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स्रोत: Alzheimer''s Association International Conference
श्रेणी: Medical and Health Care
अध्ययन बताता है कि ब्लड प्रेशर पर तत्काल नियंत्रण आंशिक संज्ञानात्मक गड़बड़ी (एमसीआई) और एमसीआई के खतरे तथा डिमेंशिया के साझा खतरे को कम करता है
30/07/2018 2:47:56:047PM

अल्जाइमर्स एसोसिएशन एक शिकागो

अध्ययन बताता है कि ब्लड प्रेशर पर तत्काल नियंत्रण आंशिक संज्ञानात्मक गड़बड़ी (एमसीआई) और एमसीआई के खतरे तथा डिमेंशिया के साझा खतरे को कम करता है

शिकागो, 25 जुलाई, 2018, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट।

-प्लसः अल्जाइमर्सअध्ययन का जिनोमिक विश्लेषण एक परिशुद्ध मेडिसिन उपाय को सक्षम बना सकता है।

शिकागो में आयोजित अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस (https://www.alz.org/aaic/about/overview.asp) (एएआईसी) 2018 में पेश संघीय वित्तपोषित स्प्रिंट माइंड अध्ययन से नए शोध परिणामों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर की आक्रामक कमी के जरिये पहली बार आंशिक संज्ञानात्मक गड़बड़ी (एमसीआई)’ और एमसीआई तथा डिमेंशिया’’ के खतरे में महत्वपूर्ण कमी प्रदर्शित की गई।

लोगो-  https://mma.prnewswire.com/media/721324/AAIC_2018_Logo.jpg

इंटरननल मेडिसिन एंड एपिडेमियोलॉजी के प्रोफेसर तथा वेक फॉरेस्ट स्कूल ऑफ मेडिसिन में जेरोंटोलॉजी एंड गेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख जेफ डी. विलियमसन, एमडी, एमएचएस ने कहा, “अकेले एमसीआई और एमसीआई तथा सभी तरह के डिमेंशिया के मामलों में कमी प्रदर्शित करने के लिए यह पहला यादृच्छ क्लिनिकल ट्रायल है।” विलियमसन ने एएआईसी 2018 में इन परिणामों की रिपोर्ट पेश की।

इस बड़े पैमाने के दीर्घकालिक क्लिनिकल परीक्षण के परिणाम हाईब्लड प्रेशर के इलाज के जरिये आज की तारीख तक एमसीआई और डिमेंशिया के खतरे को कम करने को लेकर सबसे मजबूत साक्ष्य प्रदान करते हैं। हाई ब्लड प्रेशर वैश्विक स्तर पर कार्डियोवैस्कुलर रोग का एक सबसे बड़ा कारण है।

अल्जाइमर्स एसोसिएशन (https://www.alz.org/) के चीफ साइंस ऑफिसर मारिया सी. कैरिलो, पीएचडी ने कहा, “यह अध्ययन पहले की तुलना में सबसे ज्यादा यह निर्णायक परिणाम प्रदर्शित करता है कि एमसीआई और डिमेंशिया के अपने खतरे को कम करने के लिए कुछ चीजें आप कर सकते हैं- खासकर कार्डियोवैस्कुलर रोग के रिस्क फैक्टर्स मामले में। वैश्विक स्तर पर एमसीआई और डिमेंशिया के नए मामलों को कम करने के लिए हमें वह सब कुछ करना चाहिए, जो हम प्रोफेशनल्स और व्यक्तिगत तौर पर कर सकते हैं - इस अध्ययन में निर्दिष्ट स्तरों का ब्लड प्रेशर कम करने के लिए हम यह सब कर सकते हैं जिसे हम कार्डियोवैस्कुलर खतरे को कम करने में लाभकारी मानते हैं।“

कैरिलो ने बताया कि ये परिणाम विकसित पश्चिमी सभ्यताओं में डिमेंशिया के नए मामलों में कमी प्रदर्शित करने वाले हालिया आबादी के आंकड़ों के बिल्कुल उपयुक्त हैं। डिमेंशिया की ये सबसे कम दरें हासिल की जा सकती हैं क्योंकि इन समुदायों ने मेडिकेशन प्रबंधन, धूम्रपान में कमी और स्वस्थ जीवनशैली के प्रतिअधिकतम जागरूकता  के जरिये कार्डियोवैस्कुलर रोग के रिस्क फैक्टर्स पर नियंत्राण बढ़ाना शुरू कर दिया है।

