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स्रोत: Alzheimer''s Association International Conference
श्रेणी: Medical and Health Care
एएआईसी (आर) 2018 में यह प्रदर्शित करने के लिए पहला क्लिनिकल ट्राइल पेश किया गया कि सघन ब्लड प्रेशर इलाज आंशिक संज्ञानात्मक गड़बड़ी और डिमेंशिया (संयुक
28/07/2018 3:02:32:157PM

अल्जाइमर्स एसोसिएशन एक शिकागो

एएआईसी (आर) 2018 में यह प्रदर्शित करने के लिए पहला क्लिनिकल ट्राइल पेश किया गया कि सघन ब्लड प्रेशर इलाज आंशिक संज्ञानात्मक गड़बड़ी  और डिमेंशिया (संयुक्त रूप से अंतिम स्थिति) के नए मामलों को कम करता है

शिकागो, 26 जुलाई, 2018, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट।

- सम्मेलन के दौरान एलजीबी सीनियर्स में डिमेंशिया का पहला डाटा और प्रजनन इतिहास से संबंधित महिलाओं के डिमेंशिया खतरे का डाटा भी जारी किया गया

सघन ब्लड प्रेशर इलाज आंशिक संज्ञानात्मक गड़बड़ी (एमसीआई) के नए मामलों और एमसीआई तथा सभी प्रकार के डिमेंशिया के साझा खतरे को कम करता है, यह प्रदर्शित करने के लिए पहला यादृच्छ क्लिनिकल परीक्षण शिकागो में आयोजित अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस (एएआईसी) 2018 के दौरान नए शोध के परिणामों को जारी किया गया।

लोगो-https://mma.prnewswire.com/media/721324/AAIC_2018_Logo.jpg

एएआईसी 2018 में प्रस्तुत स्प्रिंट माइंड परीक्षण के प्रारंभिक परिणाम हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के जरिये आज की तारीख में एमसीआई और डिमेंशिया के कम होते खतरे के बारे में सबसे ठोस साक्ष्य प्रदान करते हैं। ब्लड प्रेशर को वैश्विक स्तर पर कार्डियोवैस्कुलर रोग का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

एएआईसी 2018 में बीएएन2401 (एसेई, बायोजेन) के दूसरे चरण के अध्ययन से अतिरिक्त डाटा भी पेश किया गया , जिसे 5 जुलाई को सकारात्मक सर्वश्रेष्ठ क्वालिटी के 18 महीने के परिणामों में दर्शाया गया। ये परिणाम मस्तिष्क में क्लिनिकल अवनति को धीमा करने और एमिलॉयड बीटा की कमी को दर्शाते हैं।

एएआईसी 2018 में कई तरह के अध्ययनों को पहली बार पेश किया गया, जिनमें समलैंगिक पुरुषों, समलैंगिक महिलाओं और बायसेक्सुअल (एलजीबी) बुजुर्गों की बड़ी आबादी में डिमेंशिया की मौजूदगी का मूल्यांकन आधारित अध्ययन और महिलाओं में प्रजनन इतिहास तथा डिमेंशिया के खतरे का बड़े पैमाने पर पहला अध्ययन शामिल किया गया।

अल्जाइमर्स एसोसिएशन के चीफ साइंस ऑफिसर मारिया सी. कैरिलो ने कहा, “एएआईसी 2018 में पेश नवप्रवर्तक शोध अध्ययनों का मौजूदा डाटा हमें कई वजहों से उम्मीद बंधाता है। मसलन, स्प्रिंट माइंड अध्ययन में एमसीआई के नए मामलों में कमी भविष्य में अल्जाइमर्स की चिकित्सा पद्धति के नजरिये में विश्वसनीयता बढ़ाती है जिसमें दवाओं तथा परिशोधित रिस्क फैक्टर की मध्यस्थताओं को शामिल किया गया है-जैसा कि अब हम कार्डियोवैस्कुलर रोग में करते हैं।”

