी तथा सोशल मीडिया के इस्तेमाल में वैश्विक रिवाज का खुलासा किया

रेस्टान, वर्जीनिया, 13 फरवरी, 2018, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट।

- पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री और नानप्राफिट टेक फार गुड ने 2018 ग्लोबल एनजीओ टेक्नोलाजी की तीसरी सालाना रिपोर्ट जारी की

ण्वतह डोमेन की गैर लाभकारी संचालक संस्था पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री (<https://pir.org/>) और नानप्राफिट टेक फार गुड (<http://www.nptechforgood.com> ) ने आज ‘‘2018 ग्लोबल एनजीओ टेक्नोलाजी रिपोर्ट (<http://techreport.ngo>) के परिणाम जारी किए। तीसरी सालाना रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक स्तर पर गैर-सरकारी संस्थाएं (एनजीओ) कैसे वेब, ईमेल और मोबाइल टेक्नोलाजी, आनलाइन वित्त प्रबंधन तथा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती हैं और डाटा एवं सुरक्षा का प्रबंधन करती हैं।

इस रिपोर्ट में अफ्रीका, एशिया, आस्ट्रेलिया एवं ओशिनिया, यूरोप, उत्तर अमेरिका तथा दक्षिण अमेरिका में 164 देशों के 5,352 एनजीओ पर किए गए सर्वे के प्रमुख निष्कर्षों को विस्तार से बताया गया है। यह रिपोर्ट विश्व के एनजीओ को सामान्य अभिरुचि बढ़ाने, मुख्य दर्शकों के बीच संवाद करने और दाताओं से चंदा इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल होने वाले आॅनलाइन एवं मोबाइल संवाद टूल्स की गहरी जानकारी देती है तथा इन आनलाइन टूल्स का विश्लेषण और क्षेत्राीय इस्तेमाल की तुलना भी बताती है। इस वर्ष के नए निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि एनजीओ केसे डाटा प्रबंधन और सुरक्षा साफ्टवेयर का कार्यान्वयन करते हैं।

वैश्विक स्तर के मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैंः

- 92 फीसदी लोगों के पास अपनी वेबसाइट हैं। इनमें से 87 फीसदी मोबाइल अनुरूप हैं, 2017 के बाद से इसमें 9 फीसदी का इजाफा हुआ है।

- सर्वे में शामिल 68 फीसदी लोगों ने कहा कि उनका संगठन .com डोमेन के 8 फीसदी इस्तेमाल के मुकाबले .org डोमेन का इस्तेमाल करता है।

- ईमेल दाताओं के संवाद के पसंदीदा स्वरूप में वर्चस्व बनाए हुए है जबकि 63 फीसदी प्रतिभागी नियमित रूप से ईमेल अपडेट भेजते रहते हैं लेकिन 18 फीसदी मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं और 15 फीसदी नियमित रूप से टेक्स्ट मैसेज सपोर्टरों को भेजते हैं।

- 72 फीसदी प्रतिभागियों ने आनलाइन दान स्वीकार किया जो 2017 से अब तक 5 फीसदी का इजाफा है।

- 95 फीसदी प्रतिभागी स्वीकार करते हैं कि सोशल मीडिया आनलाइन ब्रांड जागरूकता के लिए प्रभावी है, दुनिया के सिर्फ 32 फीसदी एनजीओ ने सोशल मीडिया रणनीति के बारे में लिखा है।

- फेसबुक सबसेबड़े सोशल मीडिया प्लेटफार्म के तौर पर वैश्विक इस्तेमाल में अग्रणी रहा जिसमें 93 फीसदी प्रतिभागियों का एक समर्पित पेज देखा गया और इसके बाद ट्विटर (77 फीसदी) और यूट्यूब (57 फीसदी) का स्थान रहा।

- 25 फीसदी एनजीओ अपने फेसबुक पेज पर प्रतिदिन पोस्ट करते हैं और 24 फीसदी ट्विटर ढाई गुना प्रतिदिन पोस्ट करते हैं, अब भी 68 फीसदी एनजीओ सप्ताह में एक बार से भी कम लिंक्डइन पर पोस्ट करते हैं।

- विश्व के 80 फीसदी एनजीओ डेस्कटाप/लैपटाप कंप्यूटरों के लिए माइक्रोसाफ्ट विंडोज आपरेटिंग सिस्टम पर भरोसा करते हैं, स्मार्टफोन/टैबलेट पर वैश्विक गूगल एंड्रायड एप्पल आईओएस से अधिक इस्तेमाल किया जाता है।