अल्जाइमर्स एसोसिएशन हालिया शोध साक्ष्यों के आधार पर लव योर ब्रेन (https://www.alz.org/help-support/brain_health/10_ways_to_love_your_brain ) के प्रति 10 तरीकों की पेशकश करती है।

कैरिलो ने कहा, “एमसीआई और डिमेंशिया के कम होने का भविष्य किसी व्यक्ति के दवाओं और संशोधन योग्य रिस्क फैक्टर मध्यस्थता के तालमेल से संपूर्ण इलाज में हो सकता है- जैसाकि अब हम दिल की बीमारी में करते हैं। ब्लड प्रेशर के ये नए निष्कर्ष यू.एस. प्वाइंटर स्टडी के लिए हमारे आकलन स्तर को बढ़ाते हैं, जिसमें कई तत्वों से जीवनशैली की मध्यस्थता के तौर पर कार्डियोवैस्कुलर रिस्क फैक्टर का प्रबंधन शामिल है।”

जोखिम (यू.एस. प्वाइंटर) (https://alz.org/us-pointer/overview.asp) कम करने के लिए लाइफस्टाइल इंटरवेंशन के जरिये अल्जाइमर्स एसोसिएशन यू.एस. स्टडी यह मूल्यांकन करने के लिए अल्जाइमर्स एसोसिएशन द्वारा वित्तपोषित दो वर्षीय क्लिनिकल परीक्षण है कि लाइफस्टाइल इंटरवेंशन संज्ञानात्मक कमी के बढ़ते खतरे पर बुजुर्गों में संज्ञानात्मक गतिविधि को सुरक्षित किया जा सकता है या नहीं। इन हस्तक्षेपों में शारीरिक व्यायाम, पोषाहार परामर्श तथा परिशोधन, संज्ञानात्मक एवं सामाजिक प्रोत्साहन और स्वास्थ्य स्थिति का संवर्द्धित आत्म-प्रबंधन शामिल है।

इंटेंसिव ब्लड प्रेशर कंट्रोल आश्चर्यजनक रूप से एमसीआई के नए मामलों और एमसीआई तथा डिमेंशिया के संयुक्त खतरे को कम करता हैः एएआईसी 2018 में स्प्रिंट माइंड स्टडी के जरिये विलियमसन और उनके सहयोगियों ने सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर इंटरवेंशन ट्रायल (स्प्रिंट) (https://www.nhlbi.nih.gov/science/systolic-blood-pressure-intervention-trial-sprint-study) से डिमेंशिया और संज्ञानात्मक अभाव के खतरे से संबंधित आरंभिक नतीजों को पेश किया। स्प्रिंट एक यादृच्छ क्लिनिकल परीक्षण है जो बुजुर्गों में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) प्रबंधित करने के लिए दो रणनीतियों की तुलना करता हैः 120 एमएम एचजी से कम सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर लक्ष्य के साथ एक सघन रणनीति बनाम 140 एमएम एचजी से कम सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर लक्ष्य के साथ स्टैंडर्ड केयर रणनीति। पूर्व में स्प्रिंट ने यह प्रदर्शित किया कि अधिक सघन ब्लड प्रेशर नियंत्रण कार्डियोवैस्कुलर अस्वस्थत और मृत्यु दर (एनईजेएम, 11-26-15) के खतरे को कम करता है। स्प्रिंट ने ने 2017 अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी हाई ब्लड प्रेशर क्लिनिकल दिशा-निर्देशों की सूचना में मदद की।

कम किए गए हाइपरटेंशन (स्प्रिंट माइंड) में स्प्रिंट मेमोरी और संज्ञानात्मकता की जांच की गई कि निम्न ब्लड प्रेशर का इलाज डिमेंशिया और/या एमसीआई के बढ़ते खतरे को कम करने का लक्ष्य रखता है या नहीं और मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) द्वारा प्रदर्शित मस्तिष्क में व्हाइट मैटर आघात की मात्रा कम होती है या नहीं।