कैरिलो ने कहा, “एएआईसी में प्रस्तुति के दौरान जैसाकि हमने सुना, हम नवप्रवर्तक क्लिनिकल परीक्षण डिजाइनों और थेराप्यूटिक लक्ष्यों का स्वागत करते हैं और उपचार शुरू करने की नईपद्धतियों और इस रोग पर हमले का स्वागत करते हैं। एक लंबे समय के लिए एक नया उपचार अनुमोदित नहीं किया गया है। हमें अल्जाइमर्स तथा अन्य डिमेंशिया से पीड़ित लाखों लोगों तथा इस जोखिम में पड़े लाखों लोगों को  बेहतर इलाज तथा बचावकारी रणनीतियां प्रदान करने के लिए क्लिनिकल परीक्षणों के जरिये सभी तरह के बुनियादी विज्ञान से ठोस कदम उठाने की जरूरत है।”

कैरिलो ने कहा, “अल्जाइमर्स एसोसिएशन महिलाओं, एलजीबी व्यक्तियों और शतायु लोगों समेत महत्वपूर्ण मरीज आबादी के लिए गए परिणामों के एएआईसी में पेश किए जाने का भी भरपूर सम्मान करता है। अल्जाइमर्स और अन्य डिमेंशिया  के साथ जीने वाले व्यक्तियों और विभिन्न पृष्ठभूमि के उनके देखभाल करने वालों पर इस रोग के प्रभाव को समझना अल्जाइमर्स के बेहतर इलाज और बचाव के लिए महत्वपूर्ण है और अब इससे पीड़ित लोगों का उचित तरीके से समर्थन और देखभाल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”

एएआईसी अल्जाइमर्स और डिमेंशिया के ताजा शोध की प्रस्तुति और चर्चा के लिए एक प्रमुख सालाना मंच है। डिमेंशिया विज्ञान में सफलता के करीब विश्व को लाते हुए एएआईसी 2018 ने पूरी दुनिया के 5,100 से अधिक प्रमुख विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित किया  और 2,500 से अधिक वैज्ञानिक प्रस्तुतियां पेश की।

अल्जाइमर्स/डिमेंशिया के नए क्लिनिकल परीक्षण परिणाम उम्मीद जगाते हैं- स्प्रिंट माइंड परीक्षण

एएआईसी 2018 में शोधकर्ताओं ने सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर इंटरवेंशन ट्रायल (स्प्रिंट) (ीजजचेरूध्ध्ूूण्दीसइपण्दपीण्हवअध्ेबपमदबमध्ेलेजवसपब.इसववक.चतमेनतम.पदजमतअमदजपवद.जतपंस.ेचतपदज.ेजनकल ) से डिमेंशिया और संज्ञानात्मक कमी के खतरे सेसंबंधित प्रारंभिक परिणाम पेश किए। स्प्रिंट एक यादृच्छ क्लिनिकल परीक्षण है जो बुजुर्गों में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) नियंत्रित करने के लिए दो रणनीतियों की तुलना करता हैः 120 एमएम एचजी से कम सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर लक्ष्य वाली एक तत्काल रणनीति बनाम 140 एमएम एचजी से कम सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर लक्ष्य वाली स्टैंडर्ड केयर रणनीति।

स्प्रिंट माइंड और कॉग्निशन इन डिक्रिज्ड हाइपरटेंशन (स्प्रिंट माइंड) से यह जांचा गया कि निम्न रक्तचाप का इलाज बढ़ती डिमेंशिया और/या एमसीआई के खतरे को कम करता है या नहीं। इस अध्ययन में भाग लेने वाले 9,361 हाइपरटेंशिव बुजुर्गों में कार्डियोवैस्कुलर का अधिक खतरा था लेकिन उनकी डायबिटीज, डिमेंशिया या स्ट्रोक की जांच नहीं की गई थी। भागीदारों की औसत आयु 67.9 वर्ष (35.6 फीसदी महिलाएं) थी और 8,626 भागीदारों ने कम से कम एक फॉलो-अप संज्ञानात्मक मूल्यांकन पूरा कर लिया था।

स्प्रिंट माइंड में शोधकर्ताओं ने तत्काल रक्तचाप इलाज समूह में एमसीआई के नए मामलों की आश्चर्यजनक रूप से 19 फीसदी कम दर पाई। एमसीआई और संभावित सभी तरह की डिमेंशिया के साझा परिणाम स्टैंडर्ड इलाज समूह के मुकाबले इंटेंसिव में 15 फीसदी कम पाए गए।