- एनजीओ प्रतिभागियों ने दाताओं (45 फीसदी) के साथ संवाद कायम करने के लिए कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर (सीआरएम) का इस्तेमाल करने का संकेत दिया है और इनमें से 64 फीसदी क्लाउड आधारित सीआरएम का इस्तेमाल करते हैं।

- सिर्फ 41 फीसदी वैश्विक प्रतिभागी डाटा और संवाद की सुरक्षा के लिए एनक्रिप्शन टेक्नोलाजी का इस्तेमाल करते हैं।

नानप्राफिट टेक फार गुड के संस्थापक हीथर मैन्सफील्ड ने कहा, “2018 की रिपोर्ट के निष्कर्ष सुनिश्चित करते हैं कि विश्व के एनजीओ अपनी टेक्नोलाजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रहे हैं और टेक्नोलाजी पर भरोसा बढ़ाते हुए संवर्द्धित डाटा प्रबंधन और सुरक्षा जरूरतों को पूरा करते हैं। पहली बार इस साल की रिपोर्ट संगठनात्मक और दाता डाटा प्रबंधित एवं सुनिश्चित करने के लिए बेंचमार्क प्रदान करती है। एनजीओ इस क्षेत्र के निजी क्षेत्र से पीछे है और बेंचमार्क प्रदान करते हुए हम एनजीओ को अपने डाटा प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्यों को आधुनिक बनाने की खातिर प्रेरित करने की उम्मीद करते हैं।”

अफ्रीका से मिले मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैंः

- अफ्रीका में सिर्फ 74 फीसदी एनजीओ के पास अपनी वेबसाइट है जबकि 87 फीसदी मोबाइल कंपिटेबल हैं।

- विश्व अनुपात की तुलना में अफ्रीका के बहुत कम एनजीओ आनलाइन दान (सिर्फ 5 5 फीसदी ) स्वीकार करते हैं।

- दाताओं (87 फीसदी) के साथ संवाद करने के लिए व्हाट्सऐप सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप है जिसके बाद फेसबुक मैसेंजर (52 फीसदी) और वाइबर (4 फीसदी) लोकप्रिय हैं।

- फेसबुक सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया चैनल (85 फीसदी) है जिसके बाद ट्विटर (62 फीसदी) और लिंक्डइन (39 फीसदी) की लोकप्रियता है।

- गूगल एंड्रायड सबसे लोकप्रिय स्मार्टफोन/टैबलेट आॅपरेटिंग सिस्टम (66 फीसदी) है।

एशिया से मिले मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैंः

- वैश्विक अनुपात के मुकाबले एशिया के बहुत कम प्रतिभागियों के पास अपनी वेबसाइट (81फीसदी) है। इनमें से 86 फीसदी मोबाइल कंपिटेबल हैं।

- 56 फीसदी प्रतिभागी आनलाइन दान स्वीकार करते हैं, जो 2017 से अब तक 9 फीसदी की वृद्धि है।

- व्हाट्सऐप दाताओं (69 फीसदी) के साथ संवाद करने के लिए सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप है जिसके बाद फेसबुक मैसेंजर (52 फीसदी) और वाइबर (9 फीसदी) की लोकप्रियता है।

- एशिया के 86 फीसदी प्रतिभागियोंके पास फेसबुक पेज है और 62 फीसदी के पास ट्विटर प्रोफाइल है।

- एशिया में 62 फीसदी एनजीओ अपने स्मार्टफोन/टैबलेट आपरेटिंग सिस्टम के तौर पर गूगल एंड्रायड पर भरोसा करते हैं।

आस्ट्रेलिया और ओशियाना के मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैंः

- आस्ट्रेलिया और ओशियाना के 99 फीसदी एनजीओ के पास अपनी वेबसाइट है जबकि 86 फीसदी एनजीओ मोबाइल कंपिटेबल हैं।

- 70 फीसदी एनजीओ आनलाइन चंदा स्वीकार करते हैं।

- वैश्विक स्तर पर सबसे कम प्रतिशत के साथ सिर्फ 8 फीसदी एनजीओ दाताओं के साथ संवाद करने के लिए मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं, इनमें से 88 फीसदी संगठन फेसबुक मैसेंजर का इस्तेमाल करते हैं।

- फेसबुक सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया चैनल (94 फीसदी) रहा, जिसके बाद ट्विटर (73 फीसदी) और लिंक्डइन (57 फीसदी) की लोकप्रियता रही।