इस अध्ययन में कार्डियोवैस्कुलर खतरे बढ़े हुए 9,361 हाइपरटेंशिव बुजुर्ग व्यक्ति शामिल थे (जो फ्रेमिंघम रिस्क स्कोर पर आधारित था) लेकिन उनमें डायबिटीज, डिमेंशिया या पूर्ववर्ती स्ट्रोक की जांच नहीं की गई थी। भागीदारों की औसत आयु 69.9 वर्ष (35.6 फीसदी महिलाएं) थी और 8,626 (92.1 फीसदी) ने कम से कम एक फॉलो-अप संज्ञानात्मक मूल्यांकन पूरा कर लिया था। स्प्रिंट माइंड में प्रारंभिक परिणाम संभावित डिमेंशिया के मामले थे। दूसरे परिणाम में एमसीआई और एमसीआई तथा / या संभावित डिमेंशिया को शामिल किया गया था। प्रत्येक परिणाम एक विशेषज्ञ पैनल द्वारा लिया गया निर्णय था जो प्रत्येक उपचार समूह में किसे शामिल किया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी।

स्प्रिंट के लिए नियुक्ति अक्तूबर 2010 में शुरू की गई। एक वर्ष के दौरान माध्य सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर संघन उपचार समूह में 121.4 एमएमएचजी और स्टैंडर्ड उपचार समूह में 136.2 एमएमएचजी था। अगस्त 2015 में 3.26 वर्ष के माध्य फॉलो-अप के बाद कार्डियोवैस्कुलर रोग (सीवीडी) लाभ के कारण उपचार रोक दिया गया लेकिन संज्ञानात्मक निर्धारण जून 2018 तक जारी रहा।

इंटरवेंशन- एनईजेएम 11-26-15 केमुताबिक, “एंटीहाइपरटेंशिव एजेंटों के सभी बड़े वगों को औपचारिक रूप से शामिल किया गया और भागीदारों को बिना खर्च के यह सुविधा प्रदान की गई। स्प्रिंट के जांचकर्ता अन्य एंटीहाइपरटेंशिव मेडिकेशंस (अध्ययन से यह नहीं बताया गया) का भी सुझाव दे सकते थे। प्रोटोकॉल को थियाजाइड-टाइप डाययूरेटिक्स (फर्स्ट-लाइन एजेंट के तौर पर प्रोत्साहित), लूप डाययूरेटिक्स (एडवांस्ड क्रोनिक किडनी रोग) और बीटा-एड्रेनर्जिक ब्लॉकर्स (कोरोनरी आर्टरी डिजीज वालों के लिए) समेत कार्डियोवैस्कुलर परिणामों में कमी के लिए ठोस साक्ष्य के साथ दवा श्रेणियों के इस्तेमाल से प्रोत्साहित किया गया लेकिन यह अनिवार्य नहीं था।”

“भागीदारों पर पहले तीन महीने नजर रखी गई और इसके बाद प्रत्येक तीन महीने पर उन्हें देखा गया। सघन उपचार समूह में भागीदारों की मेडिकेशन को 120 एमएम एचजी से कम के सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को लक्ष्य करने के मासिक आधार पर समायोजित किया गया। स्टैंडर्ड-उपचार समूह में भागीदारों की मेडिकेशन 135 से 139 एमएम एचजी के सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर का लक्ष्य करते हुए समायोजित की गई और यदि सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर एकल विजिट में 130 एमएम एचजी या दो लगातार विजिट के दौरान 135 एमसमएचजी से कम रहा तो उनकी खुराक घटाई गई। प्रबंधन रणनीति के तहत जीवनशैली में सुधार लाने को प्रोत्साहित किया गया।”

स्प्रिंट माइंड में शोधकर्ताओं ने रणनीतिक तौर पर सघन ब्लड प्रेशर उपचार समूह में एमसीआई के आश्चर्यजनक रूप से नए मामलों की 19 फीसदी कम दर (पी, 0.01) पाई। एमसीआई प्लस डिमेंशिया के सभी संभावित कारण के साझा परिणाम सघन बनाम स्टैंडर्ड उपचार समूह में 15 फीसदी (पी, 0.02) कम रहा। संभिवत डिमेंशिया में अकेले (एचआर, 0.83, पी 0.10) गैर-महत्वपूर्णकमी देखी गई।