कैरिलो ने कहा, “यह अध्ययन पहले के मुकाबले अधिक निर्णायक स्थिति दर्शाता है कि कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें आप कर सकते हैं- खासकर कार्डियोवैस्कुलर रोग के रिस्क फैक्टर्स के से संबंधित - ताकि आप एमसीआई और डिमेंशिया के खतरे को कम कर सकें।”

महिलाओं में गर्भधारण, प्रजनन इतिहास और डिमेंशिया के खतरे के बीच संबंध

अल्जाइमर्स एसोसिएशन 2018 अल्जाइमर्स डिजीज फैक्ट्स एंड फिगर्स के मुताबिक, अल्जाइमर्स से पीड़ित लगभग दो तिहाई अमेरिकी महिलाएं ही हैं।  यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि अमेरिका में अल्जाइमर्स से पीड़ित 5.5 मिलियन लोग 65 या इससे अधिक साल के हैं जिनमें 3.4 मिलियन महिलाएं और 2.0 मिलियन पुरुष हैं।

एएआईसी 2018 में रिपोर्ट किया गया शोध महिलाओं के समस्त जीवनकाल और अल्जाइमर्स रोग तथा अन्य डिमेंशिया के खतरे से इसके संबंधों पर उनके प्रजनन इतिहास की तहकीकात करता हैजिसमें इस क्षेत्रा का पहला बड़े पैमाने का अध्ययन (एन 14,595) शामिल है। शोधकर्ताओं ने पाया कि

-इस अध्ययन के मुताबिक, एक बच्चे वाली महिलाओं के मुकाबले तीन या अधिक बच्चों वाली महिलाओं में डिमेंशिया का खतरा 12 फीसदी कम था।

- गर्भपात की प्रत्येक अतिरिक्त रिपोर्ट बिना गर्भपात वाली महिलाओं की तुलना में डिमेंशिया के 9 फीसदी अधिक खतरे से संबंधित थी।

- जिन महिलाओं में पहला मासिक धर्म16 या इससे अधिक उम्र में हुआ, उनमें 13 साल या इससे कम उम्र की पहला मासिक धर्म का अनुभव पाने वाली महिलाओं के मुकाबले 31 फीसदी अधिक खतरा पाया गया।

- जिन महिलाओं में 45 साल के बाद स्वाभाविक रजोनिवृत्ति पाई गई उनके मुकाबले 45 साल या इससे कम उम्र की रजोनिवृत्त महिलाओं में डिमेंशिया का खतरा 28 फीसदी अधिक पाया गया।

एएआईसी 2018 में पेश ब्रिटेन की 133 बुजुर्ग महिलाओं को शामिल करने वाले एक अलग अध्ययन में पाया गया कि किसी महिला के गर्भधारण के कुल महीनों, खासकर गर्भधारण की पहली तिमाही अल्जाइमर्स के खतरे का एक महत्वपूर्ण सूचक था। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस आबादी के अध्ययन में जो महिला अन्य महिलाओं के मुकाबले 12.5 फीसदी अधिक गर्भधारण माह में गुजारती है, उनमें अल्जाइमर्स का खतरा लगभग 20 फीसदी कम रहता है।

एलजीबी बुजुर्गों में डिमेंशिया प्रबलता का पहला डाटा

समलैंगिक पुरुषों, समलैंगिक महिलाओं और बायसेक्सुअल बुजुर्गों की एक बड़ी आबादी से डिमेंशिया प्रबलता का पहला डाटा शिकागो में आयोजित एएआईसी 2018 में पेश किया गया। शोधकर्ताटों ने 60 साल से अधिक उम्र के उन 3,718 एलजीबी बुजुर्गों में डिमेंशिया की प्रबलता की जांच की जिन्होंने कैसर परमानेंट रिसर्च प्रोग्राम ऑन जीन्स, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ (आरपीजीईएच) में हिस्सा लिया था।

