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तैझोउ में हीही संस्कृति: क्यों तटीय शहर का सौहार्द केंद्रित सिद्धांत चीन से इतर गूंजता है

Updated: 29/11/2022

तैझोउ, चीन, 28 नवंबर, 2022, शिन्हुआ—एशियानेट।

चीन की जनता शांति और सौहार्द का बहुत ज्यादा समर्थन करती है  

यह संभवतया सबसे बड़ा प्रभाव है कि कई विदेशियों ने चीनी सामाजिक सिद्धांतों को अपना लिया है। यह सच है कि चीन की जनता ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से मिल—जुलकर रहने को बढ़ावा देती है जो चीन की कूटनीति का मुख्य केंद्र है।

सौहार्द के अलावा बढ़ते वैश्वीकरण के दौर में चीन भी एकीकृत विकास को बढ़ावा दे रहा है और 'सौहार्द में साझा विकास हासिल' कर रहा है।

यह शब्द 'ही' उच्चारण वाले दो चीनी अक्षरों से बना है लेकिन इसका अर्थ अलग है। पहले वाले ही का मतलब सौहार्द, शांति, तटस्थता आदि है जो कई तत्वों के बीच सौहार्द और सह—अस्तित्व पर जोर देता है। बाद वाले ही का मतलब है सम्मिलन, एकीकरण, एकता आदि, जो लोगों के बीच सहयोग तथा एकीकरण की ओर इंगित करता है। संक्षेप में हीही संस्कृति का मतलब साझा आधार तलाशना जबकि मतभेदों को दूर रखते हुए सौहार्दपूर्ण सह—अस्तित्व और समन्वित विकास पर जोर देता है।  

हीही ऐसा शब्द है जो समकालीन दौर में शानदार तरीके से चमकता है। यह पीपुल्स रिपब्लिक आॅफ चाइना की स्थापना के बाद का कोई नया विचार नहीं है। दरअसल, इसका हजारों वर्षों का इतिहास है और इसका एक महत्वपूर्ण जन्मस्थल तैझोउ है जो पूर्वी चीन का तटीय शहर है।

तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा और एक तरफ समुद्र वाले तैझोउ के तियानतेई माउंटेन में कनफ्यूजियनिज्म, ताओइस्म और बौद्ध तीन अलग—अलग दार्शनिक स्कूलों में प्राचीन काल से ही शिक्षा दी जाती है और ये सभी एक—दूसरे से मिले हुए हैं जो सांस्कृतिक सौहार्द का एक खास नजारा बनाते हैं।

हीही संस्कृति की प्रतिनिधित्व हस्तियां तैझोउ में रही हैं। तियानतेई काउंटी में आप हीही देवताओं की तस्वीर आसानी से देख सकते हैं जिसमें एक व्यक्ति हाथ में कमल का फूल लिए होता है जबकि दूसरा व्यक्ति खजाने का बक्सा। यह तस्वीर आपसी सम्मान की पोषित मित्रता और सौहार्दपूर्ण सह—अस्तित्व के प्रति प्रेम को दर्शाती है।  

हीही भगवान के आदिरूप हैन शान्जी हैं, एक संत कवि जो तांग वंश में तियानतेई माउंटेन के एकांत में रहते थे और गुकिंग मंदिर के साधु शी दे हैं। 1,200 साल से भी पहले दोनों हस्तियों ने कई हृदयस्पर्शी कविताओं और आख्यानों से भाईचारा तथा मित्रता विकसित की है। किंग वंश के शासक यांगझेंग के शासनकाल में उन्हें हीही देवता कहा जाता था जो बाद में हीही संस्कृति के प्रतीक बन गए।

तैझोउ में हीही संस्कृति की मौजूदगी न सिर्फ लंबे इतिहास और प्रसिद्ध कथाओं के बारे में है बल्कि इस पूर्वी तटीय शहर की अर्थव्यवस्था, सामाजिक एवं पारिस्थितिकी शासन के लगभग प्रत्येक पहलू में इसे देखा जा सकता है। हीही संस्कृति तैझोउ की विकास उपलब्धियों के लिए पवित्र विधि को रेखांकित करती है।

चीनी हीही संस्कृति के गृहनगर के अलावा तैझोउ को चीन के साझा स्टॉक सहकारिता प्रणाली का जन्मस्थल भी कहा जाता है।

तैझोउ के समावेशी कारोबारी माहौल के कारण ही जीवन के हर क्षेत्र की निजी कंपनियां यहां फल—फूल रही हैं। वे एक—दूसरे के साथ अस्तित्व बनाए हुए हैं और एक साथ मिलकर प्रयासरत है तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ गहरा जुड़ाव चाहती हैं।

देश और विदेश में तैझोउ के उद्योगों की 307 उत्पाद वर्गों में सबसे ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है जिससे 10 अरब से अधिक युआन के आउटपुट मूल्य के साथ 21 औद्योगिक समूहों का निर्माण होता है, मसलन आॅटोमोबाइल विनिर्माण, मेडिसिन और स्वास्थ्य, सिलाई के उपकरण, प्लास्टिक मोल्ड, पंप और मोटर।