प्रतिकूल घटनाएं- एनईजेएम, 11726-15 के मुताबिक, “सघन-उपचार समूह (38.3 फीसदी) में 1793 भागीदारों और स्टैंडर्ड उपचार समूह (37.1 फीसदी) (सघन उपचार के साथ खतरनाक दर, 1.04, पी 0.25) में 1736 भागीदारों में गंभीर प्रतिकूल घटनाएं पाई गईं। हाइपरटेंशन, सिंकोप, इलेक्ट्रोलाइट असामान्यता और एक्यूट किडनी इंजरी या एक्युट रेनल फेल्योर की गंभीर प्रतिकूल घटनाएं स्टैंडर्ड उपचार समूह के मुकाबले सघन उपचार समूह में अधिक बार देखी गई लेकिन खतरनाक गिरने या ब्रेडिकेडिया की घटनाएं नहीं पाई गईं। क्लिनिकल विजिट के दौरान आंका गया ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन सघन उपचार समूह में महत्वपूर्ण रूप से कम सामान्य था। सघन उपचार समूह के कुल 220 भागीदारों (4.7 फीसदी) और स्टैंडर्ड-उपचार समूह के 118 भागीदारों (2.5 फीसदी) में गंभीर प्रतिकूल घटनाएं देखी गईं जिसे संभवतः या निश्चित तौर पर इंटरवेंशन (खतरा अनुपात 1.88, पी 0.001 से कम)(लेकिन समूह द्वारा एसएई की संपूर्ण संख्या नहीं बदली) से संबंधित के तौर पर वर्गीकृत किया गया। 75 वर्ष या इससे अधिक आयु के भागीदारों में उपचार एसाइनमेंट के मुताबिक प्रतिकूल घटनाओं में अंतर की माप और पद्धति संपूर्ण समूह में एक समान रहा।”

विलियमसन ने कहा, “ये परिणाम पूर्ण नियंत्रित ब्लड प्रेशर बनाए रखने का समर्थन करते हैं, खासकर 50 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों में। स्प्रिंट-माइंड की एक खास क्षमता यह है कि भागीदारों में 30 फीसदी अफ्रीकी अमेरिकी और 10 फीसदी हिस्पेनिक थे।

विलियमसन ने आगे कहा, “यह एक तरह से डॉक्टरों और बढ़े हुए ब्लड प्रेशर वाले समुदाय में रहने वाले उनके मरीजों की बहुतायत के लिए है कि उन्हें अपने दिल और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए काम करना चाहिए। संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए ये नए परिणाम अधेड़ उम्र में स्वस्थ जीवनशैली शुरू करने और इसेबनाए रखने के लिए एक और ठोस औचित्य प्रदान करते हैं।”

स्प्रिंट माइंड एमआरआई के परिणाम

एएआईसी 2018 में संबंधित तत्व पेश करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ पेनिसिल्वेनिया, फिलाडेल्फिया के इलिया नसरल्ला, एमडी, पीएचडी ने स्प्रिंट माइंड के उन 673 भागीदारों के आरंभिक परिणाम पेश किए जिन्हें ब्रेन मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के लिए नियुक्त किया गया था। आरंभिक परिणामों में कुल श्वेत पदार्थ क्षति (डब्ल्यूएमएल) मात्रा और कुल मस्तिष्क मात्रा (टीबीवी) में बदलाव को शामिल किया गया था। फॉलो-अप एमआरआई 3.98 वर्ष के माध्य पोस्ट-रैंडमाइजेशन पर 454 (67.4 फीसदी) भागीदारों के लिए प्राप्त किया गया था। 

इस उप-शोध में डब्ल्यूएमएल मात्रा दोनों तरह के उपचार समूहों में बढ़ी हुई थी, हालांकि यह वृद्धि सघन उपचार समूह में थोड़ी कम थी। संपूर्ण मस्तिष्क मात्रा बदलाव में कोई अहम अंतर नहीं पाया गया।

- सघन उपचार समूह में डब्ल्यूएमएल मात्रा स्टैंडर्ड उपचार समूह (माध्य अंतर, 0.64 घन सेंटीमीटर, पी 0.004) के 0.92 घन सेंटीमीटर के मुकाबले 0.28 घन सेंटीमीटर बढ़ी हुई थी।

- सघन उपचार समूह में टीबीवी 27.3 घन सेंटीमीटर घटी हुई थी जबकि इसके मुकाबले स्टैंडर्ड उपचार समूह (माध्य अंतर 2.54 घन सेंटीमीटर, पी 0.16) में 24.8 घन सेंटीमीटर घटी हुई थी।