नौ वर्षों के फॉलो-अप के दौरान इस अध्ययन आबादी में डिमेंशिया का प्रसार 8 फीसदी अधिक था। तुलना के लिए अल्जाइमर्स एसोसिएशन 2018 के अल्जाइमर्स डिजीज फैक्ट्स एंड फिगर्स बताता है कि  65 साल से अधिक वाले लोगों में अल्जाइमर्स रोग डिमेंशिया तथा अन्य डिमेंशिया का अमेरिकी प्रसार लगभग 10 प्रतिशत था। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस आबादी वाले अध्ययन में अवसाद, हाइपरटेंशन, स्ट्रोक तथा कार्डियोवैस्कुलर रोग के मामले डिमेंशिया का स्तर बढ़ाने में सहायक कारक हो सकते हैं।

- इस अध्ययन में पाया गया कि अवसाद से पीड़ित एलजीबी बुजुर्गों में डिमेंशिया विकसित होने की संभावना 2.3 गुना अधिक है।

- अध्ययन के मुताबिक दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों में डिमेंशिया विकसित होने की संभावन 69 फीसदी अधिक पाई गई।

- अध्ययन में हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों में डिमेंशिया विकसित होने की संभावना 56 फीसदी अधिक रही।

मौजूदा आकलन बताता है कि अमेरिका में 200,000 से अधिक इस तरह के यौन अल्पसंख्यक डिमेंशिया से पीड़ित हैं लेकिन इस अध्ययन सेपहले इन समूहों के उन लोगों में डिमेंशिया के प्रसार के बारे में तकरीबन कोई जानकारी नहीं थी, जिन्हें एचआईवी/एड्स से संबंधित डिमेंशिया नहीं है। भविष्य के अध्ययन का लक्ष्य 65 साल से अधिक की उम्र वाले एलजीबी बुजुर्गों की आबादी में अल्जाइमर्स तथा अन्य डिमेंशिया के रिस्क फैक्टर्स को बेहतर ढंग से समझने की सख्त जरूरत पर केंद्रित है।

ये निष्कर्ष बुजुर्ग एलजीबी और इस खतरे से जुड़े अन्य लोगों या फिलहाल अल्जाइमर्स रोग या अन्य डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के सांस्कृतिक रूप से सक्षम स्वास्थ्य देखभाल तथा प्रैक्टिस की आवश्यकता पर जोर देते हैं । सामाजिक रूप से अलग-थलग हो जाने की चिंता  और कई बार मित्रा और देखभाल करने वाले परिजनों की सुविधा सीमित हो जाने  को द ेखते हुए एक सहायक स्वास्थ्य देखभाल माहौल तथा देखभाल के संसाधनों का निर्माण करने की सख्त आवश्यकता है।

डिमेंशिया के नॉन-कॉग्निटिव लक्षणों के इलाज की प्रारंभिक सफलताएं और आगामी चुनौतियां

अल्जाइमर्स रोग से जुड़े मेमोरी और सोच के लक्षण जहां सर्वविदित है, वहीं डिमेंशिया के बर्तावगत और मनोवैज्ञानिक लक्षण- झुंझलाहट, व्याकुलता, उदासीनता, अवसाद, भटकना, अनिद्रा, असंयम, खुलापन-अक्सर देखभाल की सबसे बड़ी चुनौतियों का कारण बनते हैं और सहयोगी जीवन या नर्सिंग होम में प्रमुख कारण बनते हैं। अगर इलाज न कराया जाए तो इन लक्षणों की गंभीरता बढ़ सकती है और जीवन की गुणवत्ता कम हो सकती है।

इस समय यू.एस. फूड एंड ड्र ग एडमिनिस्ट्रेशन अल्जाइमर्स डिमेंशिया से पीड़ित लोगों में इन लक्षणों के इलाज के लिए किसी दवा को मंजूरी नहीं दी है। अल्जाइमर्स एसोसिएशन डिमेंशिया से संबंधित व्यवहारों के इलाज के लिए प्रथम श्रेणी की दवा उपचार पद्धति के  विकल्पों के तौर पर नॉन-ड्रग उपाय की सिफारिश करता है। इन उपचार पद्धतियों में वैध पद्धति,  संस्मरण तथा अन्य व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप शामिल हैं।