- इस क्षेत्र में एप्पल आईओएस पसंदीदा स्मार्टफोन/टैबलेट आपरेटिंग सिस्टम के साथ 45 फीसदी उपयोग किया जाता है जबकि 21 फीसदी गूगल एंड्रायड का इस्तेमाल करते हैं।

यूरोप के मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैंः

- 97 फीसदी यूरोपीय एनजीओ के पास अपनी वेबसाइट है जबकि 86 फीसदी मोबाइल कंपिटेबल हैं।

- आनलाइन दान स्वीकार करने वाले यूरोपीय एनजीओ की हिस्सेदारी 59 प्रतिशत रही।

- समर्थकों से संवाद करने के लिए यूरोप के सिर्फ 17 फीसदी प्रतिभागियों ने मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल की बात स्वीकारी जबकि व्हाट्सऐप (65 फीसदी) यहां सबसे लोकप्रिय साधन रहा।

- यूरोप के 94 फीसदी प्रतिभागियों के पास फेसबुक पेज है, 80 फीसदी के पास ट्विटर प्रोफाइल है जबकि 58 फीसदी के पास लिंक्डइन पेज है।

- गूगल एंड्रायड पसंदीदा (47 फीसदी) स्मार्टफोन/टैबलेट आपरेटिंग सिस्टम है जिसके बाद एप्पल आईओएस (25 फीसदी) की लोकप्रियता रही।

उत्तरी अमेरिका के मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैंः

- उत्तरी अमेरिका के 98 फीसदी एनजीओ के पास वेबसाइट है जिनमें से 88 फीसदी मोबाइल कंपिटेबल हैं।

- 86 फीसदी प्रतिभागी आनलाइन चंदा स्वीकार करते हैं।

- सिर्फ 10 फीसदी एनजीओ दाताओं के साथ संवाद करने के लिए मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से फेसबुक मैसेंजर सबसे पसंदीदा (68 फीसदी), इसके बाद व्हाट्सऐप (32 फीसदी) और स्नैपचैट (10 फीसदी) प्लेटफार्म रहे।

- 97 फीसदी एनजीओ फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं, 85 फीसदी ट्विटर का, 63 फीसदी लिंक्डइन का और 61 फीसदी इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते हैं।

- उत्तर अमेरिका के एनजीओ प्रतिभागियों में से 49 फीसदी ने स्मार्टफोन/टैबलेट पर ऐप्पल आईओएस के इस्तेमाल का संकेत दिया जो सभी क्षेत्रों में होनेवाले इस्तेमाल का सर्वाधिक प्रतिशत रहा।

दक्षिण अमेरिका के निष्कर्षों में शामिल हैंः

- वैश्विक अनुपात के मुकाबले चंद दक्षिण अमेरिकी एनजीओ के पास अपनी वेबसाइट (88 फीसदी) है जिनमें से 87 फीसदी मोबाइल कंपिटेबल हैं।

- कुल एनजीओ का 56 फीसदी आनलाइन चंदा स्वीकार करते हैं जो वैश्विक अनुपात (72 फीसदी) के मुकाबले कम ही है।

- दक्षिण अमेरिकी प्रतिभागियों ने दानकर्ताओं के साथ (40 फीसदी) संवाद करने के लिए मैसेजिंग ऐप के सर्वाधिक इस्तेमाल की जानकारी दी जबकि सबसे ज्यादा व्हाट्सऐप (90 फीसदी) का इस्तेमाल किया जाता है।

- सभी देशों में दक्षिण अमेरिकी सर्वाधिक फेसबुक (98 फीसदी) और सबसे कम लिंक्डइन (41 फीसदी ) का इस्तेमाल करते हैं, 71 फीसदी एनजीओ ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं जबकि इसके बाद इंस्टाग्राम (55 फीसदी) का इस्तेमाल करने वालों की संख्या है।

- 78 फीसदी एनजीओ अपने स्मार्टफोन/ टैबलेट आपरेटिंग सिस्टम के लिए गूगल एंड्रायड का इस्तेमाल करते हैं।

पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री के सीईओ ब्रायन क्यूट ने कहा, “सालाना ग्लोबल एनजीओ टेक्नोलाजी रिपोर्ट न सिर्फ यह दर्शाती है कि कैसे इंटरनेट संगठनों की मदद कर सकता है और अंशधारकों के साथ भागीदारी कर सकता है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे यह विभिन्न टेक्नोलाजी टूल्स के साथ जुड़ते हुए बदलाव के लिए एक शक्तिशाली साधन बन सकता है। यह एक महत्वपूर्ण शोध पहल है जो विभिन्न उद्योगों के भागीदारों को विश्व के संगठनों को हर तरह का सहयोग देने के लिए एकजुट करती है क्योंकि वे बेहतर समझ बनाए रखना चाहते हैं और ऐसी टेक्नोलाजी का लाभ उठाना चाहते हैं जो उन्हें अपने महत्वपूर्ण सामाजिक अभियानों को साकार करने में मदद कर सके।”

