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स्रोत: Foundation for a Smoke-Free World AsiaNet 73797
श्रेणी: Medical and Health Care
नए आंकड़ों के अनुसार भारत में धूम्रपान करने वाले आधे से ज़्यादा लोग धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं किंतु इस कोशिश में नाकाम रहे हैं
01/06/2018 12:53:58:607PM

स्मोक फ्री वल्र्ड एक नई दिल्ली

नए आंकड़ों के अनुसार भारत में धूम्रपान करने वाले आधे से ज़्यादा लोग धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं किंतु इस कोशिश में नाकाम रहे हैं

वल्र्ड नो टोबेको डे के उपलक्ष्य में फाउन्डेशन फार  अ  स्मोक-फ्री व ल्र्ड ने आधुनिक अनुसंधान की  शपथ ली, जिसके माध्यम से दुनिया में धूम्रपान करने वाले 1 बिलियन लोगों को धूम्रपान  की  लत छोड़ने में मदद की जाएगी

नई दिल्ली, भारत, 30 मई 2018, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट।

 भारतमें धूम्रपान करने वाले हर 10 में से 7 लोग इस बात को समझते हैं कि  धूम्रपान उनकी सेहत के लिए खतरनाक है, इनमें से 53 फीसदी लोग धूम्रपान छोड़ने की कोशिशों में नाकाम रहे हैं।फाउन्डेशन फार स्मोक फ्री वल्र्ड द्वारा जारी आंकड़ों में यह  तथ्य सामने आया है। साफ है धूम्रपान करने वालों को ऐसे विकल्प और तरीके उपलब्ध कराने होंगे, ताकि वे लम्बा और सेहतमंद जीवन जी सकें।

‘‘आंकडों में वही तथ्य सामने आए हैं जो दशकों से हम सभी जानते हैं-कि धूम्रपान करने वाले लोग धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं लेकिन इसमें नाकाम रहते हैं।’’  डेरेक याच,  प्रेज़ीडेन्ट, फाउन्डेशन फार ए  स्मोक

फ्री वल्र्ड ने कहा, जो तंबाकू नियंत्रण पर विश्व स्तरीय संधि, फ्रेमवर्क कन्वेन्शन आॅन टोबेको कन्ट्रोल में बेहद सक्रिय रहे हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन में गैर-संचारी बीमारियों एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्यकारी निदेशक की भूमिका निभा चुके हैं।

भारत में सामने आए कुछ परिणामों में शामिल हैंः

- धूम्रपान करने वाले 68 फीसदी लोगों ने बताया कि धूम्रपान के बुरे प्रभावों के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं।

- धूम्रपान करने वाले 51 फीसदी लोगों ने बताया कि वे धूम्रपान छोड़ने की योजना बना रहे हैं।

- धूम्रपान करने वाले 41 फीसदी लोग जो इसे छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उनका कहना है कि उन्हें इसके लिए किसी की मदद की ज़रूरत है।

-धूम्रपान करने वाले 25 फीसदी लोग धूम्रपान छोड़ने के लिए ई-सिगरेट या वेपिंग डिवाइस इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस अध्ययन के तहत 13 देशों के 17,000 प्रतिभागियों पर सर्वेक्षण किया गया,  सर्वेक्षण में पता चला है कि दुनियाभर में धूम्रपान पर रोक लगाना एक बड़ी चुनौती है। साफ हैः धूम्रपान करने वाले लोग धूम्रपान के लिए अपनी सेहत और आर्थिक कल्याण को भी दांव पर लगा रहे हैं, हालांकि इनमें से ज़्यादातर लोग धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं।

फाउन्डेशन फार अ स्मोक-फ्री वल्र्ड ऐसे उपकरणों और तरीकों की खोज के लिए आधुनिक अनुसंधान हेतु वित्तपोषण प्रदान करेगा, जो इन लोगों को धूम्रपान छोड़ने में मदद कर सके और लाखों ज़िंदगियों को तबाह होने से बचा सके।

‘‘दो साल पहले रायल कालेज आफ फिज़िशियन्स ने पाया कि तंबाकू के इस्तेमाल के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए इस तरह के उपकरण और तरीके बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। हम इस तथ्य की अनदेखी कर रहे हैं कि बहुत से लोग धूम्रपान छोड़ना ही नहीं चाहते,

बल्कि इससे उन्हें आनंद मिलता है। ऐसे में धूम्रपान छोड़ने के तरीकों को अपनाना इनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है।’’ डा याच ने कहा।

अकेले भारत में 104 मिलियन से अधिक लोग तंबाकू के सेवन से अपनी सेहत को नुकसान पहुंचा  रहे हैं। बीड़ी इन लोगों के लिए सस्ता विकल्प है, यह हाथ से रोल की गई सिगरेट होती है, जिसे भारत में स्थानीय रूप से बनाया जाता है। देश में बड़ी  संख्या में लोग तंबाकू के रूप में बीड़ी का सेवन करतेहैं। पारंपरिक सिगरेट की तुलना में बीड़ी पर कर में छूट के चलते यह सस्ती  भी पड़ती है। ऐसे में साफ है कि भारत में अगर हम धूम्रपान पर रोक लगाना चाहते हैं, तो हमें अन्य देशों की तुलना विशेष उपाय अपनाने होंगे।