नबोलिन- सिंथेटिक कनाबिनॉयड- का यादृच्छ , दोहरे स्तर का क्लिनिक परीक्षण एएआईआईसी 2018 में पेश किया गया। यह बताता है कि आंशिक से गंभीर अल्जाइमर्स पीड़ित लोगों की व्याकुलता के इलाज में यह दवा प्रभाव हो सकती है। व्याकुलता में मौखिक या शारीरिक आक्रोश, भावनात्मक तनाव, अधीरता और भागदौड़ शामिल है और यह अल्जाइमर्स से जुड़े सबसे आम व्यवहारगत बदलावों में से एक है और यह देखभाल करने वालों के तनाव का एक महत्वपूर्ण कारण बन सकता है। 14 सप्ताह के ट्रायल के दौरान 39 भागीदारों (77 फीसदी पुरुष, औसत आयु 87 साल) को छह सप्ताह तक कैप्सूल रूप में नबीलोन दिया गया, इसके बाद छह सप्ताह तक प्लासबो दिया गया, जिसमें प्रत्येक उपचार के बीच एक सप्ताह की अवधि खाली रखी गई। नबीलोन पाने वालों में प्लासबो पाने वालों के मुकाबले व्याकुलता में आश्चर्यजनक सुधार देखा गया। इस अध्ययन में प्लासबो (16 फीसदी) के मुकाबले नबीलोन (45 फीसदी) पाने वाले लोगों को ज्यादा शांतचित्त देखा गया।

नोटः एफडीए ने अल्जाइमर्स के रोग या अन्य डिमेंशिया के इलाज या नियंत्राण में मारिजुआना को मंजूरी नहीं दी है। अल्जाइमर्स डिमेंशिया और न ही कोई संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए मारिजोना के इस्तेमाल का समर्थन करने वाला अभी कोई ठोस, निरंतर क्लिनिकल परीक्षण डाटा उपलब्ध नहीं है।

एएआईसी 2018 में पेश किए गए दो अन्य अध्ययनों में शामिल हैंः

- 10 नर्सिंग होम्स के 43 लोगों पर किए गए एक कस्टमाइज्ड लाइटिंग मध्यस्थता अध्ययन में पाया गया कि अध्ययन में शामिल भागीदारों ने नींद की गड़बड़ी, अवसाद और व्याकुलता के मामलों में तेज वृद्धि का अनुभव किया। 

-जोल्पिडम, जोपिक्लोन और जेलप्लोन जैसी ‘‘जेड-ड्रग्स’’ अक्सर बुजुर्गों की स्मरणशक्ति के इलाज में मदद के लिए सुझाई जाती हैं और जब डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्ग इसका इस्तेमाल करते हैं तो उनमें फ्रैक्चर का खतरा 40 फीसदी बढ़ जाता है तथा अधिक खुराक लेने के साथ ही उनका खतरा भी अधिक होते जाने से इसका ताल्लुक देखा गया है। जेड-ड्रग का इस्तेमाल विशेष तौर पर कूल्हे के फ्रैक्चर और मौत से जुड़े अधिकतम खतरे से भी ताल्लुक रखता है। ये आंकड़े यूके क्लिनिकल प्रैक्टिस रिसर्च डाटालिंक का विश्लेषण करने और डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के तीन क्लिनिकल अध्ययनों से लिए गए हैं।

डिमेंशिया के कारण नींद की समस्याओं और अन्य गैर-संज्ञानात्मक लक्षणों के शमन के लिए फिलहाल सुझाई जा रही दवाओं के बेहतर विकल्पों की जरूरत है।

अल्जाइमर्स रोग तथा अन्य डिमेंशिया के क्लिनिकल निदान के संबंध में नए दिशा-निर्देश

निदानात्मक मानक और तकनीकी में प्रगति के दो दशक से अधिक समय बिताने के बावजूद अल्जाइमर्स रोग और अन्य डिमेंशिया के लक्षण भी अक्सर पहचाने नहींजाते हैं या उनका गलत आकलन कर लिया जाता है, जिस कारण उपयुक्त निदान तथा देखभाल करने में देरी होती है और ये दोनों नुकसानदेह तथा महंगे साबित होते हैं।

अभी फिलहाल प्रारंभिक केयर फिजिशियनों के लिए कोई सर्वसम्मत निदानात्मक सिफारिश नहीं की गई है।