श्वेत पदार्थ की क्षति वेसेल संबंधी छोटी बीमारी और स्ट्रोक, डिमेंशिया और उच्च मृत्यु दर के अधिकतम खतरे का निरंतर सूचक है। श्वेत पदार्थ की क्षति को जहां वैस्कुलर डिमेंशिया के खतरे बढ़ाने के तौर पर माना जाता है, वहीं ये अल्जाइमर्स रोग का भी एक रिस्क फैक्टर हो सकता है। डिमेंशिया पीड़ित लोगों में अल्जाइमर्स रोग और श्वेत पदार्थ की कमी एक साथ हो सकती है। शोध में प्रदर्शित किया गया कि जब लोगों में एक से अधिक प्रकार के रोग संबंधी बदलाव होते हैं, उनमें संज्ञानात्मकता के परिणाम अधिक पाए जाते हैं।

एनावेक्स (आर) 2.73 के साथ फेज 2ए अल्जाइमर्स अध्ययन का जिनोमिक विश्लेषण एक अहम मेडिसिन उपाय में सक्षम हो सकता है

पेरिस स्थित सोरबोन यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरोलॉजी के एएक्सए रिसर्च फंड एंड सोरबोन यूनिवर्सिटी एक्सेलेंस अध्यक्ष प्रोफेसर हेराल्ड हैम्पेल, एमडी, पीएचडी, एमए, एमएससी कहते हैं, “परिशुद्ध मेडिसिन में सही समय पर सही मरीज को उपयुक्त उपचार पद्धति देना शामिल है, जो उसके विशेष बायोलॉजिकल मेकअप के अनुकूल हो।”

परिशुद्ध मेडिसिन मरीज की खास स्थिति और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपचार एवं प्रैक्टिस के साथ स्वास्थ्य सेवा के अनुकूलन और व्यक्तिकरण पर जोर देती है, जिसके बारे में अक्सर जीन्स, पर्यावरण तथा लाइफस्टाइल को लेकर बातें होती हैं। कई बार इसे पर्सनलाइज्ड मेडिसिन भी कहा जाता है और यह कैंसर तथा सांस की बीमारियों के लिए साझा उपचार होता है।

एएआईसी 2018 में हैम्पेल तथा उनके सहयोगियों ने अल्जाइमर्स थेरापी के परीक्षणों में परिशुद्ध मेडिसिन की ओर एक कदम करीब आने के लिए एक नवप्रवर्तक प्रयास के परिणाम पेश किए। एनावेक्स लाइफ साइंसेज (एवीएक्सएल) के तहत आंशिक से विकसित अल्जाइमर्स रोग के 32 मरीजों में एक चुनिंदा सिग्मा-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट के तौर पर एनावेक्स (आर) 2.73 के साथ  57 सप्ताह का फेज 2ए अध्ययन किया गया और अध्ययन में शामिल सभी भागीदारों के समस्त जिनोम डीएनए और आरएनए का विश्लेषण किया गया जिसके परिणामस्वरूप 33,311 जीन्स और 860 तरीकों का विश्लेषण हो पाया।

कंपनी ने सिग्माआर1 समेत दवा के असर जानने वाले कई जेनेटिक रूपों की पहचान की , जो एनावेक्स (आर) 2.73 और मेमोरी फंक्शन में शामिल जीन सीओएमटी का लक्ष्य है। उन्होंने आगे पाया कि इन वेरिएंट्स (अध्ययन समूह के लगभग 20 फीसदी) के लोगों ने- लगभग 80 फीसदी आबादी को छोड़कर- संज्ञानात्मकता (एमएमएसई) और दैनिक जीवन (एडीसीएस-एडीएल) (पी 0.05 से कम) की गतिविधियों  के स्वर्ण मानक परीक्षणों पर स्कोर में सुधार के परिणाम दिए।

- आंशिक रोग (बेसलाइन एमएमएसई आईवाई 20) और सिग्माआर 1 वैरिएंट से पीड़ितों को छोड़कर इन भागीदारों ने 57 सप्ताह में 1.7 एमएमएसई और 3.9 एडीसीएस-एडीएल के सुधार परिणाम दिए।