ग्लोबल एनजीओ टेक्नोलाजी रिपोर्ट को विभिन्न वैश्विक भागीदारों का समर्थन मिला हुआ है जो इस सर्वे में एनजीओ की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं- खासकर उभरते देशों में मौजूद एनजीओ को- ताकि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलाजी के इस्तेमाल को लेकर विविधतापूर्ण और संतुलित समझ सुनिश्चित की जा सके। इसके भागीदारों में अल कासिमी फाउंडेशन, अरब फाउंडेशन फोरम, ब्लैकबाउड इंस्टीट्यूट, सिविकस, कानकोर्ड यूरोप, एस्टुडियो डी इम्पैक्टो, ग्रेटर पब्लिक, इन्फोचेंज, आईविद डाट ओआरजी, म्यूजी दा पेसोआ, नाइजीरिया नेटवर्क इफ एनजीओ, फिलेनथ्रोपी सर्किट, टेक ट्रस्ट और टेकसोप। सर्वे के निष्कर्षों, पद्धति के बारे में अधिक जानकारी के लिए इसकी पूरी रिपोर्ट कृपया डाउनलोड करेंः<http://www.techreport.ngo>

यह रिपोर्ट निम्नलिखित भाषाओं में भी उपलब्ध हैः

- अरबी- <http://techreport.ngo/ar>

- फ्रेंच- <http://techreport.ngo/fr>

-पुर्तगाली- <http://techreport.ngo/pt-br>

स्पैनिश-<http://techreport.ngo/es>

पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री के बारे में

पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री एक गैर-लाभकारी संगठन है जो दुनियाभर में 1.07 करोड़ से अधिक डोमेन नामों का पंजीकरण करने के साथ ही विश्व में तीसरा सबसे बड़ा ‘‘जेनेरिक’’ टाप-लेवल डोमेन यानी शीर्ष स्तरीय डोमेन .org का परिचालन करता है और साथ ही नए प्रस्तुत .ngo और .ong डोमेन तथा आनगुड कम्युनिटी वेबसाइट का भी परिचालन करती है। पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री स्थानीय भाषा में इंटरनेट के इस्तेमाल को समर्थन एवं प्रोत्साहित करने के लिए चार अंतरराष्ट्रीय डोमेन नामों का भी परिचालन करती है। इंटरनेट पर साझेदारी, सुरक्षा एवं संरक्षा की वकालत करने वाली संस्था के रूप में पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री का लक्ष्य वैश्विक गैर-व्यावसायिक समुदायों को इंटरनेट का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने में सक्षम बनाना और डोमेन नाम प्रणाली से संबंधित नीति एवं अन्य मसलों पर इंटरनेट शेयरधारकों के बीच नेतृत्व मुकाम दिलाना है। पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री की स्थापना इंटरनेट सोसायटी (internetsociety.org <http://internetsociety.org>) द्वारा सन 2002 में रेस्टान, वर्जीनिया, अमेरिका में की गई थी।

नानप्राफिट टेक फार गुड के बारे में

सोशल नेटवर्कों पर लगभग 100,000 मासिक विजिटरों और एक मिलियन से अधिक फालोअर्स की बदौलत नानप्राफिट टेक फार गुड गैरलाभकारी प्रोफेशनलों के लिए एक प्रमुख सोशल और मोबाइल मीडिया संसाधन है। हीदर मैन्सफील्ड द्वारा निर्मित और प्रबंधित नानप्राफिट टेक फार गुड मूल्यवान, समझने में आसान सूचना, खबरों और गैरलाभकारी टेक्नोलाजी, आनलाइन संवाद और मोबाइल तथा सोशल फंडिंग से संबंधित संसाधनों पर केंद्रित रहती है ।

मीडिया संपर्कः

क्रिस्टीन विलियमसन, एलिसन प्लस पार्टनर्स फार पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री

pir@allisonpr.com <mailto:pir@allisonpr.com>

1 (619) 342 9383

स्रोतः पब्लिक इंटरेस्ट रजिस्ट्री

संपादक : यह विज्ञप्ति आपको एशियानेट के साथ हुए समझौते के तहत प्रेषित की जा रही है । पीटीआई पर इसका कोई संपादकीय उत्तरदायित्व नहीं है ।

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