एएआईसी 2018 में जैसाकि बताया गया है, अल्जाइमर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यसमूह ने फिजिशियनों और नर्स प्रैक्टिसनरों के लिए 20 सिफारिशें निर्धारित की हैं और इस साल बाद में प्रकाशित करने के लक्ष्य के साथ इस क्षेत्रा के प्रमुखों के इनपुट के जरिये उन्हें प्रोत्साहित कर रहा है। ये सिफारिशें प्रयास बढ़ाने से लेकर व्यक्तियों और उनकी देखभाल करने वालों के साथ सहानुभूतिपूर्वक संवाद करने तक के लक्षणों की पहचान तक फैली हुई हैं। इनमें शामिल हैंः

-सेल्फ रिपोर्ट करने वाले सभी व्यक्तियों या उनकी देखभाल करने वाले पार्टनर या क्लिनिकल रिपोर्ट के संज्ञानात्मक, व्यवहारगत या कार्यात्मक बदलावों को मूल्यांकन के दायरे में रखा जाना चाहिए।

- ‘‘सामान्य रूप से ढलती उम्र’’  के उपयुक्त मूल्यांकन के बगैर चिंताओं को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।

- मूल्यांकन में न सिर्फ मरीज और क्लिनिशियन को शामिल किया जाना चाहिए बल्कि केयर पार्टनर (मसलन, परिवार के सदस्य या विश्वासी) समेत हमेशा सभी को शामिल किया जाना चाहिए।

इसका लक्ष्य व्यावहारिक और विशेष अमेरिकी दिशा-निर्देश देना है जो प्रारंभिक और विशेष व्यवस्था दोनों में प्रासंगिक हैं। फिर ये सिफारिशें लोगों में मेमोरी, सोच शक्ति, संवाद और व्यक्तित्व बदलावों के  मूल्यांकन में अमेरिकी हेल्थकेयर प्रैक्टिसनरों का मार्गदर्शन कर सकती हैं और साथ ही संज्ञानात्मक गड़बड़ी, अल्जाइमर्सरोग या अन्य डिमेंशिया के लक्षणों के लिए भी गाइड कर सकती हैं।

आंत की बैक्टीरिया और लिपिड मेटाबॉलिज्म कैसे अल्जाइमर्स तथा अन्य मस्तिष्क रोगों को प्रभावित कर सकती हैं।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान शोध रिपोर्टों में हमने पाया कि खुराक, खासकर खानपान के संपूर्ण तौर-तरीकों का कैसे मस्तिष्क स्वास्थ्य, संज्ञानात्मक कमी और उम्र ढलने के साथ संभवतः डिमेंशिया की चपेट में आने से ताल्लुक होता है।हमने मस्तिष्क और शरीर के अन्य हिस्सों में उत्तेजना और इसके संकेतकों का ताल्लुक भी अल्जाइमर्स तथा अन्य डिमेंशिया से पाया है। उभरते विज्ञान ने विभिन्न प्रकार की उत्तेजना और ऑटोइम्युन स्थितियों के साथ आंत की बैक्टीरिया में कुछ निश्चित बदलावों का परस्पर संबंध बताए हैं। अध्ययनों से भी प्रदर्शित हुआ है कि खानपान में बदलाव आंत की बैक्टीरिया में बदलाव ला सकता है।

एएआईसी 2018 में पेश चार नए शोधों में पड़ताल की गई है कि आंत और लीवर की कार्यप्रणाली समेत पाचन तंत्रा का कैसे मस्तिष्क और अल्जाइमर्स रोग तथा अन्य डिमेंशिया जैसे मस्तिष्क डिसऑर्डर के साथ संबंध हो सकता है।

कैरिलो ने कहा, “आंत माइक्रोबायोम हालांकि आरंभिक अवस्था में है लेकिन चूंकि यह हमें इस दिशा में एक नई राह दे सकता है कि मस्तिष्क की सेहत के लिए खानपान और पोषाहार क्यों इतना महत्वपूर्ण है, इसलिए यह शोध बहुत आकर्षक हो गया है। यह कार्य हमें यह बता सकता है कि ‘अच्छे फैट’ क्यों और कैसे मस्तिष्क को सेहतमंद रखने में मदद करता है और मस्तिष्क स्वास्थ्य के पोषक विकल्पों के लिए हमें मार्गदर्शन करने में मदद करता है।”