‘‘30वें वल्र्ड नो टोबेको डे के उपलक्ष्य में फाउन्डेशन फार  अ  स्मोक-फ्री वल्र्ड धूम्रपान करने वालों के साथ खड़ा है, उन्हें धूम्रपान की लत छोड़ने में मदद करना चाहता है। भारत और दुनियाभर में धूम्रपान की स्थिति को देखतेहुए, अभी इस दिशा में बहुत ज़्यादा काम करना है।’’ डा याच ने कहा।

फाउन्डेशन धूम्रपान करने वालों की मदद के लिए नया दृष्टिकोण अपना रहा है। हमें उनकी आंखों से देखकर, उनके कानों से सुनकर उनकी चुनौतियों को समझना होगा। फाउन्डेशन इस दिशा में अनुसंधान के लिए वित्तपोषण उपलब्ध कराएगा ताकि फ्रेमवर्क कन्वेन्शन आन टोबेको कन्ट्रोल के मद्देनज़र नए तरीकों और उपकरणों की खोज की जा सके। उन  लोगों की सेहत में सुधार लाया जा सके, जो धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

फाउन्डेशन फार अ स्मोक फ्री वल्र्ड के बारे में

फाउन्डेशन फार अ स्मोक फ्री वल्र्ड एक स्वतन्त्र, गैर-लाभ संगठन है जो दुनियाभर में  धूम्रपान को समाप्त करने के उद्देश्य के साथ, धूम्रपान के कारण सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों को कम  करने,

इनके कारण होने वाली मौतों में कमी लाने के लिए प्रयासरत है। फाउन्डेशन अनुसंधान पर  ध्यान केन्द्रित करता है, इस दृष्टि से मौजूद खामियों को पहचानने की कोशिश करता है, तथा नए  अनुसंधान को वित्तपोषण प्रदान करता है, ताकि धूम्रपान पर लगाम लगाने के लिए सबसे प्रभावी रणनीतियां बनाई जा सकें और नए तरीके खोजे जा सकें। संगठन को सुनिश्चित करना होगा कि इस दृष्टि से संवेदनशील आबादी, विशेष रूप से तंबाकू उगाने वाले किसानों को आजीविका के स्थायी साधन मिल सकें।

दुनियाभर में एक बिलियन लोग धूम्रपान करते हैं, एक अनुमान के अनुसार इस सदी में एक बिलियन लोगों की मृत्यु धूम्रपान  के कारण हो जाएगी,  ऐसे में फाउन्डेशन को तुरंत अपने प्रयासों में तेज़ी लानी होगी। फाउन्डेशन इस दिशा में अनुसंधान के लिए वित्तपोषण प्रदान करेगा तथा दुनिया भर में धूम्रपान के कारण होने वाली बीमारियों और मौतों में कमी लाने के लिए अपने प्रयासों में तेज़ी लाएगा।

डा डेरेक याच के बारे में

डा डेरेक याच पिछले 30 सालों से विश्व स्तरीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं एंटी-स्मोकिंग  एडवोकेट  के रूप में काम कर रहे हैं। वे फाउन्डेशन फार अ स्मोक फ्री वल्र्ड के प्रेज़ीडेन्ट हैं। अपने करियर  के दौरान उन्होंने धूम्रपान पर रोक लगाने के लिए अनुसंधान एवं नीतिगत विकास पर ज़ोर दिया है, वे धूम्रपान के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के समर्थक रहे हैं, 2005 की शुरुआत से इस दिशा में काम कर रहे हैं। वे रोगों की रोकथाम के अधिवक्ता रहे हैं और फाउन्डेशन फार अ स्मोक

फ्री वल्र्ड के माध्यम से अपने कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

डा याच विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्व केबिनेट निदेशक तथा गैर-संचारी रोगों  एवं मानसिक बीमारियों के लिए कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं, जहां वे तंबाकू नियन्त्रण पर विश्व स्तरीय संधि, फ्रेमवर्क कन्वेन्शन आन टोबेको कन्ट्रोल के विकास में बेहद सक्रिय रहे हैं।

अधिक जानकारी के लिए कृपया सम्पर्क कीजिएः

मारिया अल्वारादो-बहल

malvaradobehl@mercuryllc.com

स्रोत : फाउंडेशन फार अ स्मोक फ्री वर्ल्ड


संपादक : यह विज्ञप्ति आपको एशियानेट के साथ हुए समझौते के तहत प्रेषित की जा रही है , पीटीआई पर इसका कोई संपादकीय उत्तरदायित्व नहीं है 

पीआरन्यूजवायर- एशियानेटः रंजन

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