- सीओएमटी वैरिएंट के अतिरिक्त निष्कासन का परिणाम 57 सप्ताह में 2.0 एमएमएसई और 4.9 एडीसीएस-एडीएल का स्कोर सुधार देता है।

हैम्पेल ने कहा, “यह अध्ययन अल्जाइमर्स में ‘मैजिक बुलेट, वन-साइज-फिट्स-ऑल’ के दवा विकास से एक आकर्षक कदम आगे प्रदर्शित करता है, जो ऑन्कोलॉजी के क्षेत्रा में लक्षित उपचार क्षमता के बाद है। हमारा नजरिया है कि एक परिशुद्ध मेडिसिन उपाय हमें अधिक शुद्धता के साथ अल्जाइमर्स के कारणों और वृद्धि के मुख्य कारणों के इलाज और बचाव में सक्षम बनाएगा। हमारी उत्सुकता है कि इस अनुकूल उपाय के साथ कई अध्ययनों की योजना बनाई जाए या उसकी रूपरेखा तैयार की जाए।”

कंपनी के मुताबिक, मरीज चयन के ये सूचक आगामी एनावेक्स (आर) 2-73 फेज 2ए/3 अध्ययन में लागू किए जाएंगे।

अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस (आर) (एएआईसी(आर))

अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस (एएआईसी) अल्जाइमर्स और अन्य डिमेंशिया पर केंद्रित पूरी दुनिया में फैले शोधकर्ताओं का सबसेबड़ा समूह है। अल्जाइमर्स एसोसिएशन के शोध कार्यक्रम के तहत एएआईसी डिमेंशिया के बारे में नई जानकारी प्रसारित करने के लिए एक उत्प्रेरक का काम करती है और एक अहम, कॉलेज केशोध समुदाय को सहयोग करती है।

एएआईसी 2018 होम पेजः alz.org/aaic

एएआईसी 2018 न्यूजरूमःalz.org/aaic/press

अल्जाइमर्स एसोसिएशन (आर) के बारे में

अल्जाइमर्स एसोसिएशन अल्जाइमर्स की देखभाल, सहयोग तथा शोध में एक अग्रणी स्वैच्छिक स्वास्थ्य संगठन है। हमारा उद्देश्य शोध के जरिये अल्जाइमर्स रोग को मिटाना है ताकि सभी प्रभाविं को देखभाल एवं सहयोग मिल सके और इसमें वृद्धि की जा सके और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के जरिये मनोरोग के खतरे को कम किया जा सके। हमारा मकसद विश्व को अल्जाइमर्स मुक्त बनाना है। देखें alz.org (http://www.alz.org/) या कॉल करें 800.272.3900

’माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट (एमसीआई)- एमसीआई याददाश्त और सोच क्षमता समेत हल्की लेकिन संज्ञानात्मक क्षमताओं में उल्लेखनीय और पर्याप्त कमी का कारण बनता है लेकिन ये बदलाव दैनिक जीवन या स्वतंत्रा कार्यों में हस्तक्षेप करने के लिए उतने गंभीर नहीं पाए जाते हैं। एमसीआई पीड़ित किसी व्यक्ति में अल्जाइमर्स या अन्य डिमेंशिया बढ़ने का खतरा अधिक देखा गया है। हालांकि एमसीआई हमेशा डिमेंशिया का ही कारण नहीं बनता है। कुछ लोगों में एमसीआई सामान्य संज्ञानात्मकता लौट भी आती है या वे स्थिर हो जाते हैं।

’’डिमेंशिया- याददाश्त खत्म हो जाने या अन्य संज्ञानात्मक क्षमता की एक सामान्य घटना दैनिक जीवन में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त गंभीर होती है। डिमेंशिया कोई अलग रोग नहीं है। यह एक ऐसी घटना है जो लक्षणों के एक समूह का वर्णन करता है। अल्जाइमर्स रोग के 60 से 80 फीसदी मामले डिमेंशिया से संबंधित होते हैं। वैस्कुलर डिमेंशिया एक स्ट्रोक केबाद आता है और यह  कॉमन डिमेंशिया का दूसरा सबसेबड़ा टाइप है। कई अन्य स्थितियां भी होती हैं जो डिमेंशिया के लक्षणों को प्रभावित कर सकती हैं जिनमें कुछ ठीक भी हो सकती हैं, मसलन थायराइड की समस्याएं या विटामिन की कमी।