कैरिलो ने कहा, “इसके अलावा यदि आंत की इन बैक्टीरिया को देखा जाए तो ये अल्जाइमर्स रोग के प्रभावी और परिशुद्ध सूचक हैं, ये एक सरल रक्त जांच नॉन-इनवेसिव स्क्रीनिंग टूल के तौर पर उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि हम अभी एक कदम ही बढ़े हैं। हम अभी सही तरीके से यह नहीं जानते कि उनमें देखे जा रहे बदलावों का असल मतलब क्या है- यही कारण बनते हैं या प्रभावित करते हैं।”

अल्जाइमर्स रोग के क्लिनिकल परीक्षणों में नियुक्ति तथा भागीदारी की राष्ट्रीय रणनीति

एएआईसी 2018 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) स्थित  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग (एनआईए) ने अल्जाइमर्स एसोसिएशन के सहयोग से अल्जाइमर्स रोग के क्लिनिकल शोध में नियुक्ति और भागीदारी के लिए राष्ट्रीय रणनीति की प्रगति की रिपोर्टपेश की है- अल्जाइमर्स शोध अध्ययनों के लिए अध्ययन क्षेत्रों और शोधकर्ताओं की नियुक्ति तथा कार्यकर्ताओं को रोके रखने में मदद के लिए व्यावहारिक, अतिसक्रिय उपायों की रूपरेखा खींचने केलिए किया गया एक प्रयास। स्थानीय स्तर पर अफ्रीकी अमेरिकी समुदायों में काम करने वाले अल्जाइमर के दो शोध नियुक्ति कार्यक्रमों से एएआईसी 2018 में सफल प्रयास और पद्धतियों की रिपोर्ट पेश की गई जिसमें अल्जाइमर्स एसोसिएशन ट्रायलमैच (आर) (https://www.alz.org/alzheimers-dementia/research_progress/clinical-trials/about-clinical-trials) में पंजीकरण भी शामिल है।

अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस (आर) (एएआईसी(आर))

अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस (एएआईसी) अल्जाइमर्स और अन्य डिमेंशिया पर केंद्रित पूरी दुनिया में फैले शोधकर्ताओं का सबसेबड़ा समूह है। अल्जाइमर्स एसोसिएशन के शोध कार्यक्रम के तहत एएआईसी डिमेंशिया के बारे में नई जानकारी प्रसारित करने के लिए एक उत्प्रेरक का काम करती है और एक अहम, कॉलेज के शोध समुदाय को सहयोग करती है।

एएआईसी 2018 होम पेजः alz.org/aaic

एएआईसी 2018 न्यूजरूमः alz.org/aaic/press

अल्जाइमर्स एसोसिएशन (आर) के बारे में

अल्जाइमर्स एसोसिएशन अल्जाइमर्स की देखभाल, सहयोग तथा शोध में एक अग्रणी स्वैच्छिक स्वास्थ्य संगठन है। हमारा उद्देश्य शोध के जरिये अल्जाइमर्स रोग को मिटाना है ताकि सभी प्रभाविं को देखभाल एवं सहयोग मिल सके और इसमें वृद्धि की जा सके और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के जरिये मनोरोग के खतरे को कम किया जा सके। हमारा मकसद विश्व को अल्जाइमर्स मुक्त बनाना है। देखें alz.org (http://www.alz.org/) या कॉल करें 800.272.3900

स्रोतः अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस

संपर्कः अल्जाइमर्स एसोसिएशन एएआईसी प्रेस ऑफिस, 1 312 949 8710,

aaicmedia@alz.org, नाइल्स फ्रेंज, अल्जाइमर्स एसोसिएशन, 1 312 335 5777,

niles.frantz@alz.org

संपादक : यह विज्ञप्ति आपको एशियानेट के साथ हुए समझौते के तहत प्रेषित की जा रही है । पीटीआई पर इसका कोई संपादकीय उत्तरदायित्व नहीं है ।  

पीआरन्यूजवायर- एशियानेट : रंजन

 

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