तैझोउ एक खूबसूरत दृश्य से आकर्षित करता है। हीही संस्कृति पारिस्थितिकी विकास सिद्धांत पर आधारित है जो मानव जाति और प्रकृति के बीच सौहार्द को बढ़ावा देता है और साफ पानी तथा हरियाली भरी पहाड़ियां यहां की अनमोल संपत्तियां हैं' जो शहर के शहरी निर्माण तथा स्थायी विकास में गहरे तक जाती हैं।  

यह शहर देश की पहली शहरी हरित बिल्डिंग की विशेष योजना शुरू करती है जिसमें भूमि हस्तांतरण, परियोजना मंजूरी, रियल एस्टेट बिक्री और अन्य शहरी विकास लिंक में दृढ़ जरूरत के तौर पर हरित भवन शामिल हैं।

पड़ोसी शहरों के साथ एकजुटता रखते हुए तैझोउ ने ग्रामीण पर्यटन विकास गठबंधन स्थापित किया है जिसमें शहर और काउंटी सीमाओं पर 264 गांव और 34 द्वीप गांव शामिल हैं। यह गठबंधन सह—विकासशील ग्रामीण पर्यटन के जरिये साझा समृद्धि हासिल करने की कोशिश करता है।

यह ठीक इसकी उभरती अर्थव्यवस्था, खूबसूरत और जीवंत पारिस्थितिकी पर्यावरण और सौहार्दपूर्ण तथा सरल सामाजिक रिवाजों के कारण ही है कि तैझोउ को छठी बार चीन के सबसे खुशहाल शहरों में से एक का दर्जा दिया गया है।

हीही संस्कृति तैझोउ के विकास को मार्गदर्शित करने में स्तंभ सिद्धांत बन गई है। यह साझा समृद्धि, समन्वित सामग्री और सांस्कृतिक नैतिक प्रगति हासिल करने के लिए स्थानीयों को मदद करती है, मानवता और प्रकृति के बीच सौहार्द बनाए रखती है और एक शांतिपूर्ण तथा सौहार्दपूर्ण समाज को पोषित करती है।

हाल के वर्षों में तैझोउ ने हीही संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय आदान—प्रदान को बढ़ाया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान इस शहर ने दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जापान, कनाडा और अन्य देशों के साथ 20 से अधिक आधिकारिक सांस्कृतिक आदान—प्रदान किया है। कनाडा हीही कल्चर रिसर्च एसोसिएशन कनाडा में स्थापित किया गया है और हीही संस्कृति पर अंतरराष्ट्रीय केंद्र दुबई, संयुक्त अरब अमीरात तथा जापान के टोक्यो में स्थापित किए गए हैं।    

हीही संस्कृति पर दूसरा ग्लोबल फोरम 28 से 30 नवंबर के बीच तियानतेई काउंटी में हीही संस्कृति और वैश्विक साझा विकास के थीम पर आयोजित किया जा रहा है। इस क्षेत्र में पिछले साल के प्रयास पर आधारित यह फोरम एक बार फिर इस चर्चा को शुरू करने जा रहा है कि हीही संस्कृति कैसे नए हालात का सामना कर रहे विश्व के साझा विकास के लिए विचार और ज्ञान प्रदान कर सकती है।

'लोग कोल्ड माउंटेन का रास्ता पूछते हैं। कोल्ड माउंटेन: इसका कोई रास्ता नहीं है।'

ये पंक्तियां हीही के दो में से एक देवता हैन शांजी की कविता से ली गई है। आश्चर्यजनक रूप से ये पंक्तियां हजारों वर्ष बाद वर्ष 1997 में प्रकाशित अमेरिकी लेखक चार्ल्स फ्रेजियर के प्रसिद्ध उपन्यास कोल्ड माउंटेन में देखी गईं।

दरअसल, तैझोउ के तियानतेई माउंटेन में एकांतवास कर रहे हैन शांजी ने 1950 और 1960 के दशक के दौरान अमेरिका में सांस्कृतिक गतिविधियां प्रेरित की थी और जापान में उन्हें 'ग्रेट जेन कवि' का सम्मान दिया गया था जिनकी कविताएं पूरे यूरोप में फैल गईं।

इसी तरह तियानतेई माउंटेन पर कभी फली—फूली हीही संस्कृति से अधिक से अधिक देशों और क्षेत्रों में अपना रास्ता तलाश लेने की उम्मीद है जो चीनी बुद्धिजीवियों में जीवन समृद्धि व्याापक पैमाने पर फैला रही है।

स्रोत: हीही संस्कृति का वैश्विक संचार केंद्र

तस्वीर संलग्नक लिंक:
लिंक: http://asianetnews.net/view-attachment?attach-id=434970

कैप्शन: तैझोउ के तियानतेई काउंटी में गुकिंग मंदिर

(संपादक : यह विज्ञप्ति आपको एशियानेट के साथ हुए समझौते के तहत प्रेषित की जा रही है। पीटीआई पर इसका कोई संपादकीय उत्तरदायित्व नहीं है।)