’’’अल्जाइमर्स रोग और अल्जाइमर्स रोग डिमेंशिया-अल्जाइमर्स एक प्रकार का डिमेंशिया है जो याददाश्त, सोच और व्यवहार की समस्याओं का कारण बनता है। ये लक्षण अमूमन धीरे-धीरे विकसित होते हैं और समय के साथ बिगड़ते चले जाते हैं, जो दैनिक कार्यों में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त रूप सेगंभीर माने जाते हैं। प्लाक्स और टैंजल्स नामक दो असामान्य संरचनाएं अल्जाइमर्स रोग में स्नायु तंत्रा को क्षतिग्रस्त या खत्म करने के मुख्य जिम्मेदार माने जाते हैं। प्लाक्स स्नायु तंत्रों केबीच खली जगह में जमा होते रहने वाली बीटा-एमिलायड नामक प्रोटीन फ्रैगमेंट हैं। टैंजल्स एक अन्य प्रोटीन जिसे ताउ कहा जाता है, कोशिकाओं के अंदर जमनेलगती है। यह स्नायु तंत्रा कोबाधित और खत्म कर देती है जिस कारण याददाश्त खत्म हो जाती है, व्यक्तिगत बदलाव आता है, दैनिक गतिविधियों में समस्याएं आने लगती हैं और अल्जाइमर्स रोग डिमेंशिया के अन्य लक्षण उभरने लगते हैं।

- जेफ विलियमसन, एमडी, एमएचएस, एट ऑल। रैंडमाइज्ड ट्रायल ऑफ इंटेंसिव वर्सेज स्टैंडर्ड सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कंट्रोल एंड रिस्क ऑफ माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट एंड डिमेंशियाः स्प्रिंट माइंड के परिणाम। वित्तपोषणः नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (एनएचएलबीआई), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीजेज (एनआईडीडीके), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग (एनआईए) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक (एनआईएनडीएस) समेत यू. एस. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच), यू. एस. डिपार्टमेंट ऑफ वेटरंस अफेयर्स।

- इलिया नसरल्ला, एमडी, पीएचडी, एट ऑल। ए रैंडमाइज्ड ट्रायल ऑफ इंटेंसिव वर्सेज स्टैंडर्ड सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कंट्रोल ऑन ब्रेन स्ट्रक्चरः स्प्रिंट माइंड एमआरआई के परिणाम। वित्तपोषणः नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट , नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीजेज , नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक समेत यू. एस. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ , यू. एस. डिपार्टमेंट ऑफ वेटरंस अफेयर्स। 

- प्रोफेसर हेराल्ड हैम्पेल, एमडी, पीएचडी एट ऑलफ फुल जिनोमिक एनालिसिस ऑफ एनावेक्स (आर 2.73 फेज 2ए अल्जाइमर्स डिजीज स्टडी आइडेंटिफाइज बायोमार्कर्स एनेबलिंग टारगेटेड थेरापी एंड ए प्रेसिशन मेडिसिन एप्रोच।) वित्तपोषणः एनावेक्स लाइफ साइंसेज कॉर्प.।

- प्रोफेसर हेराल्ड हैम्पेल, एमडी, पीएचडी एट ऑल। सिस्टमेटिक प्रोसेसिंग ऑफ फुल जिनोमिक एनालिसिस ऑफ एनावेक्स (आर) 2.73 फेज 2ए अल्जाइमर्स डिजीज स्टडी आइडेंटिफाइज बायोमार्कस एनेबलिंग ए प्रेसिशन मेडिसिन एप्रोच।


वित्तपोषणः एनावेक्स लाइफ साइंसेज कॉर्प.।

स्रोतः अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस

संपर्कः अल्जाइमर्स एसोसिएशन एएआईसी प्रेस ऑफिस, 1 312 949 8710,

aaicmedia@alz.org, नाइल्स फ्रेंज, अल्जाइमर्स एसोसिएशन, 1 312 335 5777,

niles.frantz@alz.org

संपादक : यह विज्ञप्ति आपको एशियानेट के साथ हुए समझौते के तहत प्रेषित की जा रही है । पीटीआई पर इसका कोई संपादकीय उत्तरदायित्व नहीं है । 

पीआरन्यूजवायर- एशियानेट : रंजन

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